Alluri Sitarama Raju Biography in Hindi

By | March 27, 2017

Sri Alluri Sitarama Raju was a brave Indian freedom fighter born in 1897. जानिए इस महान क्रन्तिकारी की birth, history, real photos से जुडी जानकारी | भारत को पूर्ण आजादी के पीछे कई बीर सपूत का अहम् योगदान है | इस लड़ाई में कई वीरो ने अपना पूर्ण सहयोग दिया | इस लड़ाई में पुरुष महिला सभी एक दुसरे का साथ देकर आगे बढे, जिसे जहाँ मौका मिला अपना सहयोग दिया | कोई अपना सहयोग किस गाँव तक दिया तो कोई जिले तक तो किसी किसी का सहयोग तो पुरे प्रान्त को स्वतंत्र करने में किया | इस लड़ाई में लोग अपने बूढ़े माँ बाप, लाचार बीबी छोटे बच्चे सभी की प्रवाह किये बिना अपने जान तक गवा बैठे | ऐसे वीरो की सूचि में एक वीर अल्लूरी सीताराम राजू का भी सम्मिलित है |

Alluri Sitarama Raju

अल्लूरी सीताराम राजू को भारतवर्ष अल्लूरी रम्पा रामा राजू या अल्लूरी रामाचंद्रा के नाम से जानता है | सीताराम राजू स्वतंत्र प्रिय व्यक्ति है जो अपनी स्वतंत्रता के लिए घर को छोड़ कर जंगल में अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे | इनके स्वभाव और विचार ऐसे थे की इन्हें किसी बंधन में जकड़ना असंभव सा था | जंगल में रह कर ही रामा राजू ने स्वतंत्रता के लिए लोगो में देशभक्ति की भावना को जागृत किया | इन्होने जंगल में आदिवासियों के मदद से अपनी एक सेना बनाई और इस सेना का नेतृत्व स्वयं किया और 1922-1923 में अंग्रेजो के खिलाफ रामपा विद्रोह किया |

जन्म एवं प्रारंभिक जीवन

भारत के वीर सुपुत अल्लूरी सीताराम राजू का जन्म विशाखापट्नम स्थित पांड्रिक नामक गाँव में 4 जुलाई 1897 ईo में हुआ था | राजू का पारिवारिक सम्बन्ध एक क्षत्रिय परिवार से था और ये जन्म से क्षत्रिय थे | इनकी माता सुर्यनारायणाम्मा एवं इनके पिता का नाम अल्लूरी वेक्टराम राजू था | इनकी प्रारंभिक शिक्षा नजदीक के स्कूल में हो रही थी | प्राम्भिक शिक्षा के अलावा इनकी रूचि वैद्यक और ज्योतिष की और बढ़ने लगी और अध्यात्मिक शिक्षा के अलावा इन्होने वैद्यक और ज्योतिष शिक्षा का भी गहन अध्यन किया | वीर राजू के अल्प आयु में उनके पिता का स्वर्गवास हो जाने के कारण इनकी शिक्षा अधूरी रह गई | पिता के मृत्यु के उपरांत राजू अपने परिवार के साथ अपने चाचा के पास टुनी चले आए |

Alluri Sitarama Raju

जीवन

पिता के मृत्यु के उपरांत राजू अपने परिवार के साथ टुनी चले गये | टुनी जाने के बाद इन्हें तीर्थ यात्रा का मौका मिलने लगा और इस यात्रा के दौरान इनकी मुलाकात पृथ्वीसिंह आजाद से हुई | पृथ्वीसिंह आजाद इस समय राष्ट्र भ्रमण कर लोगो के दिलो में देश प्रेम की जाग्रति कर रहे थे | वीर राजू ने इस अवसर का पूर्ण फायदा उठाते हुए इन्होने पूर्ण देश का भ्रमण किया और इस दौरान घुड़सवारी, तीरंदाजी, योग, ज्योतिष के साथ साथ प्राचीन शास्त्रों का अध्यन और अभ्यास भी किया | अपनी तीर्थयात्रा समाप्त कर राजू वापस आ गए और घर छोड़ कर सन्यासी जीवन व्यतीत करने का संकल्प लिया |


योगदान

गृह त्याग के उपरांत राजू जंगल में रहने लगे | यहाँ इन्होने आदिवासियों को उपदेश ज्ञान दे कर इनके जीवन शैली को बदलने लगे एवं इन्हें इनके दिलो में देश के हित के लिए राष्ट्रभक्ति की भावना जगाने लगे और आदिवासियों के मदद से इन्होने रम्पा के जंगलो में एक गुट का निर्माण करने लगे | इस गुट में उन असहाय लोगो की दाखिला करने लगे जो दो वक्त के रोटी के लिए असहाय है या जिसके पास रहने के लिए घर नहीं है | इन सभी लोगो को अपने सेना में भर्ती कर इन्हें training देते | उस समय राजू के सभी क्रन्तिकारी साथियों में एक बिरैयादौरा भी था | बिरैयादौरा पहले अपना अलग गुट बना कर अंग्रेजो के विरुद्ध युद्ध लड़ रहा था | एक समय अंग्रेज और बिरैयादौरा में मुठभेड़ हुई जिसमे बिरैयादौरा पकड़ा गया और इसे जैल में डाल दिया गया | कुछ दिन बाद बिरैयादौरा जेल की दिवार को तड़प कर भागने में सफल हुए और उसके बाद उसकी मुलाकात राजू से हुई और फिर दोनों ने मिल कर संगठन का संचालन किया | इन दोनों के मिली जुली संगठन इतनी प्रबल हो गई थी की पुलिस भी इनके नाम से डरती थी | अंग्रेजो की कई कोशिशे नाकामयाब हुई, अंग्रेजो को हमेशा हार का सामना करना पड़ता था |

अंग्रेजो के द्वारा राजू और उनके साथी के नहीं पकडे जाने पर ब्रिटिश सरकार ने असम राइफल नाम का एक team गठित किया गया | और इस team में अंग्रेजो के कुशल सैनिको को सम्मिलित किया गया |

मृत्यु

Original picture of Alluri Sitarama Raju

Image Source – Teluguone.com

अंग्रेजो को राजू का इतना दर था की उन्होंने Assam Rifles की एक टुकड़ी भेज दी | 6 मई 1924 में राजू और इनके दल का मुकाबला हथियारों से सुसजित असम राइफल्स से हुई | इस मुकाबले में इनके साथी शहिद हो गये परन्तु वीर राजू बच निकले | इस घटना के बाद ईस्ट कोस्ट स्पेशल पुलिस इन्हें पहाडियों और जंगलो में ढूंढ़ते रहे | 7 मई 1924 को जब राजू जंगल में अकेला भटक रहे थे तब एक अफसर की नजर इनपर पड़ी | हलाकि अफसर इस बात से अनजान होने के बावजूद की, “यह शख्स सीताराम राजू है” उनका पीछा करता रहा | थोड़ी दूर जाने के बाद पुलिस दल ने राजू को पीछे से गोली मार कर उन्हें घायल कर दिया | घायल राजू जमीन पर गिर पड़े और उन्होंने स्वयं अपना परिचय देते हुए कहा की, “मै ही सीताराम राजू हूँ” | इनके घायल होने के उपरांत पुलिस इन्हें गिरफ्तार कर लिया और इन्हें नदी किनारे एक वृक्ष से बांध कर गोली मार दी |

इस तरह एक भारत के महान सुपूत ने अपने देश और अपने लोगों के लिए बलिदान दे दिया |

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