Kanaiyalal Maneklal Munshi – Bio, Family, Death

By | April 26, 2017

Great freedom fighter Kanaiyalal Maneklal Munshi updated biography is now in Hindi. Find his birth, wife, family and contribution in India freedom. K.M Munshi गुजरात राज्य के एक भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन कार्यकर्ता, राजनीतिज्ञ, लेखक और educationist थे | गुजराती साहित्य में उनका नाम बहुत ही प्रसिद्ध है | उन्होंने ही 1938 में भारतीय विद्या भवन नामक एक educational trust की स्थापना की थी |

Kanaiyalal Maneklal Munshi

Biography :

  • Name: Kanaiyalal Maneklal Munshi
  • Known by: K. M. Munshi
  • Date of birth : 30 December 1887
  • Birth place: Bharuch, Gujarat
  • Wife: Atilakshmi Pathak, Leelavati Sheth
  • Children: Jagadish Munshi, Sarla Sheth, Usha Raghupathi, Lata Munshi, Girish Munshi
  • Passed away : 8 February 1971

Birth and Family

K.M Munshi का जन्म गुजरात के भरूच शहर में 30 दिसंबर 1887 को हुआ था | उनकी स्कूल की शिक्षा भरूच के R.S Dalal High School से हुई थी, आगे की पढाई उन्होंने वडोदरा में की जहा उन्होंने शिक्षावेदों में उत्कृष्टता प्राप्त की | वडोदरा कॉलेज में उनके एक शिक्षक श्री अरबिंदो घोष थे, जिन्हें वे बहुत अधिक पसंद करते थे | मुंशी Bhulabhai Desai, Maharaja Sayajirao, Mahatma Gandhi,  Gaekwad III of Baroda और Sardar Patel से काफी प्रभावित हुए थे | वे गुजराती और अंग्रेजी के एक विपुल लेखक थे इसके साथ ही वे एक बैरिस्टर और एक प्रतिष्ठित न्यायविद थे।

महात्मा गांधी के आगमन के बाद से मुंशी ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी सक्रियता दिखाई | वे स्वराज पार्टी में शामिल हुए, लेकिन 1930 में नमक सत्याग्रह की शुरुआत के समय में गांधी जी के कहने पर उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को join किया । 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया था | सरदार वल्लभभाई पटेल के एक महान प्रशंसक, मुन्शी ने 1930 के दशक में केन्द्रीय विधान सभा में कार्य किया। उन दिनों पाकिस्तान की मांग बढ़ती जा रही थी और इसलिए उन्होंने अहिंसा छोड़ एक नागरिक युद्ध के विचार को समर्थन देने के लिए मुसलमानों को अपनी मांग को छोड़ने के लिए मजबूर किया | उनका मानना ​​था कि हिंदुओं और मुसलमानों का भविष्य एक अखण्ड हिंदुस्तान में एकता में ही है |

जाने और अन्य स्वतंत्रा सेनानी के बारे में जैसे Tilak Manjhi और Alluri Sitarama Raju जिन्होंने अपना सब कुछ देश के खातिर त्याग दिया था |

Work 

भारत की स्वतंत्रता के बाद, मुंशी को हैदराबाद के रियासत राज्य में diplomatic messenger और business agent के रूप में नियुक्त किया गया । मुंशी ad hoc Flag Committee पर थे जिसने अगस्त 1947 में भारत का ध्वज चुना और समिति ने B. R. Ambedkar की अध्यक्षता में भारतीय संविधान को तैयार किया | आजादी के बाद भारत सरकार द्वारा ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के पीछे इनका बहुत बड़ा योगदान रहा है | इन्होने ने 1952 से 1957 तक उत्तर प्रदेश के राज्यपाल के रूप में सेवा की। 1959 में मुंशी नेहरू-वर्चस्व वाले कांग्रेस पार्टी से अलग होकर अखण्ड हिंदुस्तान आंदोलन को शुरू किया | वे एक मजबूत विरोध में विश्वास करते थे, इसलिए Chakravarti Rajagopalachar के साथ उन्होंने स्वतंत्र पार्टी की स्थापना की, पार्टी ने सीमित सफलता का आनंद लिया लेकिन कुछ दिनों के बाद इस पार्टी को बंद कर दिया गया । बाद में, ये जनसंघ में शामिल हो गए | वे युवा भारत के संयुक्त संपादक थे और 1954 में, भवानी जर्नल की शुरुआत की गई थी जिसे आज तक भारतीय विद्या भवन द्वारा प्रकाशित किया जाता है । Munshi संस्कृत विश्व परिषद, गुजराती साहित्य परिषद और हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष भी थे।

एक राजनीतिज्ञ और शिक्षक होने के अलावा, मुंशी एक पर्यावरणविद् थे, 1950 में जब वे वन और कृषि मंत्री थे उन्होंने वनमहोत्सव की शुरुआत की, ताकि वन क्षेत्र के अंतर्गत क्षेत्र में वृद्धि हो सके, और तभी से वन महोत्सव पेड़ वृक्षारोपण एक हफ्ते भर का त्योहार हर साल पूरे देश में जुलाई के महीने में आयोजित किया जाता है और लाखों पेड़ों को लगाया जाता है ।

Death

Kanaiyalal Maneklal Munshi की मृत्यु 8 February 1971 में हुई, और जब उनकी मृत्यु हुई तब वे 83 वर्ष के थे
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