जयशंकर प्रसाद जी की जीवनी – Jaishankar Prasad Biography

By | January 15, 2017

जानिए  Jaishankar Prasad जी के जीवनी के बारे में पूरी Hindi भाषा में | इनकी biography, family, education, योगदान, poems, story, उपन्यास और death के बारे में | “जयशंकर प्रसाद” का birth 30 January 1889  में वाराणसी (U.P) के एक सभ्य सुंधनी साहू नाम के famous वैश्य family में हुआ था । ये एक बहुत हीं famous हिन्दी  कवि, नाटक लिखनेवाले , कहानीकार, उपन्यासकार और निबन्धकार थे। इन्हें Hindi के छायावादी काल के 4 popular स्तंभों में से एक कहा जाता हैं। नाटक लिखनेवाले  “भारतेंदु” के बाद जयशंकर प्रसाद एक अलग धारा बहाने वाले युगप्रवर्तक नाटककार रहे जिनके नाटक को आज भी बड़े चाव से पढ़ा जाता हैं।

Jaishankar Prasad biography in Hindi

जयशंकर प्रसाद को बाग-बगीचे व् खाना बनाने का बहुत शौक था । ये शतरंज के भी बहुत अच्छे खिलाड़ी कहलाते थे। ये regular व्यायाम करने वाले , time पर खाना खाने वाले और बहुत हीं  serious nature के इंसान थे। घर के माहौल की वजह से जयशंकर प्रसाद को बचपन से हीं साहित्य व् कला में रुचि थी । कहते है की जब जयशंकर प्रसाद केवल 9 years के थे तब हीं इन्होने “कलाधर” नामक व्रजभाषा में एक कविता लिखकर ‘रसमय सिद्ध’ का प्रदर्शन किया था । जयशंकर प्रसाद साहित्यिक प्रवृत्ति तथा  शिव भक्त थे साथ हीं ये मांस मदिरा से बहुत दूर रहा करते थे । 

जयशंकर प्रसाद जी का परिवार / Family of Jaishankar Prasad

जयशंकर प्रसाद के पिता का नाम “श्री देवी प्रसाद साहू” था । इनके पिता एक बहुत हीं धनि  businessman थे। जयशंकर प्रसाद के पितामह यानि की Grandfather “शिवरतन साहू” भी भेंट देने में हमेशा आगे रहते थे । पिता “देवी प्रसाद साहू” कलाकारों का आदर करने के लिए मशहूर थे । इनके पिता का काशी में बड़ा respect किया जाता था, कहा जाता है की काशी के लोग काशीनरेश के अलावा “हर हर महादेव” से “देवीप्रसाद साहू” का ही स्वागत किया करते थे ।

जयशंकर प्रसाद जब बहुत छोटे थे तभी इनके पिता की मृत्यु को गई थी ।  किशोरावस्था से पहले हीं इनकी माँ और बड़े भाई भी चल बसे । पिता, माँ और भाई की मौत के बाद जयशंकर प्रसाद के घर में केवल उनकी विधवा भाभी हीं उनका सहारा थी । 17 years के age में हीं जयशंकर के ऊपर कई सारी जिम्मेदारियां आ गयी थी ।

शिक्षा / Education

जयशंकर प्रसाद के family के कुछ लोग इनका पूरा संपत्ति हड़पने का सोच रहे थे लेकिन सभी का सामना जयशंकर ने बड़े हीं धर्य और गंभीरता के साथ किया। पहले तो जयशंकर प्रसाद जी अपनी प्रारंभिक शिक्षा (Primary education) काशी के “ क्वींस कालेज” से प्राप्त कर रहे थे, लेकिन परिवार वालो की संपत्ति हड़पने की चाल की वजह से उन्होंने घर से हीं शिक्षा प्राप्त करने की सोच ली । उसके बाद इन्होने घर से हीं  संस्कृत, हिंदी, उर्दू, और फारसी  का अध्ययन किया।  “दीनबंधु ब्रह्मचारी” जो की खुद एक बहुत बड़े विद्वान्‌ थे वे जयशंकर प्रसाद के संस्कृत के अध्यापक थे।  इन्होंने वेद, इतिहास, पुराण व साहित्य का गहरा अध्ययन किया था ।

योगदान / Contribution 

जयशंकर प्रसाद अधिक ज्ञान हीं इनकी self-education की प्रवृति थी और अपने दृढ़ गुणों के वजह से हीं ये छायावाद के main स्तंभों में से एक बने । इन्होने “Hindi literature” को अपनी रचनाओं के रूप में कई अनमोल रत्न प्रदान किए। अपने साहित्य अभ्यास से जयशंकर प्रसाद ने हिन्दी को कई सरे महान ग्रन्थ-रत्न प्रदान किए ।  जयशंकर प्रसाद नागरीप्रचारिणी सभा  के Vice President भी बने ।

अपने 48 years के छोटे से जीवन में इन्होने कई सरे कविताएँ , कहानीयां, नाटक, उपन्यास तथा निबंध की रचनाएं की जिसे लोग आज भी देखना, सुनना और पढ़ना पसंद करते है। आइये जानते है इनके प्रसिद्ध रचनाएँ कौन कौन सी है –

जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित कविताएँ  जयशंकर प्रसद ने अपनी कविताओं की

चनाएँ को दो वर्गो में divide किया है : “काव्यपथ अनुसंधान रचनाएँ” और “रससिद्ध रचनाएँ” । 1909 ने उनकी सबसे पहली कविता “प्रेम पथिक” “इंदु” में प्रकाशित हुई थी जो की ब्रज भाषा में थी ।

काव्यपथ अनुसंधान की रचनाएँ प्रसिद्ध रचनाएँ
कानन कुसुम आंसू
महाराणा का महत्त्व, झरना लहर
प्रेम पथिक कामायनी
स्कन्दगुप्त
ध्रुवस्वामिनी
जन्मेजय का यज्ञ
राजश्री

 जयशंकर प्रसाद का कहानीयां / Story Written by Jaishankar Prasad

जयशंकर प्रसाद ने total 72 कहानियाँ लिखी हैं, सन्‌ 1912 ई. में इनकी first कहानी जिसका नाम ‘ग्राम’ था वो Published हुई थी । इनकी कुछ famous कहानियां इस प्रकार से है :-

  • छाया
  • गुंडा, ममता
  • पुरस्कार,
  • सालवती,
  • छोटा जादूगर, मधुआ, विरामचिह्न,
  • आकाशदीप
  • आंधी
  • इंद्रजाल
  • गुलाम 

जयशंकर प्रसाद की उपन्यास

जयशंकर प्रसाद ने अपने जीवन में कुल 3 उपन्यास लिखे हैं:
कंकाल – इसमें नागरिक सभ्यता का अंतर सच विवरण किया गया है,
तितली – इसमें ग्रामीण जीवन के सुधार के बारे में बताया गया हैं,
इंद्रावती – ये इनका historical background पर लिखा गया एक अधूरा उपन्यास है।

जयशंकर प्रसाद की नाटक
इन्होने total 13 नाटकों की सर्जना की है जिसमे से 8 ऐतिहासिक, 3 पौराणिक और 2 भावात्मक है ।

इन्होने सज्जन, कल्याणी परिणय, प्रायश्चित, राज्यश्री, विशाख, कामना, एक घूंट, आदि कई सरे नाटक लिखे है जिनमे से ‘कामना’ और ‘एक घूँट’ को छोड़कर सभी नाटक मूलत: इतिहास पर based हैं।

मृत्यु / Death

जयशंकर प्रसाद को क्षय रोग हो जाने के कारण 48 years में हीं Monday, १५ नवम्बर, सन १९३७ को काशी में उनका देहांत हो गया ।

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