खीरा की उन्नत खेती कैसे करे (Cucumber Farming)

By | September 29, 2016

अगर आप खीरा की उन्नत खेती करना चाहते है तो आपको वैज्ञानिक तरीके से इसकी farming करनी होगी | जानिए Cucumber cultivation की जानकारी, रोग नियंत्रण , और प्रजातियाँ के बारे में | खीरा एक मौसमी फसल है, जो की गर्मी के मौसम में ज्यदातर किया जाता है | खीरे की खेती पुरे भारत में की जाती है यह एक Short term फसल है जो की अपना Life Cycle को 60 से 80 दिनों में पूरा करता है | खीरा हमारे शरीर में पाचन शक्ति को बढ़ाने में मदद करता है, खीरे में Protein, vitamin C, Iron, Carbohydrate जैसे तत्व पाए जाते है  | वैसे तो खीरा गर्मी के मौसम में होता है पर वर्षा ऋतू में खीरे की फसल अधिक होती है |

 Cucumber or Kheera Farming in India

खीरे की खेती कैसे की जाये

Aaj kal green house ke dwara Cucumber ki farming ki jaa rahi hai. Iske alawa polyhouse ke dwara bhi kheera ki unnat kheti ki jaa rahi hai. Ise kam place (jamin) par accha khasa paidawar kiya jaa sakta hai aur ise 2 se 4 dino tak store kar ke bhi rakha jaa sakta hai. Aaj kal to scientific tarike se cucumber farming ki jaa rahi hai aur yah Punjab, Jharkhand, UP, Maharashtra mein iski kafi acchi demand bhi hai. To chaliye jante hai aap bhi Kheere ki kheti ko kaise start kar sakte hain:

जलवायु :

खीरे की खेती शीतोषण और समशीतोषण दोनों तरहा के climate में किया जा सकता है | खीरे के फूलो को खिलने के लिए इन्हें 13 से 18 degree तक के temperature के ज़रूरत होती है , और पौधों को बड़ा होने के लिए 18 se 24 degree तापमान की ज़रूरत होती है |

भूमि / Land

खेरी की खेती सभी तरह के मिट्टी में की जा सकती है, लेकिन Loam (दोमट) और Sandy loam (बलुई दोमट) भूमि में खेरी की खेती ज्यादा अच्छी होती है | नदियों के Foothill में भी खेरी की खेती अच्छे से होती है | खेरी के   खेत में पानी निकलने का रास्ता होना चाहिए खेत में पानी जमा नहीं होना चाहिए |

खीरा की प्रजातियाँ / Varities of Cucumber 

खेरी की प्रजातियाँ कई प्रकार की होती है उनमे से कुच्छ इस प्रकार से है |

  • जापानी लौंग ग्रीन
  • स्ट्रेट एट
  • हिमांगी
  • पोइनसट
  • जोवईंट सेट

खेतों की तैयारी / Prepration of Land

Growing Cucumber tips

खेरी की खेती करने के लिए खेतों की तैयारी अच्छे करे, इसके लिए सबसे पहले भूमि जुताई करते वक्त मिटटी को पलटने वाले हल से अच्छे से जुताई कर ले | 2 से 3 बार समान्य हल या cultivator जुताई कर ले और आखरी जुताई करने के बाद खेत में 200 se 300 quintal जैविक खाद यानि के सड़े हुए गोबर को डाल कर खेतो में नालियाँ बनाये |

बीज बुवाई तथा तरीके :

खेती करने की लिए हमे यह जानना बहुत ही ज़रूरी होता है की हम अपने खेतो में कितने quantity में बीजो को  लाए तथा किस वक्त लगाये ता की हम अच्छे फसल की production कर सके |

Type Timing
गर्मी फसल January से March
बरसाती फसल June से July
  • बीज दर : एक hacter भूमि में कम से कम 2 se 3 kg बीजो की ज़रूरत होती है |
  • पौध की दुरी: खीरे की पौधे फैलने वाले होते है, इसलिए अच्छी फसल के लिए बोते वक्त इनके बीजो की आपसी दुरी कम से कम 50 se 100cm होनी चाहिए |
  • पंक्ति की दुरी : खीरे की खेती करते वक्त खेतो में पंक्ति बनाने वक्त एक से दुसरे पंक्ति की दुरी कम से कम 150cm होनी चाहिए |
  • बीज की गहराई ; बिज लगाते वक्त यह जानना बहुत ही ज़रूरी होता है की हम बीजो को भूमि में कितनी गहराई में बुवाई करे , खीरे के बीजो को बोते वक्त उन्हें 1cm की गहराई में बोना चाहिए |

खाद /  Fertilizer

खीरे की खेती में यदि आप Organic manure का इस्तेमाल करते है तो आप खीरे की अच्छी production की उमीद कर सकते है | इसकेलिए खेत की आखरी जुताई में 200 se 300 quintal सड़े हुए गोबर को अच्छे से मिलाये साथ ही 40 से 50 kg Nitrogen (नत्रजन), 70 kg Potash(पोटाश), 60 kg Phosphorus (फास्फोरस) जैसे Elements को खेत तैयार करते वक्त डाले |
फसल होने के ठीक 20 – 25 दिन बाद Micro Jaim(माइक्रो झाइम) 5 00 m . Liter और 2 kg super gold Magnesium 400 से 500 litere पानी में मिला कर क्यारियों में छिडकाव कर 20 se 25 दिन के बाद पुनः इस प्रक्रिया को अपनाये |

सिंचाई

खरीफ के फसलो को सिंचाई की ज़रूरत नहीं होती है यदि बारिश नहीं हो रही हो तो आवश्यकता अनुसार फसलो की सिंचाई करे | गर्मियों के मौसम में होने वाले फसलो को 2 से 3 दिनों के अंतराल में सिंचाई करना चाहिए |

खरपतवार

बिज के बुवाई के ठीक 20 से 25 दिन के बाद जब पौधे बढ़ने लगते है तब निराई-गुडाई करने से पौधों की अच्छी growth होती है और साथ ही फल भी अच्छे और अधिक होते है | खेतो में extra पौधे जो खीरे के पौधों को बढ़ने में रुकावट डालते है उन्हें हमे खेतो से उखाड़ फेकना चाहिए |

रोग नियंत्रण  /  Common Diseases

खीरे की खेती में होने वाले कुच्छ रोग इस प्रकार से है |

  • विषाणु रोग: खीरे में विषाणु रोग एक आम रोग होता है, यह रोग पौधों के पत्तियों से शुरू होती है और इसका प्रभाव फलो पर पड़ता है | इस रोग में पत्तियों पर पीले धब्बो का निशान पड़ जाता है और धीरे धीरे पत्तियां सिकुड़ने लगती है | इस बीमारी का असर फलो पर भी पड़ता है फले छोटी और टेडी मेडी हो जाती है |
    इस रोग को नीम का काढ़ा या गौमूत्र में माइक्रो झाइम को मिला कर इसे 250 ml प्रति pump फसलो पर छिडकाव करने से दूर किया जा सकता है |
  • एन्थ्रेक्नोज (Anthreknoj): यह रोग Mold के कारण फैलता है यह रोग मौसम के changes होने के कारण होता है इस रोग में फलो तथा पत्तियों पर धब्बे हो जाते है |
    इस रोग को नीम का काढ़ा या गौमूत्र में माइक्रो झाइम को मिला कर इसे 250 ml प्रति pump फसलो पर छिडकाव करने से दूर किया जा सकता है |
  • चूर्णिल असिता : यह रोग ऐरीसाइफी सिकोरेसिएरम नाम के एक फफूंदी के कारण होता है | यह रोग मुख्यता पत्तियों पर होती है और यह धीरे धीरे तना फुल और फलो को effect करती है | इस बीमारी में पत्तियों के निचे सफेद धब्बे उभर जाते है और धीरे धीरे ये धब्बे बड़ने लगते है और ये तने फुल और फलो पर हमाल करने लगती है |
    नीम का काढ़ा या गौमूत्र में माइक्रो झाइम को मिला कर इसे 250 ml प्रति pump फसलो पर छिडकाव कर के इस रोग को दूर किया जा सकता है |

कीट नियंत्रण

  • एफिड (Aphids) : ये बहुत ही छोटे size के कीट होते है | ये किट पौधे के छोटे हिस्सों पर हमला करते है तथा उनसे रस चूसते है | इन कीटो की संख्या बहुत तेजी से बडती है और ये Virus फ़ैलाने का काम करती है, इन कीटो की वजहा से पत्तियाँ पिली पड़ने लगती है |
    इस किट से बचने के लिए नीम का काढ़ा या गौमूत्र में माइक्रो झाइम को मिला कर इसे 250 ml प्रति pump फसलो पर छिडकाव करें |
  • रेड पम्पकिन बीटिल (Red Pumpkin Beetle): ये लाला रंग तथा 5-8 cm लबे आकार के किट होते है ये किट पत्तियों के बिच वाली भाग को खा जाती है जिसके कारण पौधों का अच्छे से विकास नहीं होता है |
    इस किट से बचने के लिए नीम का काढ़ा या गौमूत्र में माइक्रो झाइम को मिला कर इसे 250 ml प्रति pump फसलो पर छिडकाव करें|
  • एपिलैकना बीटिल (Epilachna Beetle) : ये किट सभी Vine plants पर हमला करते है | ये किट पौधों के पत्तियों पर आक्रमण करती है ये beetle पत्तियों खा कर उन्हें नष्ट कर देती है |
    इन bettle से अपने पौधे को बचाने के लिए नीम का काढ़ा या गौमूत्र में माइक्रो झाइम को मिला कर इसे 250 ml प्रति pump फसलो पर छिडकाव करें|

तुड़ाई 

बीज बुवाई के ठिक 2 महीने बाद फसल तैयार हो जाता है, और फसल के तैयर हो जाने पर 2 महिने तक हर 3 से 4 दिन के अन्तराल में फलो की तुड़ाई करे |

उपज

एक hacter में खीरे की खेती से कुल 100 से 120 quintel तक फसल की उमीद की जा सकती है |

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