परोपकार पर निबंध – Essay on Charity in Hindi

By | December 27, 2016

आज हम पढेंगे Eassy on Paropkar जिसे English में Charity कहा जाता है | जानिए इसका Hindi meaning with example और slogan और famous दोहे के साथ |  “परोपकार” ये word ‘पर+उपकार’ इन दो words को जोड़ कर बना है। जिसका meaning है बिना किसी selfishness के दूसरों की help करना। अपनी शरण में आए हुए किसी भी प्राणी या जीव जंतु की निस्वार्थ भाव से सेवा और मदद करना ही परोपकार कहलाता है। परोपकार एक ऐसा गुण है जो किसी भी इंसान को जानवर से अलग देवता के समान बना देता है ।

Paropkar (Charity) Essay

एक मनुष्य का सबसे अच्छा कर्म व धर्म “परोपकार” ही होता है । जो लोग अपने हित और अपने स्वार्थ के बारे में ना सोचकर दुसरे की भलाई और हित के बारे में सोचता है वही मनुष्य परोपकारी कहलाता है। इंसान अपने nature से हीं परोपकारी होता है ।

परन्तु मनुष्य का स्वार्थ और संकीर्ण सोच ने आज पुरे मानव समुदाय को अपने में ही केन्द्रित कर दिया है। मनुष्य अपने और अपनों के चक्कर में उलझ कर स्वार्थी हो गया है और दुसरो की हित और भलाई करना भूल गया है।

कैसे करे परोपकार / How to do Charity

परोपकार अनेक प्रकार के होते है जिससे इंसान दूसरों की help कर के आत्मिकशांति प्राप्त कर सकता है जैसे की – प्यासे को पानी पिलाना, बीमार या किसी  घायल मनुष्य  को अस्पताल ले जाना,  अन्धों को रोड पार करवाना , भूखे को भोजन करना , गरीबो को वस्त्र देना, गोशाला (Cow shed) बनवाना, प्याऊ बनवाना , छायादार पेड़  लगाना , school बनवाना आदि ।

जो मनुष्य अपने  मन, वचन और कर्म से जरुरत मंदों की help करता है वो मनुष्य संत की श्रेणी में आते है। ऐसे सत्पुरुष जो बिना किसी स्वार्थ के दूसरों पर उपकार करते है वे देवता के समतुल्य माने जाते है । परोपकार मनुष्य का एक ऐसा गुण होता है जिससे वो अपने शत्रु को भी अपना दोस्त बना सकता है। यदि अपने शत्रु पर भी मुसीबत के समय  उपकार किया जाए तो वह भी सब कुछ भूलकर  सच्चा मित्र बन जाता है।

सूर्य, चंद्र, नक्षत्र, आकाश, वायु, अग्नि, जल,  फल, फूल, वृक्ष आदि ये सभी निस्वार्थ भाव से मानव जाति के  कल्याण में लगे रहते है। इन सब से ना सिर्फ एक इंसान दुसरे इंसान की help कर सकता है बल्कि इससे सभी जीव जन्तुओं पर भी उपकार किया जा सकता है । यूँ तो परोपकार बहुत तरह से किया जा सकता है लेकिन असहाय की help करना, विकलांगों की सेवा करना ये सब परोपकार के मुख्य कार्य कहलाते है ।

सच्चा परोपकारी वही व्यक्ति है जो बिना किसी फल की उम्मीद किये दुसरे की भलाई के बारे में सोचता है और दुसरे के हित के लिए हमेशा तैयार रहता है। “गीता” मे भगवान् श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा है की जो मनुष्य हमेशा सत्य की मार्ग पर चलता है और बिना किसी स्वार्थ के लोगो की भलाई करता है उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति होती है ।

चाणक्य ने भी कहा है की जिन सज्जनों के हृदय में परोपकार की भावना जागृत रहती है, उनके सारे कष्ट दूर हो जाते है और ऐसे मनुष्यों को धन संपदा तथा यश की प्राप्ति होती है।

श्री तुलसीदास के परोपकार पर दोहे 

तुलसीदास जी ने भी “परोपकार” के बारे में कुछ शब्द कहे है :-

“परहित सरिस धरम नहिं भाई।

परपीड़ा सम नहिं अधमाई”॥

अर्थ / Meaning – तुलसीदास दास के इन पंक्तियों का आशय है की परोपकार एक ऐसा धर्म है जिसके सामान दूसरा कोई धर्म नही है और दुसरे को कष्ट और पीड़ा देना महापाप है इसके जैसा दुनिया में कोई पाप नही है। इसलिए मनुष्यों को हमेशा दूसरो का हित  करते रहना चाहिए और कभी किसी का  दिल नहीं दुखाना चाहिए ।

Example

किसी दोहे में कहा गया की ,वृक्ष अपना फल स्वयं कभी नहीं खाते है , नदियां अपना जल स्वयं कभी नहीं पीती है , इसी प्रकार सज्जन मनुष्य दुसरे की भलाई यानि परोपकार के लिए ही जन्म लेते हैं। हम सब को भी nature से सिख लेकर हमेशा कोई ना कोई ऐसा कार्य करते रहना चाहिए जिनसे किसी और का भला हो सके । अपने लिए तो सभी जीते हैं, किन्तु जो जीवन दुसरे की भलाई और हित करने में बीते सही मायने में वही जीवन सार्थक जीवन कहलाता है।

किसानो का हम सब के लिए अन्न उपजाना , सैनिको द्वारा अपने प्राणों की चिंता किये बिना देश की रक्षा करना ये सब परोपकार के बहुत बड़े बड़े examples में से एक है। आज की दुनिया में परोपकार शब्द का नमो निशान मिट गया है ,बस लोगो में लालच, इर्ष्या, स्वार्थ और वैर की भावना बढती ही जा रही है। अगर आज के मनुष्य परोपकार जैसे गुणों को अपना ले और अपने साथ- साथ दुसरो की भलाई और हित के बारे में भी सोचना शुरू कर दे तो दुनिया की सभी बुराइयाँ, लालच, ईर्ष्या, स्वार्थ और वैर लुप्त हो जाएँगी ।

संत कबीरदास ने अपने दोहे में परोपकार के लिए कहा है –

“धन रहै न जोबन रहे, रहै न गांव न ठांव ।

कबीर जग में जस रहे, करीदे किसी का काम”। 

अर्थ / Meaning  संत कबीर दास जी कहते है की एक दिन ऐसा आयेगा जिस दिन ना हमारे पास न धन होगा ना ये यौवन साथ होगा, गांव और घर भी छूट जायेगा। साथ हमेशा रहेगा तो अपना यश, और ये  तभी संभव है जब हमने किसी का काम किया हो , किसी की भलाई और दुसरे का हित किया हो ।

 

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