Ahilyabai Holkar Bio in Hindi – अहिल्याबाई की जीवनी

By | April 7, 2017

जानिए महान महारानी अहिल्याबाई होलकर की जीवनी, birth, marriage, और death के बारे में | Ahilyabai Holkar को एक अच्छे शासक के रूप में जाना जाता है | भारत में कई वीर सपूत का जन्म हुआ और इन्होने देश के लिए कई कार्य किये | इनके द्वारा किये गये कार्य के वजह से इन्हें आज भी याद किए जाते है | इन सभी वीर सपूतो के बीच कई वीरांगनाए भी आई | वीरांगनाओ के सूचि में एक नाम अहिल्याबाई होलकर का भी आता है | अहिल्याबाई होलकर का नाम महान शासको के साथ लिया जाता है | 18 वीं सदी में अहिल्याबाई मालवा प्रान्त की रानी के रूप में शासन किया |

Ahilyabai Holkar bio in Hindi

जन्म / Birth

देवी अहिल्याबाई होलकर का जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के चौण्डी गाँव में हुआ था | इनके पिता मंकोजी राव शिंदे थे जो उस गाँव के पाटिल थे | जब अहिल्याबाई का जन्म हुआ था उस समय स्कूल में लड़कियाँ नहीं जाया करती थी लडकियों को घर के काम काज के बारे में बतलाया जाता था लिकिन इनके पिता ने इन्हें स्वयं पढाया लिखाया और इन्हें पढना लिखना सिखाया |

विवाह / Marriage

अहिल्याबाई का जीवन बड़ा सरल था परन्तु इनके जीवन में कुछ ऐसी घटना घटी जो इनके जीवन को बदल कर रख दिया | और इनका जीवन ऐसा बदला की ये 18 वीं सदी में मालवा प्रान्त की रानी बनी | अहिल्याबाई का चरित्र काफी सरल था, ये पेशवा बाजीराव के सेना में एक कमांडर के पद पर कार्यरत थी | इनकी सुन्दरता और शालीनता पेशवा को काफी प्रभावित किया और उन्होंने अहिल्या की शादी अपने बेटे खांडे राव के साथ कर दी और इस प्रकार अहिल्याबाई मराठा समुदाय के होलकर घर की बहु बनी |

शासन काल

शादी के कुछ ही समय  के बाद 1754 में कुंभेर की लड़ाई हो गई और इस लड़ाई में अहिल्या बाई के पति खांडे राव की मृत्यु हो गई | इनके पति के मृत्यु के बाद शासन की सारी जिम्मेदारी अहिल्याबाई के कंधो पर आ गई | और अपने ससुर के अनुमति से सैन्य और प्रशासनिक दोनों मामलों में न ही शिर्फ़ अपनी रूचि दिखाई बल्कि इन मामलों का समाधान बड़े चालाकी के साथ संपन्न किया |

कुछ समय के उपरांत मल्हारराव का निधन हो गया इनके निधन के उपरांत अहिल्याबाई को पेशवा की गद्दी सौपने की आग्रह किया गया, सभी के मंजूरी के उपरांत अहिल्याबाई को पेशवा के गद्दी पर बैठने की मंजूरी दी गई | सन 1766 में अहिल्याबाई ने पेशवा की गद्दी पर बैठी और मालवा का शासन अपने हाथ में लिया | मालवा का शासक बनते ही इन्होने तुकोजी होल्कर को सैन्य प्रमुख बनाया | अहिल्याबाई बचपन से ही निडर प्रतिभा की लड़की थी, और साथ ही यह यूद्ध कला में भी माहिर थी, इनकी इन सभी गुणवत्ता के कारन इन्हें अपने शासन में राजसी सेना का पूर्ण सहयोग मिला | जब अहिल्या ने राजभार लिया था उस समय उनके राज्य में भीलो का आतंक काफी बढ़ा हुआ था | चोरी और डकैती इनका मुख्य पेशा था, भीलो के इस स्वभाव से लोग काफी भयभीत थे | अहिल्या ने जब शासन अपने हाथ में लिया तो उस समय उन्होंने भीलो से राज्य को मुक्त कराने के लिए एक सरल योजना बनाई और अपने राज्य में बैठक बुलाई और इस बैठक में इन्होंने यह ऐलान करया की जो भी राज्य में शांति व्यवस्थ कायम करेगा उससे अपनी बेटी मुक्ताबाई की शादी कर दी जाएगी | इस प्रस्ताव को सुनते ही यशवंतराव फणसे नामक यूवक ने इस काम को करने का ऐलान किया और पुरे राज्य में शांति व्यवस्थ को स्थापित किया | इनके इस काम से अहिल्याबाई काफी प्रसन्न हुई और अपनी बेटी का विवाह यशवंतराव के साथ कर दी |

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कार्य कलाप

आज भी लोगो के द्वारा बुद्धिमान, अच्छी सोच और स्वस्फुर्त शासक के रूप में अहिल्याबाई का नाम लिया जाता है | इन्होने अपने शासन काल के दौरान कई कार्य किए | इन्होने अपने राज्य में जनता के सुविधा के लिए मार्ग, पुल, घाट, धर्मशाला, तालाब अदि का निर्माण कराई | राज्य में कानून थी की पति के मर जाने के बार अगर सम्पति का उत्तराधिकारी कोई नहीं है तो उस सम्पति को राजकोष में जमा कर लिया जाता था, इन्होने इस कानून को ख़त्म किया और मृत के विधवा को इस सम्पति को सुपुर्द करने की कानून बनाई | इस कानून के साथ इन्होने स्त्री कल्याण के अंतर्गत कई कार्य किये जैसे लडकियों को स्कूल भेजना अदि |

भक्ति भाव

अहिल्या बाई बचपन से शिव भक्त थी, भगवान शिव की पूजा किये बिना अपने मुह में पानी का एक बूंद भी नहीं लेती थी | इन्होने अपना जीवन वैराग्य, कर्तव्य पालन, और परमार्थ के साधना के लिए छोड़ दिया | इनके द्वारा जरी किये जाने वाले सभी राजाज्ञाओ में इनके हस्ताक्षर के स्थान पर श्री शिव लिखा मिलता था | इनके द्वारा जारी की गई रूपये में शिवलिंग और बेलपत्र का चित्र अंकित होता था एवं पैसो में नंदी का चित्र होता था | 1977 में विश्व प्रसिद्द काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण इन्होने ही करवाया था | इस मंदिर के अलावा इन्होने और भी कई मंदिरों का निर्माण कराया और पुराने मंदिरों में इन्होने कुए, आश्रय, चबूतरे और मंदिरों का निर्माण कराई |

मृत्यु / Death

अहिल्याबाई के द्वारा भक्ति भाव में कई मंदिरों का निर्माण और अन्य सुविधाओ को प्रदान करने के इनके राजकोष की स्थिति ख़राब हो गई थी | राज्य की चिंता और प्रियजनों के वियोग के शोक भार को अहिल्या संभाल नहीं सकी और 13 अगस्त 1795 को इन्होने अपने प्राण त्याग दिए | इनके मृत्यु के उपरांत राजगद्दी का भर तुकोजी ने संभाला |

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