Dhaincha Seeds Meaning in Hindi, Uses, Price & Cultivation

By | June 12, 2017

Kya aap Dhaincha se judi jankari khoh rahe hain? Janiye iska Hindi mein kya meaning hota hai, is seed ka price per kg, uses Dairy mein aur cultivation kaise hota hai .  पृथ्वी पर कई प्रकार के वनस्पति पाए जाते है जो मानव जीवन को सरल और आसान बनाता है | ऐसे वनस्पतियों में एक वनस्पति  Dhaincha भी शामिल है | Dhaincha seeds मनुष्य के बहूपयोगी वस्तुओ में से एक है | क्या आपको पता है इस बीज के बारे में ? आज जानते है इस बीज से सम्बंधित जानकारियो के बारे में |

Dhaincha seeds in Hindi and information

Meaning of Dhaincha Seeds

Dhaincha Seeds = ढैंचा बीज

  • दादेन (Daden)

इसे हिंदी में ढैंचा बीज कहा जाता है यह एक प्रकार का झाड़ीनुमा वनस्पति है जिसका उत्पादन मुख्य रूप से एशिया और उत्तरी अफ्रीका में अधिक होता है | यह पौधा प्रायः उष्णकटिबंधीय क्षेत्रो में एक हानिकारक घास के रूप में उत्पन्न होता है | इस पौधे का वैज्ञानिक नाम Sesbania bispinosa है | Sesbania एक प्रकार का अरबी भाषा का शब्द है जो अरबी नाम Siesaban से लिया गया है | इस पौधे को ढैंचा, दांची, दुंची, चानिचा, spiny sesbania आदि नामो से भी जाना जाता है |

Dhaincha Seeds Uses

एशिया में पाए जाने वाले ढैंचा जल्द बढ़ने वाला एक छोटा पौधा है, इस पौधे के छाल एवं इसके पत्ते को हरा खाद के रूप में इस्तेमाल किया जाता है | इस पौधे को अपने फसल के साथ लगाने से फसल के लिए अच्छा होता है | इस पौधे के जड़ में nodules मौजूद होता है जो मिट्टी में nitrogen fixing जीवाणु का अच्छा स्रोत होता है | अगर आप अपने डेरी फार्म के लिए चारा उगाना चाहते है तो fodder के बारे में यहाँ जरुर पढ़े |

इस पौधे में खुबसूरत पीले रंग के फुल की उत्पन होता है जिसे लोग खाद्य प्रदार्थ के रूप में इस्तेमाल करते है | इस पौधे में मौजूद सभी चीज का इस्तेमाल मनुष्य के द्वारा किसी ना किसी रूप में किया जाता है | इसके बीज का इस्तेमाल निम्न प्रकार से किया जाता है |

  • ढैंचा के बीज का इस्तेमाल मुख्य रूप से जानवरों को चारा के रूप के किया जाता है | इसे dairy के लिए काफी प्रयोग किया जाता है | परतु इस बीज को जानवरों को बड़े सावधानी एवं नियमित मात्रा में दिया जाता है | इस बीज का अधिक इस्तेमाल पोल्ट्री में किया जाता है |
  • इसमें अच्छी मात्रा में protein पाई जाती है |
  • ढैचा के बीज को अगर आप पानी में डाल कर उबलते है तो इससे हमे एक मजबूत फाइबर प्रदान होता है | इस process से मिलने वाला फाइबर का इस्तेमाल पानी से सम्बंधित कार्यकलाप में किया जाता है | ढैंचा के बीज को उबालने पर मिलने वाला फाइबर का इस्तेमाल पेपर उद्योग में किया जाता है |
  • ढैंचा के बीज को आंटे के साथ मिलाकर इसका इस्तेमाल दाद, घाव या किसी अन्य प्रकार के त्वचा सम्बन्धित बीमारियों को ठीक करने के लिए किया जाता है |

Dhaincha Seeds Price

बाजार में ढैंचा कई प्रकार के उपलब्ध है | इसके मूल्य का निर्धारण इस बीज के quality पर होता है | अगर बीज की गुणवत्ता कम हो तो इसका मूल्य कम होता है परन्तु उच्च गुणवत्ता होने पर इसे अधिक मूल्य पर बेचा जाता है | बाजार में ढैंचा के बीज का price 35 से 50 Rs/kg होता है |

Cultivation

ढैंचा की खेती के लिए उष्णकटिबंधीय प्रदेश अति उत्तम प्रदेश है | इन प्रदेशो में इस पौधे का फसल बहुत ही अच्छी होती है | उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में पाए जाने वाली मिट्टी इस पौधे के योग्य है एवं यहाँ के मौसम एवं जलवायु इस पौधा के अनुकूल है | अगर आप इस क्षेत्रो में इस पौधे का फसल करते है तो इसका उपज अच्छा होता है | इस फसल के लिए 24oC से 33oC का तापमान उत्तम माना गया है | एवं इसके फसल के उत्तम पैदावार के लिए कुल वर्षा 1400 mm की आवश्यकता होती है | इस फसल को बोने का सही समय जुलाई महीने का अंतिम सप्ताह है, इस फसल को तैयार होने में लगभग 180 दिन लगते है | इस फसल की लिए क्षारीय प्रविरती वाले दोमट मिट्टी जिसमे जैविक कार्बन, nitrogen एवं phosphorus कम होनी चाहिए एवं पोटेशियम की मात्रा सामान्य / मध्यम हो | ढैंचा की खेती निम्न प्रकार से करनी चाहिए |

  • फसल को लगाने से पहले खेत को हल या ट्रेक्टर के मदद से अच्छे से जोत कर इसके मिट्टी को नर्म बना ले |
  • फसल की बुआई करने से पहले जोती गई खेत में 25 kg nitrogen, 50 kg phosphorus एवं 30 kg potasium प्रति हेक्टेयर के दर से डाले |
  • बुआई से पहले स्वस्थ बीज को पानी में डाल कर 24 घंटे के लिए छोड़ दे |
  • अब फुलाई गई बीज को एक पंक्ति में 2-3 cm की गहराई में बोए |
  • फसल लगाने के 15 दिन बाद खेत में निकले अनावश्यक पौधो को निकाल दे |
  • पौधो के निकलने के बाद पौधो पर tobacco caterpillar का प्रभाव देखने को मिलता है | पौधे को इनसे बचने के लिए पौधो पर Chloropyriphos5 ml और Dichlorovos 1 ml प्रति लीटर के दर से पानी में मिलाकर पौधो पर छिडकाव करे |
  • जब पौधा तैयार हो जाए और पौधो में बीज व्यस्क हो जाए तो पौधे को जड़ के पास से काट कर सूखने के लिए रख दे और जब पौधा सुख जाए तो पौधे से बीज को अलग कर ले |

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