चंद्रशेखर आजाद की जीवनी – Chandra Shekhar Azad Biography

By | January 10, 2017

महान स्वतंत्रता सेनानी Chandra Shekhar Azad biography in Hindi – इनका real name पंडित चंद्रशेखर तिवारी था – जानिए इनकी family, kakori kand, death और facts की जानकारी | जब कभी हमारे बीच वीर करान्तिकरियो की बात की जाती है या उनका जिक्र किया जाता है तो हमारे दिमाग में कुछ दिवंगत महापुरुषों का नाम सर्वप्रथम हमारे दिमाग में आता है | हमारे दिमाग में कई वीर महापुरुषों की तस्वीर बनती है जिसमे से एक है चंद्रशेखर आजाद | आजाद पुरे भारत वर्ष में वीर क्रांतिकारियों में से एक थे | आजाद भारत को पुर्णतः आजाद देखना चाहते थे, इसके लिए उन्होंने गाँधी जी द्वारा चलाए जा रहे असहयोग आन्दोलन में भाग लिया जिसके कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा | आजाद ऐसे क्रांतिकारी थे जिन्हें बहुत ही कम उम्र में जेल जाना पड़ा था | आजाद हमेशा आजाद रहना चाहते थे और इन्होने यह प्रण ली थी की कभी भी अंग्रेजो के द्वारा पकडे नहीं जाएँगे | इन्होने अपने इस प्रण का पालन करते हुए अंग्रेजो से लड़ते समय अपने आखरी गोली से उन्होंने स्वाम को मार लिए थे |

Chandra Shekhar Azad

Biography of Chandra Shekhar Azad / चंद्रशेखर आजाद की जीवनी 

Name: Chandra Shekhar Tiwari

Date of Birth: 23 July 1906

Age: 24

Parents: Sitaram Tiwari and Jagrani Devi

Passed away: 27 February 1931

चंद्रशेखर आजाद का जन्म और परिवार / Chandra Shekhar Azad  Birth and Family 

वीर स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 में भाबरा नामक गाँव में हुआ था जो मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले में स्थित है | आजाद के पिता का नाम पण्डित सीताराम तिवारी एवं इनकी माता जगरानी देवी थी जो पण्डित सीताराम के तीसरी पत्नी थी | आजाद का पैत्रिक स्थान बदरका था जो वर्तमान में उत्तर प्रदेश में उन्नाव के नाम से जाना जाता है | 1906 में आकाल पड़ने के कारण आजाद के पिता अपना पैत्रिक निवास छोड़ कर भाबरा चले आए थे जहा आजाद का जन्म हुआ | आजाद का बचपन भील बच्चो के साथ बिता, इनके साथ रहकर आजाद ने धनुष बाण का इस्तेमाल खूब किया और बचपन में ही ये अच्छे निशानची बन गये | कुछ दिनों के बाद जब आजाद थोड़े बड़े हुए तो इनकी माता इनको संस्कृत के ज्ञानी बनाना चाहती थी और आजाद को काशी विद्यापीठ भेजना चाहती थी | परन्तु 1921 में गाँधी जी के द्वारा शुरू किये गये असहयोग आन्दोलन आजाद को काफी आकर्षित किया और आजाद ने अपनी पढाई छोड़ कर इस आन्दोलन का एक हिस्सा बने |

स्वतंत्रा संग्राम में चंद्रशेखर आजाद का सहयोग 

1919 में हुए जलियावाला बाग हत्याकाण्ड पुरे भारत वर्ष के लोगो को झझकोर के रख दिया था | जब आजाद 15 वर्ष के थे उस वकत गाँधी जी ने असहयोग आन्दोलन 1921 में आरम्भ किये थे यह आन्दोलन लोगो के अन्दर ज्वालामुखी के तरह सभी का गुस्सा निकला, जिसमे कई भारतीयों ने हिस्सा लिया | इसमें बच्चे बूढ़े सभी थे, जिसमे से एक आजाद भी थे | इस आन्दोलन में भाग लेने के वजह से अंग्रेजो ने इन्हें गिरफ्तार भी किया | जब आजाद को मजिस्ट्रेट के पास लाया गया तो मजिस्ट्रेट ने इनसे नाम पूछने पर इन्होने अपना नाम “आजाद” अपने पिता का नाम “स्वाधीन” और अपना घर “जेल की कोठरी” बतलाया | इस घटना के बाद चंद्रशेखर तिवारी “चंद्रशेखर आजाद” के नाम से जाने जाने लगे | असहयोग आन्दोलन के मध्य से लोगो के अन्दर का गुस्सा ऐसा निकला की चौरा चौरी में ब्रिटिश सरकार के एक पुलिस चौकी में आग लगा दिया जिसमे 22 पुलिस कर्मी जिन्दा जल गये थे | यह अहिंसा का तरीका गाँधी जी को बिलकुल पसंद नहीं आया और उन्होंने असहयोग आन्दोलन को बंद करने का ऐलान कर दिया |

Real picture of Chandra Shekhar Azad

असहयोग आन्दोलन बन कर देने से नवयूवक काफी उग्र थे | और लोगो किसी भी कीमत में पूर्ण आजादी पाना चाहते थे | और इनकी यही चाह को देखते हुए पण्डित राम प्रसाद बिस्मिल और योगेशचंद्र चटर्जी ने 1924 में उत्तर भारत में Hindustan Republican Association का स्थापना किये जो पुर्णतः क्रांतिकारी संस्था था | इस संस्था में अपनी सदस्यता शामिल करने के लिए आजाद ने जलती हुई मोमबत्ती पर अपने हाथ का जलने का प्रवाह किये बिना रख कर किया जो राम प्रसाद बिस्मिल को काफी पसंद आया और आजाद को अपने संस्था के सदस्य के रूप में सम्मिलित किया | इस संस्था का सारा काम चंदा से जमा पैसे से होता था | और इनके संस्था का चंदा ज्यादातर सरकारी तिजोरियो से लुटे गये पैसे होते थे | चंदा के लिए इन्होने काकोरी में अंगेजो के पैसे ट्रेन से लुटा जो 1925 के काकोरी कांड से जाना जाता है | काकोरी कांड से ब्रिटिश सरकार के नीव को हिला कर रख दिया था | इसके कुछ समय बाद सन 1928 में चंद्रशेखर आजाद ने लाला लाजपत राय के कातिल जे.पी. सौन्ड़ेर्स को मौत के घाट उतार दिए थे | इन क्रान्तिकारियो की गतिविधियों से अंग्रेजी हुकूमत पूरी तरह भयभीत थी | और इन सभी को पकड़ने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दिए थे |

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मृत्यु / Death

27 फरवरी 1931 को आजाद और उनके साथी के साथ अलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में मंत्रणा कर रहे थे | इस बात की खबर किसी ने अंग्रेजो को दे दी थी, अंग्रेजो ने पार्क को चारो और से घेर लिया था और दोनों तरफ से काफी समय तक गोलीबारी चलती रही, जब आजाद के पास एक गोली बची और वे वहा से भाग नहीं सके तो उन्होंने अपने आप को अंग्रेजो के हवाले करने से अच्छा खुद को गोली मार लेना समझा और उन्होंने वही किया और इस प्रकार आजाद का प्रण भी नहीं टुटा, उन्होंने प्रण ली थी की जीते जी वे अंग्रेज के कभी गुलाम नहीं बनेगे |

Interesting Facts of Chandra Shekhar Azad

  • चंद्रशेखर को लोग आजाद के नाम से जानते थे |
  • आजाद की माँ इन्हें संस्कृत के ज्ञानी बनाना चाहती थी परन्तु आजाद के मन में तो भारत माता को स्वतंत्र होते देखना चाहते थे |
  • आजाद जब पहले बार असहयोग आन्दोलन में भाग लेने के कारण जेल गये थे उस समय उनका उम्र मात्र 15 साल था |
  • Hindustan Republican Association के मुख्य रणनीतिकार आजाद थे |
  • आजाद काकोरी ट्रेन डकैती के बाद काफी प्रशिद्ध हो गये थे |
  • आजाद यह प्रतिज्ञा लिए थे की वे अंग्रेजो के हाथ में कभी नहीं आएँगे |
  • आजाद जब अंग्रेजो से पूरी तरह घिर गये थे तो उन्होंने अपनी आखरी गोली अपने सर में मार लिए थे |
  • उनके वीरगति के प्राप्त होने के बाद भी British police दर से उनके पास कई देर तक जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाई थी |
  • जिस पार्क में आजाद की मृत्यु हुई उस पार्क का नाम आजाद के नाम पर रखा गया है |

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