आर्यभट्ट जी की जीवनी / Aryabhatta Biography in Hindi

By | January 14, 2017

जानिए महान गणितज्ञ आर्यभट की जीवनी के बारे में – आप भी पढ़े Aryabhatta Biography in Hindi को की एक महान mathematician थे – उनके Astronomy और Astrology को पढ़े |Aryabhatta” का जन्म दिसम्बर ई.स. 476 में हुआ था । इनके जन्म स्थान का अभी तक सही पता नहीं चल पाया है । कुछ लोगो का कहना है की इनका जन्म पटना (बिहार) में हुआ था और इन्होने अपनी उच्च शिक्षा भी यहीं से प्राप्त की थी । बहुतो का मानना है की इनका जन्म Maharashtra के अश्मक राज्य में हुआ था । आर्यभट अपने time के एक famous खगोलशास्त्रीयों और गणितज्ञों (mathematician) थे ।

Aryabhatta in Hindi

आर्यभट के कार्य / Work of Aryabhatta

आर्यभट ने तीन ग्रंथ की रचना की थी जो की आज भी मौजूद है:-  दशगीतिकाआर्यभटीय और तंत्र। इसके अलावा कहा जाता है की इन्होने एक और ग्रंथ की रचना की थी  – ‘आर्यभट सिद्धांत’। अब ये ग्रन्थ लुप्त हो गया है और इसके बारे में किसी को भी कोई जानकारी नही मिलती है।  अभी इसके  सिर्फ ३४ श्लोक ही मौजूद हैं।

आर्यभट्‍ट ने हीं first time बीजगणित यानि की Algebra का प्रयोग किया था । आपको शायद ये बात पता होगी की इन्होने अपनी famous रचना  ‘आर्यभटिया’ जो की एक maths की पुस्तक है उसे कविता के रूप में लिखा था। आर्यभट की ये किताब पहले जमाने में बहुत famous हुआ करती थी। उन्होंने  अपनी रचना आर्यभटीय  में Square root, cube root, parallel class और Different types of equations का वर्णन किया है। अपने इस ग्रन्थ में आर्यभट ने कुल 3 pages के समा सकने वाले 33 श्लोकों में Mathematic concept और  5 pages के 75 श्लोकों में Theories regarding astronomy और इसके लिये Instruments का भी वर्णन किया है । इस पुरे ग्रंथ में total 108 श्लोक है और ऊपर से परिचयात्मक 13 अतिरिक्त भी दिए गए हैं। इन सभी को 4 अध्यायों में divide किया गया है :-

  • गीतिकपाद (13 verses) – इसमें Large units of time –  युग, जो आरंभिक ग्रंथों से अलग एक ब्रह्माण्ड विज्ञान मौजूद करते हैं वो सब शामिल है।
  • गणितपाद (33 verses) – इसमें mensuration, Arithmetic and geometric progressions, cone , Quadratic, simultaneous आदि शामिल है।
  • कालक्रियापाद (25 verses) – इसमें  Different units of time और method of determining the positions of planets के साथ और भी बहुत कुछ दिया गया है ।
  • गोलपाद (50 verses) – Geometric celestial sphere /Trigonometric factor, Ecliptic, celestial equator Node, the shape of the earth, आदि के बारे में बताया गया है ।

इस किताब में दी गई अधिकतर जानकारी Astronomy (खगोलशास्त्र) और spherical trigonometry से related है। इस किताब में Arithmetic, algebra और trigonometry के 33 rules भी बताये गए हैं ।


आर्य-सिद्धांत 

इस रचना के बारे में ज्यादा जानकारी किसी को भी नहीं है। कहा जाता है की इस ग्रन्थ में बहुत सारे Astronomical instruments का वर्णन है। जिसमे से शंकु-यन्त्र (Cone instrument), छाया-यन्त्र (Shade-instrument), कोण मापी उपकरण (angle-measuring devices), एक बेलनाकार छड़ी यस्ती-यन्त्र, और जल घड़ियाँ main है । 

आर्यभट्ट का योगदान / Contribution of Aryabhatta

इन्होने Mathematic में कई महत्वपूर्ण योगदान दिया था जो की इस प्रकार है:

  • “पाई” की खोज – आर्यभट ने “पाई” के मान (value) की खोज की है जो की इनके द्वारा रचित “आर्यभटिया” के गणितपाद 10 में मिलेगा । इसमें इन्होने पाई का मान “1622” निकाला है जो की modern value के बराबर ही है।
  • “शून्य (Zero)” की खोज – आर्यभट ने zero की भी खोज की थी । zero का value इतना है की यदि इसे किसी number के आगे लगा दिया गया तो उस नंबर का मान 10 गुना ज्यादा बढ़ जाता है ।
  • त्रिकोणमिति (Trigonometry) – इन्होने trigonometry की भी खोज की थी । गणितपाद 6 में इन्होने त्रिभुज के क्षेत्रफल के बारे में बताया है ।
  • बीजगणिता (Algebra) – Mathematics में algebra का use सबसे पहले आर्यभट्ट ने हीं की थी। आर्यभटिया में इन्होने square और cubes की श्रंखला के जोड़ का भी उचित परिणाम बताया है ।
  • Decimal – आर्यभट ने “दशमलव” यानि की decimal का भी रचना की है ।
  • संख्याओं को छोटा करना – आर्यभट ने बड़ी बड़ी numbers को short में लिखने के लिए Alphanumeric mode की भी खोज की है । for example :- 1 को short में ’अ’ लिख सकते है , 100 को ’इ’ लिखा जा सकता है, 10000 को ’उ’ आदि ।

खगोलशास्त्र में योगदान / Contribution in Astronomy

  • आर्यभट ने खगोलविज्ञान क्षेत्र में first time ये बताया बताई थी की की पृथ्वी स्वयं अपनी अक्ष पर rotate करता है।
  • आर्यभट्ट ने यह भी proved किया है की 1 year में 2951 days नहीं बल्कि  365 days होते हैं।
  • करीब डेढ़ हजार साल पूर्व हीं आर्यभट्ट ने ज्योतिष शास्त्र  (Astrology) की खोज की थी।
  • खगोलशास्त्र क्षेत्र में इन्होने motion of solar system, ग्रहण (eclipse), sidereal periods के बारे में बताया है ।
  • करीब 1000 years पूर्व ही आर्यभट्ट ने ये खोज कर ली थी कि “Earth is round” और उसकी Perimeter लगभग 24835 मील है।
  • इन्होने Bihar के तरेगाना area में सूर्य मंदिर में एक School inspection भी खोला है ।

मृत्यु / Death

आर्यभट की मृत्यु ई.स. 550 में हुई थी ।

Image Source – http://astec.gov.in/

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