Birbal Biography in Hindi – बीरबल का इतिहास

By | January 5, 2017

आइये जानते हैं ज्ञानी बीरबल के इतिहास के बारे में – Birbal Biography in Hindi –  राजा बीरबल की education, marriage, stories, death से जुडी जानकारी | बीरबल का birth सन 1528 में कल्पी के पास के एक village में हुआ था जो की India के UP state में आता है। लोककथाओं के अनुसार, जिस village में बीरबल का birth हुआ था वो village यमुना नदी के किनारे बसा “टिकवनपुर” पर था। बीरबल का असली नाम “महेश दास” था लेकिन अकबर के दरबार में जाने के बाद इसकी चतुराई को देखते हुए अकबर ने इन्हें “वीर वर” का नाम दिया जो की आगे चलकर “बीरबल” के नाम से प्रसिद्ध हो गया। “बीरबल” गंगा दास व अनभा दवितो के पुत्र थे । एक Hindu ब्राह्मण family जो की पहले भी कविताये या साहित्य के लिए प्रसिद्ध रह चुके है बीरबल उस family के तीसरे बेटे थे । Indian history में बीरबल अपनी चतुराई के लिए काफी famous है। Birbal Biography in Hindi

Biography

Real Name: Mahesh Das

Nick Name: Birbal

Date of Birth: 1528

Age: 58

Birth Place: Uttar Pradesh

Occupation: Courtier

Parents: Ganga Das and Anabha Davito

Passed away: 1586

बीरबल की शिक्षा / Education of Biral

“बीरबल” ने हिंदी language के साथ साथ संस्कृत और फ़ारसी language में भी शिक्षा हासिल की थी । वे कविताएँ भी लिखा करते थे और उनके द्वारा लिखा गया कविता अधिकतर ब्रज भाषा में होता था । Singing में भी बीरबल की विद्या काफी अच्छी थी। धीरे धीरे उनकी कविताएँ और उनकी लतीफ़े famous हो गई । कुछ समय तक उन्होंने “ब्रह्मा कवि” के नाम से रीवा के राजा “राम चंद्र” के राजपूत दरबार में सेवा की। बीरबल की आर्थिक और सामाजिक स्थिति में तब सुधार हुआ जब उन्होंने एक सम्मानित और अमीर परिवार की बेटी से शादी की । 

बीरबल का विवाह / Marriage

बीरबल का विवाह एक बहुत हीं सम्मानित और अमीर परिवार की बेटी से हुआ था। बीरबल की पत्नी का देहांत बहुत पहले ही हो गया था। बीरबल के 2 बेटे व 1 बेटी थी। बीरबल ने अपनी बेटी की शादी एक नामी कवि घाघ के भतीजे आशादत्त के साथ करवाया था । कहा जाता है की बीरबल की बेटी बीरबल से भी ज्यादा चतुर व बुद्धिमान थी और वे हर मुशिबत में अपने पिता की मदद करती थी ।

अकबर और बीरबल की दोस्ती / Friendship of Akbar and Birbal

सन 1556 में अकबर ने जो की मुगल का बादशाह था बीरबल को अपने मुगल दरबार में एक कवी के रूप में नियुक्त किया था । बीरबल मुग़ल दरबार का सबसे famous सलाहकार भी कहलाता था। बीरबल का Mughal Empire के साथ एक बहुत हीं Close relations जुड़ गया था इसी वजह से उसे अकबर के नवरत्नों में से एक माना जाता था।  मुग़ल दरबार में जाने से पूर्व बीरबल बहुत दिनों तक  कालपी, कालिंजर और रीवां नरेश के दरबार में भी कवि के रूप में रह चुके थे।  कहते है की Hindu religion के प्रति अकबर की दरियादिली बीरबल के वजह से ही थी । बीरबल अपनी चतुराई से मुग़ल के बादशाह अकबर की सभी समस्याओं का हल बड़ी हीं आसानी से निकाल देता था । इसी वजह से अकबर बीरबल से बहुत ज्यादा प्रभावित था और  उसकी बहुत respect भी करने लगा था। अकबर बीरबल की बुद्धि से इतना खुश हुआ की उन्होंने उसे अपना सेवक नहीं बल्कि अपने मित्र का स्थान दे दिया। अकबर हमेशा बीरबल की बुद्धि और ज्ञान की तारीफ करते थे। बीरबल ने भी खुद को पूर्ण रूप से अकबर के प्रति समर्पित कर दिया था ।

बीरबल का योगदान / Contribution of Birbal

बीरबल ने अपने सम्राट अकबर के नाम से यमुना नदी के तट पर “अकबरपुर” नाम से एक village  बसाया था जो की अब “बीरबल का अकबरपुर” के नाम से जाना जाता है। इस village में बीरबल ने कई सारे मंदिर भी बनवाए थे। इस village के निकट बीरबल ने कानपूर-हमीरपुर के पथ के किनारे में “सचेंडी” नाम के एक गॉव में शिव जी का एक भव्य मंदिर भी बनवाई थी । उन्होंने इस मंदिर की  देख रेख के लिए आस-पास के ८० गॉवों से वृत्ति बांध दी थी । आज ये मंदिर “वीरेवर महादेव” के रूप में जाना जाता है ।

मृत्यु / Death  

बीरबल कि मृत्यु सन 1586 में स्वात, पाकिस्तान की एक युद्ध में लड़ते हुए ही हो हुई थी।

अकबर  और बीरबल की प्रचलित कहानियां 

वैसे तो अकबर और बीरबल की ऐसी बहुत सी कहानियां है जो की indian history में आज भी बहुत famous है । लकिन सभी कहानियों में एक कहानी जो सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है वो है “बीरबल की खिचड़ी” ।

“बीरबल की खिचड़ी” – Birbal’s Story

एक बार ठण्ड के मौसम में अकबर और बीरबल दोनों एक नदी के किनारे टहल रहे थे । तभी बीरबल के मन में एक ख़याल आया की क्या कोई व्यक्ति पैसे के लिए सारी रात इस नदी में घुटनों तक डूब कर सारी रात गुजार सकता है ? उसने ये बाद अकबर से कही तो अकबर ने कहा की यदि कोई ऐसा कर सकता है तो मै उसे इनाम दूंगा ।

इस बात को सुनते हीं एक गरीब धोबी ने खुद को नदी में घुटनों तक डुबो कर पूरी रात बिता दिया और फिर अगले दिन अकबर के दरबार में ईनाम लेने पहुँच गया ।

अकबर ने पहले उस धोबी से पूछा की तुम कैसे इतनी ठण्ड में रात भर उस नदी में खड़े रह गए?

उस धोबी ने जवाब देते हुए कहा की मैं सारी रात नदी के किनारे महल के एक कमरे में जलते हुए दीपक को देखता रहा तो मुझे ठण्ड का एहसास नहीं हुआ और मेरी रात कट गई।

उसकी बात सुन कर अकबर ने कहा  की तुम महल के दीपक से गरमी ले ले कर पूरी रात नदी में खड़े रहे ये दो धोखा हुआ तुम्हे कोई इनाम नहीं मिलेगा । ये सुन कर बीरबल को बहुत बुडा लगा और वो अगले दिन दरबार में नहीं आया । अकबर ने अपने एक सेवक को बीरबल को बुलाने के लिए कहा । उस सेवक ने वापस आकर अकबर से कहा की बीरबल खिचड़ी बना रहे हैं और उन्होंने कहा है की जब तक उनकी खिचड़ी पक ना जाएँ वो नहीं आएँगे।

काफी वक्त हो गया और फिर भी बीरबल दरबार में नहीं पहुंचा। फिर अकबर खुद से बीरबल को बुलाने गए तो वहां उन्होंने देखा की बीरबल ने एक लंबे से डंडे पर एक घड़ा बाँध कर उसे बहुत ऊँचा लटका दिया है और नीचे में आग जल राखी है ।

अकबर को गुस्सा आया और उन्होंने बीरबल से कहा की ये क्या तमाशा लगा रखे हो ? क्या खिचड़ी कभी भी ऐसे पकेगी ?

तब बीरबल ने जवाब दिया जहाँपनाह, खिचड़ी क्यूँ नहीं पकेगी ? जब उस धोबी को नदी से दूर महल में जल रहे दीपक से गरमी मिल सकती है तो मेरी खिचड़ी तो आग से कुछ हीं दूर है।

बीरबल क्या खाहना चाह रहा था ये बात अकबर को समझ में आ गई । अकबर ने बीरबल को गले से लगा लिया और धोबी को ईनाम देने का आदेश दिया।

इसके अलावा अकबर और बीरबल की “छोटा बांस, बड़ा बांस” , “बादशाह का सपना” आदि कई सारी कहानिया है ।

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