Kuber Puja Vidhi Kaise Kare – Puja Samagri, Mantra in Hindi

By | August 23, 2016

Kya aap is bar Kuber Puja ki saral aur aasan vidhi khoj rahe hain? जानिए कैसे दिवाली और धन तेरस के दौरान कुबेर भगवन की पूजा, लगने वाली samagri और mantra की जानकारी  | हिन्दू पौराणिक कथाओ के अनुसार हिन्दू धर्म में कई भगवान है जिनमे से एक कुबेर भी है | भगवान कुबेर को धन के स्वामी माना जाता है | साथ ही कुबेर को यक्षो का राजा भी कहा जाता है | श्रीकुबेर दक्षिण दिशा में लोगो की रक्षा और देखभाल करते है | कुबेर रावन का भाई थे, इनके पिता ऋषि विश्वश्रवा की दो पत्नी थी | पहली पत्नी के पुत्र कुबेर थे एवं दुसरे पत्नी से अन्य रावन, कुंभकर्ण आदि थे |

God Kubera with his wife

कुबेर को देवताओ का कोषाध्यक्ष माना जाता है अतः इन्हें प्रसन्न करने से मनुष्य के जीवन में धन दौलत की कमी नहीं होती है | भगवान कुबेर की पूजा देवी लक्ष्मी के साथ होती है | एवं इनके पूजा का सबसे उचित समय धनतेरस का दिन है |

कुबेर पूजा सामाग्री

Agar aap ghar mein hi Shre Kuber Bhagwan ki puja karne ki soch rahe hai to niche batalye gaye puja samagri ki jarurat hogi jo ki aapko najdiki puja dukan se mil jayegi. To chaliye jante hai ki Kuber puja ki samagri suchi wistar mein:

  • कुबेर यन्त्र
  • कुबेर तस्वीर या मूर्ति
  • हल्दी पाउडर
  • Kumkum
  • चन्दन
  • अगरबत्ती
  • कपूर
  • फुल
  • फल प्रसाद के लिए
  • पान पत्ता
  • सुपाड़ी
  • नारियल
  • चावल
  • कलश
  • कलश वस्त्र
  • मिठाई प्रसाद के लिए

कुबेर पूजा विधि / How to Perform Shri Kuber Puja Vidhi

तो अगर आप इस पावन अवसर पर श्री कुबेर भगवन जी की पूजा करना चाहते है तो निचे बतलाइए गए पूजा विधि से आप इसे घर पर ही कर सकते हैं | तो चलिए जानते है इससे जुडी जानकारी |

अगर आप श्री कुबेर जी की पूजा करना चाहते है तो सुबह अपने सारे कार्य को संपन्न करने के उपरांत स्नान कर पूजा की जाने वाले स्थान को साफ़ कर गोबर से लिप ले | अब इस स्थान पर भगवन कुबेर की प्रतिमा को स्थापित करे, प्रतिमा ना होने पर आप अपने घर की तिजोरी को श्री कुबेर के रूप में माने और प्रतिमा के स्थान पर स्थापित कर सकते है |

पूजा के लिए अगर आप ने पहले से श्री कुबेर जी की प्रतिमा स्थापित किया हुआ हो, तो प्रतिमा के सामने रोड़ी या सिंदूर से स्वस्तिक का निशान बनाए | और प्रतिमा न रहने पर तिजोरी पर सिंदूर से स्वस्तिक का चिन्ह बना कर इसपर मौली धागा बांधे |

अब श्री कुबेर की स्थापना के बाद हाथ में फुल और अक्षत (चावल) ले कर, निचे इए गए mantra का उच्चारण करे :

मनुज ब्राह्म विमान स्थितम, गरुड़ रत्न निभं निधि नायकम |

शिव सखं मुकुटादि विभूषितम वर गदे दधतं भजे तुन्दिलम ||

मंत्र का जाप करते हुए कुबेर का ध्यान करे |

श्री कुबेर के ध्यान के बाद कुबेर के प्रतिमा के समुख आवाहन की मुद्रा दिखाकर

आवाहयामि देव! त्वामिहायाही कृपा कुरु |

कोशं वर्द्धय नित्यं, त्वं परि-रक्ष सुरेश्र्वर ||

श्रीकुबेर-देवं आवाहयामि ||

मंत्र उच्चारण कर कुबेर का आवाहन करे |

आवाहन के पश्चात् हाथ में फूल ले और

नाना रत्न समायुक्तं कार्त्त स्वर विभूषितम |

आसनं देव देवेश! प्रीत्यर्थ प्रति गृह्यताम ||

श्रीकुबेर देवाय आसनार्थे पञ्च पुष्पाणि समर्पयामि ||

मन्त्र का उच्चारण करे हुए भगवन को आसन दे |

आसन के उपरांत भगवन को अन्य सामग्री चन्दन, अक्षत (चावल), फुल, धुप, दीप, प्रसाद, पान पत्ता, सुपाड़ी आदि निम्न मंत्रो का उच्चारण के साथ समर्पित करे |
श्रीकुबेराय नमः पादयोः पद्ध्म समर्पयामि |
श्रीकुबेराय नमः शिरसि अर्घ्यं समर्पयामि |
श्रीकुबेराय नमः गंधाक्षतं समर्पयामि |
श्रीकुबेराय नमः पुष्पं समर्पयामि |
श्रीकुबेराय नमः धूपं समर्पयामि |
श्रीकुबेराय नमः दीपं समर्पयामि |
श्रीकुबेराय नमः नेवेध्य्म समर्पयामि |
श्रीकुबेराय नमः आचमनीयं समर्पयामि |
श्रीकुबेराय नमः ताम्बूलं समर्पयामि |

अब अपने बाए हाँथ में गंध, अक्षत और पुष्प को ले और अपने दाहिने हाँथ से निम्न मंत्रौचार के साथ तिजोरी या प्रतिमा पर छोड़े |

ॐ श्रीकुबेराय नमः |

अनेन पूजनेन श्रीध्नाध्यक्ष श्रीकुबेर प्रीयताम |

नमो नमः |

तत्पश्चात भगवन  कुबेर की आरती कर लोगो में प्रसाद वितरण करे और मन ही मन श्री कुबेर जी से किसी भी तरह की भूल चुक या गलती के लिए माफ़ी मांग ले |

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