Durgabai Deshmukh – Biography in Hindi – Indian Freedom Fighter

By | April 18, 2017

Durgabai Deshmukh was an Indian freedom fighter. Check her biography in Hindi, education, family, marriage – पढ़े अपनी भाषा हिंदी में और जाने उनकी जीवनी | असल में महान दुर्गाबाई देशमुख एक भारतीय निडर स्वतंत्रता सेनानी, वकील, सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतिज्ञ थी, उन्हें ‘Iron Lady’ के रूप से भी जाना जाता है | वह भारत के संविधान सभा और भारतीय योजना आयोग की सदस्य थी । महिलाओं की मुक्ति के लिए उन्होंने 1937 में आंध्र महिला सभा की स्थापना की थी, इसके साथ ही वह केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड के संस्थापक अध्यक्ष भी थी |

Durgabai Deshmukh Bio in Hindi

Biography :

Name: Durgabai Deshmukh

Known By : Lady Deshmukh, ‘Iron Lady’

Bate of Birth : 15 July 1909

Birthplace: Kakinada

Husband : C.D.Deshmukh

Passed away : 9th May, 1981

प्रारंभिक जीवन और कैरियर

स्वतंत्रता सेनानी Durgabai  का जन्म 15 July 1909 को Kakinada में हुआ था, वह एक सामान्य वर्ग के परिवार से थी | दुर्गाबाई के बाल्यकाल के दिनों में बालिकाओं को school नहीं भेजा जाता था, लेकिन फिर भी उनमे पढने की लगन थी, इसलिए उन्होंने अपने पड़ोस में ही एक अध्यापक के यहाँ हिंदी की पढाई शुरू कर दी थी | इन्होने हिंदी में बहुत ही जल्दी योग्यता अर्जित कर ली थी |

अपने प्रारंभिक दिनों से ही दुर्गाबाई भारतीय राजनीति से जुडी हुई थी, मात्र 12 साल की उम्र में, उसने अंग्रेजी भाषा शिक्षा लागू करने के विरोध में स्कूल छोड़ दिया, और उन्होंने लड़कियों के लिए हिंदी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए राजमुंड्री में बालिका हिन्दी पाठशाला की शुरुआत की |

1923 में Kakinada में Indian National Congress का आयोजन हुआ और उस सम्मेलन में वह स्वयंसेवक थी, उस सम्मेलन में उनका काम बिना ticket वाले visitors को सम्मेलन में प्रवेश करने से रोकना था | उन्होंने अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से पूरा किया और जवाहरलाल नेहरू को प्रवेश करने से रोक दिया, जब प्रदर्शनी के आयोजक ने यह देखा तो उनसे पूछा कि उसने क्या किया तो उसने जवाब दिया कि वह केवल निर्देशों का पालन कर रहे थी, आयोजकों द्वारा उनके लिए टिकट खरीदा जाने के बाद ही उन्होंने नेहरू को अंदर प्रवेश करने की अनुमति दी | नेहरू ने उनके इमानदारी और शाही के लिए उनकी प्रशंसा की |

इनके जैसी हमारे भारत देश में और कई स्वतंत्र सेनानी हुए जैसे Ahilyabai Holkar and Tilak Manjhi.


दुर्गाबाई ब्रिटिश राज से स्वतंत्रता के लिए भारत के संघर्ष में महात्मा गांधी का अनुयायी थी, वह एक प्रमुख सामाजिक सुधारक थी जिन्होंने सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान गांधी जी के द्वारा नेतृत्व किये जा रहे नमक सत्याग्रह की गतिविधियों में भाग लिया था | उस आंदोलन में महिला सत्याग्रहियों के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी जिसके लिए ब्रिटिश राज के अधिकारियों इन्हें 1930 से लेकर के 1933 में तीन साल के लिए जेल भिज दिया |

जेल से रिहा होने के बाद इन्होने अपनी पढ़ाई जारी रखी और 1930 में उन्होंने political science  में Andhra University  से B.A और M.A की degree प्राप्त की, और इसके बाद उन्होंने 1942, Madras University से Law की degree प्राप्त कर मद्रास उच्च न्यायालय में एक वकील के रूप में काम करना शुरू कर दिया |

व्यावाहिक जीवन:

दुर्गाबाई ने वकालत की degree को हासिल करने के बाद C.D.Deshmukh से विवाह किया, जो की वित्त मंत्री और भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर थे | उन दोनों इन्होने एक बहुत ही सुखी विवाहित जीवन का नेतृत्व किया।

योगदान

दुर्गाबाई को Blind Relief Association का अध्यक्ष बनाया गया, उन्होंने इस संस्था के लिए स्कूल-छात्रावास और एक हल्की इंजीनियरिंग कार्यशाला की स्थापना की | Durgabai ने भारत के संविधान सभा के सदस्य के रूप में भी कार्य किया, उस समय संविधान सभा में एकमात्र महिला अध्यक्ष दुर्गाबाई थी, उन्होंने कई सामाजिक कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई | 1952 में इन्होने संसद का पहला चुनाव लड़ी लेकिन संसद के लिए चुने जाने में वह नाकामयाब रही और बाद में उन्हें योजना आयोग के सदस्य बनने के लिए नामित किया गया, इस post में रह कर उन्होंने सामाजिक कल्याण पर राष्ट्रीय नीति के लिए समर्थन प्राप्त किया | उन्होंने अपने कार्यक्रमों को पूरा करने के लिए बड़ी संख्या में स्वैच्छिक संगठनों को संगठित किया, जिसका उद्देश्य गरीब महिलाओं, बच्चों और विकलांगों की शिक्षा, प्रशिक्षण, और पुनर्वास प्रदान करना था |

मृत्यु :

9 मई, 1981 को दुर्गाबाई देशमुख का निधन हो गया, उनकी मृत्यु से देश के एक प्रगतिशील महिला को खो दिया |

Interesting facts

  • महज 12 साल की उम्र में, उन्होंने अंग्रेजी भाषा शिक्षा लागू करने के विरोध में स्कूल छोड़ दिया |
  • वह महिला शिक्षा राष्ट्रीय परिषद की पहले अध्यक्ष थी |
  • दुर्गाबाई का विवाह 8 साल की उम्र में उनके चचेरे भाई सुब्बा राव के साथ की गई थी, लेकिन उन्होंने उसके साथ रहना माना कर दिया था जिसमे उनके भाई ने और उनके पिता ने उनका साथ दिया |
  • 1971 में भारत में साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए उन्हें उत्कृष्ट योगदान के लिए दुर्गाबाई को चौथे नेहरू साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया था ।
  • 1975 में उन्हें ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया गया ।
  • उन्हें Nehru Literacy Award, Paul G Hoffman Award, UNESCO Award जैसे पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था |

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