अमरुद की खेती की जानकारी – Guava Farming

By | August 31, 2016

क्या आप भी अमरुद की खेती करने का plan बना रहे है? आइये जानते कैसे Guava farming का business start करे, इससे जुडी जानकारी, common diseases, और profit margin के बारे में | अमरुद बहुत हीं लोकप्रिय फलो में से एक है। इसकी popularity के कारण इसका demand दिनों दिन बढ़ता हीं चला जा रहा है। इसलिए इसकी खेती से farmers को अच्छा खासा income हो सकता है। इसलिए चलिए जानते है की अमरुद की खेती कैसे करने से हमे अच्छे फसल की प्राप्ति मिल सकती है ।

Amrud ki Kheti - Guava Farming in India

वैसे देखा जाये तो अमरुद की खेती Jharkhand, Bihar, Uttar Pradesh, Maharasthra states में आसानी से की जा सकती है | चलिए अब जानते है अमरुद के बागवानी और खेती से जुडी जानकारी के बारे में :

अमरुद की खेती कैसे करे /How to start Guava Farming Business

Yah baat maine kai baar kahi hai ki agar aapke pass khali plot padi hai to use sahi tarike se use karke kisan bhai achaa khasa profit kama sakte hai | Agar aapke pass bhi 1 se 2 acre ki land hai to aap Amrud ke paudhe ko laga kar

भूमि का चयन 

अमरूद की खेती almost सभी सभी तरह की ज़मीन पर की जा सकती है। लेकिन फिर भी अच्छे फसल के production हेतु फलप्रद बलुई दोमट मिट्टी अमरुद की खेती के लिए अच्छी होती है। बलुई मिट्टी वाली भूमि जिसका ph मान 4.5 हो और चूना वाला भूमि जिसका ph मान 8.2 हो उस पर भी अमरुद की खेती को successfully किया जा सकता है।

जलवायु

वैसे तो “अमरूद की खेती” को किसी भी तरह के जलवायु में किया जा सकता है। लेकिन फिर भी अमरूद की खेती के लिए Hot और dry climate सबसे सही रहता है। गर्म area में temperature  और humidity कि पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहने पर फल सालो भर लगते है। जिस area में 124 cm से ज्यादा बारिस होती है उस area में अमरुद की खेती करना सही नहीं माना जाता है । अधिक पाले से अमरुद के छोटे छोटे पौधे को नुकसान पहुँचता है ।

अमरुद की किस्मे / Varieties of Guava 

Types of Guava plant

अमरूद की प्रमुख किस्में कुछ इस प्रकार से है :-

  • इलाहाबादी सफेदा,
  • सरदार 49 लखनऊ,
  • सेबनुमा अमरूद,
  • इलाहाबादी सुरखा,
  • बेहट कोकोनट,
  • चित्तीदार,
  • रेड फ्लेस्ड, आदि ।

पौधे का रोपण

अमरुद के पौधे को रोपने का सबसे सही time होता है July से August तक। जीस स्थान पर  सिंचाई का arrangement अच्छे से किया गया हो उस जगह पर February और march में भी इसके पौधों को रोपा जा सकता है। पौधे को रोपने से पहले भूमि की जुताई की जाती है और फिर  उसे चिकना बना लिया जाता है  । फिर 6*6 meter की दूरी पर 60*60 cm के गड्‌ढों को खोद कर उसमे 1 kg  सड़ी हुई गोबर की खाद, organic खाद और ऊपरी मिट्‌टी को एक साथ mix कर के इस मिश्रण से गड्‌ढे को अच्छी तरह से भर दें और फिर खेत की सिंचाई कर दें । अब पौधा रोपने के लिए गड्‌ढा ready है। जरूरत के मुताबिक गड्ढे को खोदकर उसके center में पौधे को रोप कर चारों side से मिट्टी को दबाकर हलकी सिंचाई कर दें। हर पौधे के बीच का distance लगभग 20 फुट होना चाहिए।

सिंचाई प्रबंधन / Irrigation Management

यदि आपको अच्छी फसल की प्राप्ति चाहिए तो winter season में कम से कम दो बार सिंचाई और  Summer season में तीन बार सिचाई करना होगा। ठंड में 15 days के interval पर और गर्मी में 7 days के interval पर सिंचाई की जाती है। वर्षा के time फसल की प्राप्ति हेतु आपको गर्मी में हीं सिंचाई करनी होगी।

खाद प्रबंधन 

अमरुद की खेती में गोबर की सड़ी हुई खाद का 15 गाड़ी per एकड़ के हिसाब से देने से बहुत profit होता है। इसके छोटे पौधों में बरसात start होते ही खाद दिया जाता है । पौधे का एक हो जाने के बाद उसमे लगभग 15 kg गोबर की खाद दी जाती है । जो पौधे फल देने योग्य हो जाये उसमे 10 लगभग 60 kg गोबर की खाद और 2.5 अमोनियम सल्फ़ेट ,450 g पोटेशियम सल्फ़ेट और 1.25 kg सुपर फ़ॉस्फ़ेट देना होता है । गोबर की खाद का use ठंड start होने के first week और फिर  September month में करना चाहिए।

खरपतवार

अमरुद की खेती में हर 10 से 12 days पर सभी खर-पतवार को निकाल देना जरूरी होता है । जब पौधे बड़े होने लगे तब बरसात के वक़्त एक बार खेत की जुताई कर दी जाती है । यदि आपको स्वस्थ और अच्छे आकर का वृक्ष चाहिए तो समय समय पर अमरुद की डालियों की छँटाई करते रहना होगा ।

रोग व कीट नियंत्रण / Common Diseases in Guava Plant   

अमरूद में कीड़े ज्यादातर बरसात में लगते है। कीड़े लग जाने से पौधों का विकास और फलों की गुणवत्ता पर बहुत प्रभाव पड़ता है।

अमरूद के पेड़ में लगने वाले कीट इस तरह से होते है:

छाल खाने वाली गिडार – यह कीट रात के time में पेड़ की छाल को खाकर उसे हानी पहुंचाती है। इस कीट से बचने के लिए इसके द्वारा बनाये गए जालो को साफ कर दें और सभी छेदों में kerosene oil  भर के उसे मिट्टी से बंद कर दें ।

फल छेदक – यह कीट एक बहुत हीं बड़ी संख्या में अमरुद के फलो को खराब कर देती है । यह  कीट अमरुद के फूलो पर अंडे देती है जिससे निकली हुई इल्लियाँ फलो के भीतर जा कर उसके गुद्दे  को खा जाती है जिससे फल खराब हो जाते है । इस कीट के रोकथाम हेतु पेड़ पर फल लगते हीं   नीम के पत्ते को boil कर उसके पानी का पेड़ो पर छिड़काव करे। यह एक बिना किसी दवा के organic farming के जैसा है जिससे फल अच्छे होते है और खर्चा भी बचता है |

फल मक्खी – यह कीट वर्षा के समय ज्यादा लगता है । ये भी फल के भीतर अंडे देती है जिससे सुंडी निकाल कर गुद्दे को खाने लगाती है और फिर फल सड़ने लगते है । इस कीट के रोकथाम हेतु ग्रसित फलो को पेड़ से तोड़ कर अलग कर देना चाहिए और फिर उबले हुए नीम के पत्ते का पानी का छिड़काव करना चाहिए।

शाखा बेधक – यह किट पेड़ के soft टहनियों में छेद कर देती है जिससे टहनियां मुरझा कर लटक जाती है और फिर सुख कर गिरने लगती है। इसके रोकथाम के लिए भी उबले हुए नीम के पत्तो का हीं इस्तेमाल किया जाता है ।

अमरुद के पेड़ में लगने वाले रोग कुछ इस तरह के होते है :-

उकठा रोग – इस रोग के लग जाने के कारण से पेड़ो की पत्तियां brown हो जाती है, मुडझा जाते है और डालियाँ सूखने लगती है। इस रोग से affected पौधे को फ़ौरन हीं उखाड़ कर फेंक दें और ध्यान रखे की पौधों के जड़ो में पानी नहीं जमना चाहिए ।

तना कैंसर – इसके प्रभाव से डालों की छाले फट जाती है और पेड़ भी सूखने लगते है। इसकी रोकथाम हेतु ग्रसित डालियों को काटकर जाला दे और फिर कटे हुए parts पर ग्रीस लगा दें।

एन्थ्रोकनोज – यह रोग august से October तक ज्यादा लगता है । इस रोग के लगने से फलो पर  भूरे रंग के धब्बे बनने लगते है । इस रोग से बचाव हेतु प्रभावी भाग को पेड़ से अलग कर दे और फिर कटे हुए हिस्सों पर ग्रीस लगा दें ।

फलो की तुड़ाई व भंडारण 

अमरुद के पेड़ पर फूल लगने के लगभग 130 days के बाद फल पकने लगते हैं। जब फलों का रंग green से yellow color में बदलने लगे तब उसे तोड़ लिया जाता हैं। पूरी तरह से विकसित अमरूद के पेड़ से हर साल लगभग 600 फल प्राप्त किये जा सकते है । इसका भंडारण बहुत हीं कम time तक के लिए किया जाता है । अमरूद के फलो को लगभग 23°c  तक के temperature वाले कमरे में किसी छिद्र युक्त पोलीथिन कि थैली में 8 से 10 दिनों तक रखा जा सकता है । भण्डारण करने के लिए ऐसे फलो को चुनना चाहिए जो हल्का पीला हो ताकि फल जल्दी खराब ना हो ।

अमरुद के पेड़ से कितने सालों में फल होने लगता है / How much time Guava tree takes to give fruit

एक बार अमरुद का पौदा लगा देने से 3 से 4 years के बाद फल देने लगता है | और 15 years तक काफी अच्छी amount में fruit होता है और फिर धीरे धीरे production कम होने लगता है |

अमरुद के पेड़ की कितनी आयु होती है / What’s the life of Guava Tree

एक स्वस्थ्य अमरुद का पेड़ की age लगभग 40 years तक होती है और पर कई बार देखा गया है की Guava tree की lifespan 45 years तक भी होती है |

6 thoughts on “अमरुद की खेती की जानकारी – Guava Farming

  1. Awadhesh Singh Narwaria

    Mein Amrodh ka bagh lagana chahta hun. Lekin kis tarike se ek achhaa bagh lagaya jaye ye jankari lena chahta hun.

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  2. Obaid

    Very good and useful information Can U please share with me the meadows system of guava farming introduced recently by Lucknow based Mango research institute .

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  3. Manoj soni

    Me amrud ki kheti karna chahata hu me dist. Sihore m.p ka rahne wala hu mujhe kon se amrud lagana chahiye jo achchi kism ka ho

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