Begum Hazrat Mahal History in Hindi – बेगम हज़रत महल

By | March 28, 2017

आज पढ़िए Begum Hazrat Mahal की biography in Hindi, जो की एक स्वतंत्रता सेनानी थी | जानिए बेगम हज़रत महल के family, marriage, real picture और death के बारे में | भारत के इस पवन धरती पर कई वीर सपूत एवं वीरांगनाओ ने जन्म लिया इन्होने देश की आजादी के लिए अपने जान का भी प्रवाह नहीं किया | कुछ वीर देश के आजादी के लिए लड़ी गई पहली लड़ाई में प्रचलित हुए तो कुछ वीर पूर्ण आजादी के लड़ाई में प्रसिद्द हुए | देश के आजादी के लिए लड़ी गई लड़ाई में कई वीर एवं राजाओ ने अपना योगदान दिया | आजादी के पहली लड़ाई में योगदान देने वाले वीरो में एक वीर बेगम हज़रत महल भी सम्मिलित है |

Begum hazrat mahal bio

बेगम हज़रत महल को लोग एक महान भारतीय स्वतंत्रता सेनानी के रूप में जानते है | इन्हें ‘अवध के बेगम’ के रूप में भी जाना जाता है, वे लखनऊ और अवध के ने नवाब वाजिद अली शाह के पत्नी थी | वाजिद अली शाह के बारे में कहा जाता है की ये अवध के दशवे एवं आखरी शासक थे | उन्होंने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में ब्रिटिश सरकार का डटकर मुकाबला किया  | ब्रिटिश सरकार ने इनके सल्तनत पर कब्ज़ा कर लिया तब उन्होंने अपने पुत्र को राजगद्दी पर बिठाई और इसकी बागडोर को अपने हाथ में लिए और यहाँ की जनता भी इनको अपना पूरा सहयोग दिया | जनता के द्वारा मिले सहयोग के साथ उन्होंने  ने अंग्रेजो के विरुद्ध संघर्ष छेड़ दिया और इस संघर्ष के अंत में बेगम को हार मिली | इस हार ने इन्हें पूरा झझकोर दिया और वे  अपने राजपाठ को छोड़ कर नेपाल में शरण ले ली और अपना बाकि का जीवन नेपाल में ही व्यतीत किया |

Name: Begum Hazrat Mahal (मुहम्मदी खानुम)

Birth: 1820

Religion: ‎Islam

Husband‎: ‎Wajid Ali Shah

Died: 1879

परिवार और विवाह  / Family & Marriage

बेगम हज़रत महल का सन 1820 में उत्तर-प्रदेश के अवध प्रान्त में स्थित फैजाबाद में जन्म हुआ था | उनका  का आरंभिक नाम मुहम्मदी खानुम था जो देखने में काफी खुबसूरत थी | इनके माता पिता काफी गरीब थे, वे अपना जीवन व्यापन सही से नहीं कर पाते जिस वजह से इन्हें साही दलाल के पास बेच दिए थे | दलाल इनका नाम परी रखा और बेगम परी के नाम से प्रसिद्द हुई | वाजिद अली के दरवार में सभी इन्हें इनकी खूबसूरती की काफी तारीफ किया करते थे | इनकी खूबसूरती और इनके अन्दर मौजूद नेतृत्व करने की क्षमता और इनके गुणों ने वाजिद अली शाह को काफी आकर्षित किया और वाजिद शाह ने इन्हें अपना बेगम बनाने का निर्णय लिया | मुहम्मदी खानुम की सगाई वाजिद अली शाह के साथ होने के बाद इनके गर्भ से एक पुत्र की उत्पत्ति हुई जिनका नाम बिरजिस कादर के नाम से जाना जाता है | बिरजिस कादर के जन्म के उपरांत इन्हें हजरत महल की उपाधि दी गई और उसके बाद मुहम्मदी खानुम बेगम हजरत महल के नाम से प्रसिद्द हुए |

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योगदान / Begum Hazrat Mahal’s Contribution

Original picture of Begum Hazrat Mahal

भारत में 1850 के दशक में अंग्रेज अपने सम्राज का विस्तार करने पर लगे हुए थे, अंग्रेज जिस राजा का उत्तराधिकारी नहीं होता था उस राज्य को अपने साम्राज्य में मिला लेते थे | इस दौरान अवध रियासत कला, संस्कृति और साहित्य के लिए जाना जाता था | अंग्रेजो ने 1856 में अवध पर भी कब्ज़ा कर लिए और नवाब वाजिद अली शाह से उनका राज्य छीन लिया और उन्हें इसे  छोड़ने पर मजबूर कर दिया | वाजिद साहब अपनी  रियासत को छोड़ कोलकाता चले गये | इससे पुरे राज्य के प्रजा में खलबली मच गई की बिना राजा का राज्य कैसे चलेगा | तब बेगम आगे आई और अपने पुत्र बिरजिस कादर को गद्दी पर बिठा कर स्वयं राज पाठ का संचालन करने लगी | पहले स्वतंत्रता संग्राम के दरमियान वे क्रांतिकारी  ताकतों के साथ मिल कर अंग्रेजो को लखनऊ से मार भगाई | इस लड़ाई के समय इन्होने कई क्रांतिकारी एवं शासको की मदद की और अंग्रेजो को पीछे हटाया | इस घटना के बाद लोग उनको अवध के लक्ष्मी बाई के रूप में संबोधित करने लगे | 1858 में अंग्रेजो ने लखनऊ पर दुबारा आक्रमण किया और इस बार लड़ाई लम्बी चली, पर इस लड़ाई में टिक नहीं पाई और उन्हें हार का सामना करना पड़ा |

मृत्यु / Death

1858 में अंग्रेजो द्वारा हुए हमले में बेगम को पीछे हटाना पड़ा जिससे लखनऊ में अंग्रेजो ने दुबारा शासन स्थापित किया | 1858 में मिले इस हार के बाद वह  लखनऊ छोड़ कर नेपाल चली गई और अपना बाकि का जीवन व्यापन नेपाल में किया एवं सन 1879 को इनकी मृत्यु हो गई |

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