धनिया की वैज्ञानिक खेती कैसे करे – Coriander Farming

By | August 8, 2016

जानिए कैसे आप भी धनिया की खेती कर के अपने पैरो पर खड़े हो सकते हैं | जानिए Coriander Farming को वैज्ञानिक तरीके से कैसे इस business को बढ़ा पर profit कमाया जा सकता है | प्राचीन काल से भारत को ‘मसालो की भूमि’ कहा जाता है | भारत में कई प्रकार के मसाला पाए जाते है जो हमारे भोजन को स्वादिष्ट एवं सुगन्धित बनाता है | इन्ही मसालों में एक है जिसे धनिया कहा जाता है | धनिया के पत्ते और बीज दोनों को हम मसाला के रूप में इस्तेमाल करते है | पत्ते का इस्तेमाल ताजा मसाला के रूप में बल्कि बीज का इस्तेमाल सुखा मसाला के रूप में करते है |

Coriander Farming - Kaise Dhaniya ki kheti kare

धनिया का इस्तेमाल / Uses of Coriander

धनिया एक प्रकार का बहूपयोगी मसाला है, इसका इस्तेमाल सिर्फ मसाले के रूप में नहीं होता है | इसमे कई प्रकार के औषधीय गुण होने के कारण इसे दवा के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है | इसका इस्तेमाल सिर्फ मसाला के रूप में ना होकर कई लोग इसे अन्य सब्जियों के साथ मिलाकर सब्जी के रूप में भी इस्तेमाल करते है | बहुत से लोग इसका चटनी बनाकर अपने भोजन के साथ लेना ज्यादा पसंद करते है | बहुत से लोग इसके पत्ते का इस्तेमाल करते है, तो कई लोग इसके बीज का | और बहुत से जगहों पर तो इसके जड़ का भी इस्तेमाल मसाले के रूप में किया जाता है किया जाता है |

धनिया के फायदे

प्राचीन काल से भारत के हर एक रसोई में धनिये का इस्तेमाल चला आ रहा है | धनिया में मौजूद औषधिये गुण के कारण आज भी इसका इस्तेमाल जारी है और वर्षो इसका इस्तेमाल जारी रहेगा | तो आइये आज जानते है धनिया के औषधिये गुण |

  • धनिया, सौफ और मिश्री को बराबर मात्र में मिलाकर चूर्ण बना ले | अब इस चूर्ण को नियमित भोजन के उपरांत लेने से शरिर में होने वाले जलन से जल्द राहत मिलेगी |
  • अगर आपका पाचन क्रिया सही से काम नहीं कर रहा है, या आपके पेट में गैस है तो आप इन सब से छुटकारा पाने के लिए धनिया की चाय के सेवन से दूर किया जा सकता है |
  • 20 ग्राम धनिया के हरी पत्ती में चुटकी भर कपूर को मिलकर पिस ले और इसका रस के 2-2 बूंद दोनों नाक में डाले | और थोडा सा रस माथे पर लगा कर हल्का मालिश करे इससे नकसीर की बीमारी ठीक हो जाती है |
  • धनिया का नियमित इस्तेमाल त्वचा के लिए फायदेमंद माना गया है | इसके साथ ही धनिया खून में मौजूद इन्सुलिन की मात्रा को नियंत्रित कर हमे diabetes से दूर रखता है |
  • धनिया, जीरा और Sweet flag की बनी काढ़ा सर्दी और खांसी का रामबाण इलाज है |

अधिक जानकारी के लिए आप धनिया के औसधीय फायदे यहाँ पढ़े |

धनिया की खेती कैसे सुरुवात करे / How to start Coriander Farming

धनिया बहुगुणी होने के कारण इसकी खेती पुरे भारत वर्ष में बड़ी जोर सोर से की जाती है | आम तौर पर आपको घर घर पर धनिया की खेती देखने को मिलेगा चाहे वो इसे खुद का इस्तेमाल के लिए करे | अक्सर लोग इसका इस्तेमाल अपने भोजन में किया करते है | आज इसका बाजार मांग काफी बढ़ गयी है, धनिया की खेती के लिए आपको ज्यादा मेहनत करने की आवश्यकता नहीं है ये कम पूंजी पर और समय पर अच्छी उपज देने वाले फसलो में से एक है | तो आइये आज हम जानते है धनिया की खेती कैसे की जाती है |

जलवायु एवं भूमि

किसी भी फसल के लिए ये बेहत important है की जलवायु और भूमि फसल के अनुकुल हो | धनिया शीतोष्ण जलवायु का फसल है, इसके उत्तम production के लिए शुष्क और ठंडा मौसम सबसे उचित माना गया है | प्रारंभिक समय में बीजो के अंकुरण के लिए 25-26oC तापमान की आवश्यकता होती है | अगर आप धनिया के उच्च गुणवत्ता के लिये शुष्क और ठंडा मौसम, तेज धूप, समुद्रतल से अधिक ऊंचाई के साथ ऊंचहन भूमि की आवश्यकता होती है । धनिया की खेती आम तौर पर किसी भी मिट्टी में की जा सकती है, परन्तु धनिया की खेती के लिए उचित जल निकासी वाली रेतीली दोमट मिट्टी सर्वोत्तम माना गया है | साथ ही मिट्टी का Ph मान 6.5-7.5 होनी चाहिए |

भूमि की तैयारी

खेती करने के पूर्व हमे खेत को फसल के अनुरूप तैयार कर लेनी चाहिए | खेती से पहले खेतो में रसायनिक खाद के जगह जैविक खाद का इस्तेमाल करे तो ये फसल और खेत दोनों के लिए लाभकारी होता है | इसलिए खेतो में जैविक खाद (गोबर) का इस्तेमाल करना चाहिए | खेतो में फसल के पहले 4-5 जुटाई कर के मिट्टी को अच्छी से भुर-भुरी कर ले, अंतिम जुटाई से पहले खेतो में आवश्यकता नुसार गोबर या कम्पोस्ट खाद मिलकर एक और जुताई कर के पाटा चला लेना चाहिए |

इसे भी पढ़े कैसे करे कपास की खेती विस्तार में |

धनिया के प्रजाती

अन्य फसलो के मुताबिक धनिया के भी कई प्रजातीय पाई जाती है, सभी प्रजातियों का अपना उत्पादन क्षमता है | कृषक को खेती के लिए सही बीज का चुनाव करना आवश्यक है | तो आइये आज जानते है धनिया के प्रजातियों के बारे में

Type Duration (inDays) Production (in qq/ak.)
हिसार  सुगंध 120-125 7-8
आर सी आर41 130-140 3-4
कुंभराज 115-120 5-6
आरसीआर435 110-130 4.5-5.5
आरसीआर 436 90-100 4.5-5.5
आरसीआर446 110-130 5-5.5
जी सी 2(गुजरात धनिया 2) 110-115 6-6.5
आरसीआर684 110-120 5-5.5
पंत हरितमा 120-125 6-8
सिम्पो एस 33 140-150 7-8
जे डी-1 120-125 5-6
एसीआर1 110-115 4-5
सी एस 6 115-120 5-6
आर सी आर480 120-125 5-6
आर सी आर728 125-130 5.5-6

धनिया पत्ते के बिज के दाम / Price of  Coriander Seeds

अच्छी पैदावार के लिए आपको धनिया के अच्छे बिज लेने होंगे जो की लगभग Rs 80 से 100 per kg के बिच में मिल जायेंगे | ध्यान रहे की आप  Coriander के Seeds अच्छी ब्रांड के ले ताकि पैदावार अच्छी हो |

बीज की बुवाई का समय

धनिया रबी फसल होने के कारण इसकी बुवाई अक्टूबर और नवम्बर के मध्य करना सबसे अच्छा होता है | भारत के कई क्षेत्रो में इसकी बुवाई मई से अगस्त के मध्य भी करते है, परन्तु इसके बुवाई का उचित समय October से November के मध्य वाला समय उचित है |

बीज की बुवाई

बीज को बोने से पहले इसका उपचार करना बेहद अवश्यक है इसके उपचार से बिज में होने वाले बीमारी नहीं होगी और अंकुरण अच्छा होगा | साथ ही बीजोपचार फसल को कई रोगों और किट पतंगों से दूर रखता है | एक किलोग्राम बीज के उपचार के लिए कार्बेंन्डाजिम, थाइरम 2:1 की मात्र में 3 ग्रा. या कार्बोक्जिन और थाइरम 3 ग्रा. के साथ ट्राइकोडर्मा विरिडी 5 ग्रा. मिलाकर उपचार करे | बीज को जनित रोग से बचाने के लिए बीज को स्टे्रप्टोमाईसिन 500 पीपीएम से उपचारित करना फायदेमंद होता है | मुख्यतः धनिया की बुवाई दो प्रकार से होती है सिंचित और असिंचित |

सिंचित में हम बीज को एक पंक्ति में लगाते है जिसमे पंक्तियों को दुरी 20-30 cm और पौधो के आपस से दुरी 10-15 cm राखी जाती है | इस विधि में बीज की लागत 6-8 kg प्रति एक्कड़ होती है, जो असिंचित से कम है और साथ ही इसमे production भी ज्यादा होता है |

असिंचित खेती में बीज को किसी पंक्ति में नहीं लगाया जाता है, इसमे हम बीज को खेतो में छिडकाव करते है जिससे बीज सभी जगहों पर सामान्य अन्तराल पर न हो कर कही पर अधिक और कही कम होता है, जिसके कारण इस विधि में production अधिक नहीं होता है | इस विधि में बीज की खपत 10-12 kg प्रति एक्कड़ होता है |

खाद एवं रख-रखाव

जमीन में फसल के लिए पर्याप्त तत्व नहीं होने के कारण हम खेती से पहले खतो में अक्सर गोबर आदि का इस्तेमाल करते है | धनिया का फसल के 20 दिन के हो जाने के बाद हमे पौधो में जीवामर्त का छिडकाव करना चाहिए | साथ ही हमे समय समय पर दहनीय के पौधो के साथ निकलने वाले खरपतवार को निकाल कर हटा देना चाहिए | ये पौधे के विकास को रोकता है और साथ ही production को कम करता है |

किट नियंत्रण

अन्य फसलो के मुताबिक इस में भी किट का प्रकोप आप देख सकते है, परन्तु इस फसल में अन्य फसलो के मुताबिक किट कम पाए जाते है |

चैंपा – धनिया के खेती में आक्रमण करने वाला कीटो में से ये पहला किट है | मुख्यतः ये देखा गया है कीटो का आक्रमण पौधो पर पुष्प के आरम्भ होने पर होता है, परन्तु चैंपा धनिया के पौधे के आरंभ में आक्रमण करता है, और ये इसके कोमल अंगो से रस को चूसता है |

नियंत्रण – चैंपा को पौधो से दूर रखने के लिए नीम के तेल को गौ मूत्र में मिलाकर पौधो पर छिडकाव करना चाहिए |

रोग एवं रोकथाम / Common Diseases

फसल के उपज को प्रभावित करने वाले कारणों में से एक कारण पौधो में लगने वाले रोग भी है | रोग पौधो को नुकसान पंहुचाकर इसके विकास को प्रभावित करता है | आइये जानते है धनिया में पाए जाने वाला प्रमुख रोग एवं इनके रोकथाम |

  • उकठा – उकठा धनिया में पाए जाने वाले रोगों में से सबसे खतरनाक है, इसके कारण पौधे मुरझा जाते है और इनका विकास रुक जाता है | इस बीमारी से बचने के लिए खेती से पहले खेत की अच्छी से गहरी जुताई करनी चाहिए | साथ ही खेत में उचित फसल चक्र का इस्तेमाल करना चाहिए और बीज लगाने से पहले बीजोपचार करना कभी नहीं भूलना चाहिए |
  • तना व्रण – तना व्रण को स्टेम गांल के नाम से जाना जाता है | इस बीमारी में पौधे के उपरी भाग संक्रमण के कारण सुख जाते है | इससे बचने के लिए बीज को बोने से पहले नीम के तेल या गौ मूत्र से अवश्य उपचारित करे |
  • पाला – ठण्ड के दिनों में फसल में अक्सर पाले का शिकायत सुनाने को मिलता है | फसल में पाला पड़ने के कारण भरी नुकसान पहुचता है | इसके असर को कम करने का सबसे आसन तरीका है गोबर के उपलों की रख, जी हा इस राख का छिडकाव कर आप पौधो को पाला से बचा सकते है |

बाजार मुल्य / Market Rate

वैसे तो खुले market में धनिया पत्ते का दाम अमूमन Rs 80 से लेकर Rs 120 per kg तक रहती है, पर जब आप धनिया की खेती कर रहे होंगे तो आपको इसे सीधे मंडी में sell करना होगा जहाँ पर आपको Rs 30 से Rs 50 तक प्रति किलो मिल जायेगा |

Production

अगर सही तरीके से धनिया की उन्नत खेती की जाये तो आपको per acer से 400-600 Kg का production मिल सकता है | उस हिसाब से:

400 Kg * Rs 50 = Rs 20,000

आपको per acer आसानी से INR  20,000 की तो कमाई पक्की है और खर्चा केवल बिज, खाद और पाने पटाने में जो मोटर का खर्चा आएगा वो लगभग Rs 2,000 तक maximum expenses आएगा |

उस हिसाब से अगर आप 3 या 4 acer में Coriander ki farming करते है तो :

4 acer * Rs 20,000 = Rs 80,000

(minus) Rs 5,000

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Total Net Profit: Rs 75,000

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आपको 75,000 आसानी से 4 महीने में कम लेंगे | उस हिसाब से अगर साल में आप 3 बार भी धनिया पत्ते की खेती करते है तो Rs 2,00,000 तक तो कही नहीं जा रहा है | परन्तु ध्यान रहे की ऊपर दिया गया calculation इस हिसाब से जोड़ा गया है की अगर आप खुद से खेत में काम करते है और किसी labor को काम पर नहीं लगते है | और यह भी बतलाना जरुरी है की 1 acer में इसकी खेती करने से आपको उतना मुनाफा शायद नहीं मिल पाए, इसलिए पड़ी पैमाने पर ही इसके करने पर फायदा आपको मिलेगा |

जरुरत है तो केवल लगन से इसे सिखने की, थोड़ी मेहनत और scientific तरीके से इसे करने की |

4 thoughts on “धनिया की वैज्ञानिक खेती कैसे करे – Coriander Farming

  1. kamal Rana

    kiya dhaniye ka ek-ek beej lgana chahiye
    kiya dhayeiye ki kheti bed bna kr ya kiyariyan bna kr krni chahiye ?????

    Reply
  2. Dibyanshu katiyar

    mai ye kheti krna chahta hu mujhe eske bare me total jankari mile kyu ki mai abhi es kam me nya hu

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