Kharbuja (Muskmelon) ki Kheti Vaigyanik Tarike Se

By | July 11, 2016

तो क्या आप खरबूजा की वैज्ञानिक खेती करने की सोच रहे हैं ? आइये जानते है इससे जुडी जानकारी, Muskmelon ki farming कैसे करे, profitable है या नहीं, रोग व कीट नियंत्रण कैसे करे | खरबूजा की खेती करने से farmers को बहुत हीं अच्छा profit हो सकता है बरसते की वो इसे Muskmelon ki farming वैज्ञानिक तरीके से करे । यदि इसकी खेती कृषि वैज्ञानिको द्वारा बताए गए तरीको से की जाये तो किसानो को per hectare 125-150 क्विंटल तक की उपज मिल सकती है। इसका मतलब के आप आसानी से 1 acer में 5000 से 6000 kg के खरबूजे की पैदावार कर सकते हैं |  निचे हम आपको “खरबूज की खेती” कैसे की जाती है इसकी पूरी जानकारी देने जा रहे है ।

Muskmelon or Kharbuja farming

Kharbuja Meaning in English = Muskmelon

अगर आपके पास 3 से 4 acer की जमीन है तो सही तरीके से खरबूजे की खेती कर के आप लाखों में कम सकते हैं | जरुरत है केवल सही जानकारी और मेहनत की |

Kharbuja ki kheti ki Jankari

भूमि का चयन व तैयारी / Selection of Land

खरबूजे की खेती के लिए कछारी भूमि यानि की जलोढ़ भूमि(Alluvial soil) जो की नदी के किनारे होती है उसे सबसे सर्वोत्तम माना गया है । Plain areas में इसकी खेती के लिए रेतीली दोमट भूमि जहाँ जल निकासी का प्रबंध अच्छा हो उसे हीं सबसे अच्छा माना जाता है । भूमि को तैयारी करने के लिए पहले भूमि की जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से कर दें ,उसके बाद उस पर 3 से 4 times Cultivator चला दें ।

जलवायु 

खरबूजे की खेती के लिए high temperatures और dry climate की आवश्यकता होती है। खरबूजे की खेती में अच्छे फसल की पैदावार के लिए 44.32 degree C. तक का temperature को सबसे अच्छा माना जाता है। अधिक ठंड में खरबूजे के फसल को पाले से काफी नुकसान पहुँचता है ।

खरबूजे की किस्मे / Types of Muskmelon

Aaj pure India mein lagbhag 10 tarah ke Kharbuje ke breeds paye jate hai. Ise bada karne mein 4 se 5 month ka samay lagta hai.Kharbuja

पूसा शरबती – इस फल की लता थोड़ी सी फैली हुई रहती है, पत्तियां हरी, फल गोल, गुद्दे मोटे और बीज छोटी होती है । इस किस्म के खरबूजे का फल 80 से 85 दिनों में पक जाता है और ये प्रति hectare 125-150 Quintal तक का उपज हो जाता है ।

पूसा मधु रस – इसकी लताएँ बहुत strong व फैली हुई होती है। पत्तियां हरी होती है व फल गोल होते है । इस किस्म के छिलके चिकने व पीले रंग के होते है और उस पर हरी धारियां होती है ।  इसका गुदा हल्का orange रंग का और रसदार होता है । इसके फल का वजन लगभग 1 किलो  होता है । इस फल को तैयार होने में लगभग 90 से 95 days लगता है ।

हरा मधु – इस फल के गुद्दे light green color के होते है, और इसका पहला फल आठवीं गांठ पर लगता है । 

पंजाब सुनहरी – इस किस्मे को बोने के बाद तैयार होने में लगभग 75 days लग जाते है। इसके फल का weight लगभग 800 gram होता है । इसके फल हल्के brown color के होते है।

दुर्गापुर मधु – इसके फल गोल व छिलके green color के होते है । इसके फल का गुदा हल्का हरा रंग का होता है और ये खाने में बहुत हीं मीठा लगता है ।

अर्का राजहंस – ये फल medium से बड़े size तक का होता है। इसके फल का weight 1.25 से 2 kg तक का होता है। इसका shape गोल या फिर अंडाकार होता है।

ऊपर दिए गए किस्मो के अलावा खरबूजे की कुछ नवीनतम किस्मे इस प्रकार से होते है :-एम.एच. डब्ल्यू ६, नरेंद्र खरबूजा १, हिसार मधुर आदि ।

इसके अलावे आप सोयाबीन की अच्छी खेती की जानकारी यहाँ पर प्राप्त कर सकते हैं |

बीज बुवाई की समय व विधि  

खरबूजे की बीज की बुआई November month से ले कर march तक की जा सकती है । जिस जगह पर अधिक पाला पड़ने का डर ना हो वहां इसकी बुवाई November से लेकर december तक कर दी जाती है । किसी भी पहाड़ी क्षेत्र  में खरबूजे की बीज की बुवाई mid of april में की जाती है।

नदी के किनारे के कछारी मिट्टी (Alluvial soil) में खरबूजे की बीज को बोने के लिए december के time में 1 m गहरी और 60 cm चौड़ी नालियां  बना दी जाती है। नालियों की खुदाई के वक़्त आधी बालू को खोदकर  उसमे नालियों को लगभग 30 cm तक भर दी जाती है । उसके बाद नालियों में 1.5m के distance पर छोटे-छोटे गड्ढे बनकर उनमे बीज को बो दिया जाता है । नाली बनाते वक्त हमे ये ध्यान रखना चाहिए की 2 नालियों के बीच का distance लगभग 3 m होनी चाहिए ।

खाद प्रबंधन  

खरबूजे की खेती में अच्छे फसल के उत्पादन हेतु उसमे पर्याप्त मात्रा में Organic manure (खाद), का होना जरुरी होता है । इसके लिए एक hectare ज़मीन में लगभग 50 क्विंटल ड़ी हुई गोबर की खाद और organic खाद की जरुरत होती है । फसल जब लगभग 25 दिन के हो जाते है तब उसमे 10g फोल्विक acid, 10g amino acid और 15g Potassium Humonat को लगभग 500 liter पानी में घोल कर इस घोल का पम्प द्वारा फसल पर छिड़काव करना चाहिए । इस मिश्रण का छिड़काव हर 15 से 20 days के interval पर करते रहना चाहिए ।

सिंचाई प्रबंधन / Irrigation Management

खरबूजे की खेती अगर plain area में की जा रही है तो बढ़ते फसल की हर सप्ताह हल्की सिचाई करते रहना पड़ता है। फल निर्माण के बाद सिचाई  की duration बढ़ा दिया जाता है वरना फलों का मिठास फीका हो जाता है । यदि इसकी खेती नदियों के किनारे की जा रही है तो उगती फसल के starting में 2 से 3 बार सिचाईं की आवश्यकता पड़ती है ।

रोग व कीट नियंत्रण  / Common Disease and Pest Control

Kharbuja ki kheti karne ke samay aapko niche batlaye gaye kido se bachav ka upay karna hoga taki acchai kamai ki jaa sake aur phalo ko kisi tarah ka nuksaan na ho. To chaliye jante hai wo kaun kaun se common pest hai jo Muskmelon farming karte samay paya jaa sakta hai:

लालड़ी कीट – यह कीट plants के सभी leaves और flowers को खा जाते है । लालड़ी कीट की सुंडी ज़मीन के भीतर plants की जड़ों(roots) को काट देती है । इस कीट से बचने के लिए नीम के काढ़े को माइक्रो झाइम में mix कर के उसका 250 ml मिश्रण का छिड़काव फसल पर पम्प से कर देना चाहिए ।

फल की मक्खी – ये मक्खी फलो में घूस कर उसी में अंडे दे देती है । धीरे धीरे उस अंडे से सुंडी निकलती है जो की फलो को बरबाद कर देती है । इस मक्खी के प्रकोप से बचने के लिए नीम के काढ़े को माइक्रो झाइम में मिला कर के उसका 250ml मिश्रण का छिड़काव फसल पर pump से कर देना चाहिए ।

सफ़ेद ग्रब :- ये कीट ज़मीन के अन्दर रह कर पौधों के जड़ को खा जाता है, जिससे पौधा धीरे धीरे सूखने लगता है । इससे बचने हेतु खेत में बीज बोने से पहले हीं नीम के खाद का use किया जाना चाहिए ।

चूर्णी फफूंदी रोग – इस रोग की वजह से पौधे की पत्तियां और तने दोनों पर सफ़ेद रंग का दरदरा व गोल जाल दिखने लगता है । इसके प्रकोप से धीरे धीरे पत्तो का रंग brown होने लगता है और फिर पूरा पत्ता पीला हो कर सुख जाता है । इससे बचने के लिए रोगों से प्रभावित पौधों को उखाड़ कर जला देना चाहिए तथा नीम के काढ़े को माइक्रो झाइम में mix कर के उसका 250 ml मिश्रण का छिड़काव फसल पर पम्प से कर देना चाहिए ।

मोजैक रोग – इस रोग के लगने से पौधों के पत्तियों का विकास रूक जाता है साथ हीं फलो का उपज कम हो जाता है । इससे बचने के लिए रोगी पौधों को कबाड़ कर जला देना चाहिए साथ हीं बुवाई के लिए रोग रहित बीजो का इस्तेमाल करना चाहिए ।

ऊपर दिए गए रोगों के अलावा ऐसे और भी कई सारे रोग है जो की खरबूजे के फसल में लग कर उसे बरबाद कर देते है जैसे की मृदुरोमिल फफूंदी रोग, एन्थ्रेक्नोज रोग आदि ।

फसल की तुड़ाई 

खरबूजे की खेती में इसके फसल की तुड़ाई इसके किस्म, temperature, बीज बोने का time, मंडी की दुरी, आदि पर depend करता है । बीज बुवाई के लगभग 100 दिन के बाद इसके फल अच्छे से पक जाते है तब जा कर इसकी तुड़ाई की जाती है ।

Income

Garmiyon (Summer) ke mausam mein 1 kg ka Kharbuja market mein Rs 15 se le kar 25 Rs tak aasani se bik jata hai. Agar aap Kharbuja ke kheti karte hai to aapko mandi mein iske har ek phal ke 8-10 Rs aasani se mil jayenge.  Paratnu agar aap khud se ya sell karte hai to aapko aasani se 15 se 20 Rs par piece mil jayega. Is hisab se Kharbuja ek profitable kheti aur business ho skata hai.

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