List of 108 Upanishads in Hindi

By | October 3, 2017

Kya aap jante haiUpanishads mein total kitne list hote hain? हमारे धर्मग्रन्थ में सब मिलकर 108 उपनिषद् है, आइये जानते है उनसे जुडी जानकारी और meaning पुरे detail में | यह उपनिषद असल में हिन्दू धर्म के दार्शनिक अवधारणा एवं विचारो का संग्रह है जो काफी पुरानी एवं महत्त्वपूर्ण श्रुति धर्मग्रन्थ है | इस ग्रन्थ में बौद्ध धर्म, जैन धर्म एवं सिख धर्म के बारे में भी व्याख्यान किया गया है | इस ग्रन्थ में आप परमेश्वर, परमात्मा-ब्रह्म एवं आत्मा के स्वभाव और सम्बन्ध का वर्णन किया गया है | इसे वेदांत के नाम से भी जाना जाता है | इस धर्मग्रन्थ में कुल 108 उपनिषद है जिसे समस्त भारतीय दर्शन का मुल श्रोत के रूप में जाना जाता है |

List of Upanishads in Hindi

Types

सभी उपनिषद निम्न वेदों में बाटे गए है :-


  • ऋग्वेद में कुल 10 उपनिषद
  • शुक्लपक्ष यजुर्वेद में कुल 19 हैं
  • कृष्णपक्ष यजुर्वेद में कुल 32 उपनिषद
  • सामवेद में कुल 16 हैं
  • अथर्ववेद में कुल 31 उपनिषद बटे हुए है |
Sr. No. Upanishads Name
1 Aitareya Upanishad
2 Aksha-Malika Upanishad
3 Atma-Bodha Upanishad
4 Bahvricha Upanishad
5 Kaushitaki-Brahmana Upanishad
6 Mudgala Upanishad
7 Nada-Bindu Upanishad
8 Nirvana Upanishad
9 Saubhagya-Lakshmi Upanishad
10 Tripura Upanishad
11 Adhyatma Upanishad
12 Advaya-Taraka Upanishad
13 Bhikshuka Upanishad
14 Brihadaranyaka Upanishad
15 Hamsa Upanishad
16 Isavasya Upanishad
17 Jabala Upanishad
18 Mandala-Brahmana Upanishad
19 Mantrika Upanishad
20 Muktika Upanishad
21 Niralamba Upanishad
22 Paingala Upanishad
23 Paramahamsa Upanishad
24 Satyayaniya Upanishad
25 Subala Upanishad
26 Tara-Sara Upanishad
27 Trisikhi-Brahmana Upanishad
28 Turiyatita-Avadhuta Upanishad
29 Yajnavalkya Upanishad
30 Akshi Upanishad
31 Amritabindhu Upanishad
32 Amritanada Upanishad
33 Avadhuta Upanishad
34 Brahma-Vidya Upanishad
35 Brahma Upanishad
36 Dakshinamurti Upanishad
37 Dhyana-Bindu Upanishad
38 Ekakshara Upanishad
39 Garbha Upanishad
40 Kaivalya Upanishad
41 Kalagni-Rudra Upanishad
42 Kali-Santarana Upanishad
43 Katha Upanishad
44 Katharudra Upanishad
45 Kshurika Upanishad
46 Maha-Narayana (or) Yajniki Upanishad
47 Pancha-Brahma Upanishad
48 Pranagnihotra Upanishad
49 Rudra-Hridaya Upanishad
50 Sarasvati-Rahasya Upanishad
51 Sariraka Upanishad
52 Sarva-Sara Upanishad
53 Skanda Upanishad
54 Suka-Rahasya Upanishad
55 Svetasvatara Upanishad
56 Taittiriya Upanishad
57 Tejabindu Upanishad
58 Varaha Upanishad
59 Yoga-Kundalini Upanishad
60 Yoga-Sikha Upanishad
61 Yoga-Tattva Upanishad
62 Aruni (Aruneyi) Upanishad
63 Avyakta Upanishad
64 Chandogya Upanishad
65 Darsana Upanishad
66 Jabali Upanishad
67 Kena Upanishad
68 Kundika Upanishad
69 Maha Upanishad
70 Maitrayani Upanishad
71 Maitreya Upanishad
72 Rudraksha-Jabala Upanishad
73 Sannyasa Upanishad
74 Savitri Upanishad
75 Vajrasuchika Upanishad
76 Vasudeva Upanishad
77 Yoga-Chudamani Upanishad
78 Annapurna Upanishad
79 Atharvasikha Upanishad
80 Atharvasiras Upanishad
81 Atma Upanishad
82 Bhasma-Jabala Upanishad
83 Bhavana Upanishad
84 Brihad-Jabala Upanishad
85 Dattatreya Upanishad
86 Devi Upanishad
87 Ganapati Upanishad
88 Garuda Upanishad
89 Gopala-Tapaniya Upanishad
90 Hayagriva Upanishad
91 Krishna Upanishad
92 Maha-Vakya Upanishad
93 Mandukya Upanishad
94 Mundaka Upanishad
95 Narada-Parivrajaka Upanishad
96 Nrisimha-Tapaniya Upanishad
97 Para-Brahma Upanishad
98 Paramahamsa-Parivrajaka Upanishad
99 Pasupata Brahmana Upanishad
100 Prasna Upanishad
101 Rama Rahasya Upanishad
102 Rama-Tapaniya Upanishad
103 Sandilya Upanishad
104 Sarabha Upanishad
105 Sita Upanishad
106 Surya Upanishad
107 Tripadvibhuti-Mahanarayana Upanishad
108 Tripura-Tapini Upanishad

 

उपनिषद मुल रूप से संस्कृत का शब्द है जिसका हिंदी अर्थ समीप उपवेशन या समीप बैठना होता है, Monier-Williams के संस्कृत शब्दकोश में इसका अर्थ सर्वोच्च आत्मा के ज्ञान का खुलासा करके अज्ञान को दूर करने की स्थापना है | इस ग्रन्थ में ऋषि और शिष्य के कई सुन्दर संवाद है जो इसके पाठक को वेद के अर्थ को समझाता है | इसे भारतीय आध्यात्मिक चिंतन का मूलाधार एवं भारतीय आध्यात्मिक दर्शन का श्रोत कहा गया है |

उपनिषदकाल के पूर्व वैदिक युग का काल था जिसे संसारिक आनंद एवं उपभोग का युग कहा जाता था | उस समय लोगो पर किसी प्रकार के कार्य या किसी अन्य बातो का दबाव नहीं रहता था लोगो का मन पवित्र एवं लोग भावुक थे एवं ये काफी भोले थे | इस काल में जीवन को संपूर्ण अल्हड़पन में जिया करते थे | समय के साथ लोग जागरूक होने लगे एवं उनका मस्तिष्क कई प्रकार की जिज्ञासा एवं प्रश्न उठने लगे और लोग जागरूक होने लगे और इस प्रकार वैदिक काल का अंत हुआ |

वैदिक काल के अंत में उपनिषद्काल का उदय हुआ, इस काल में लोग चिंतन करना आरम्भ किए एवं इनके बीच यह बात फ़ैल गई की जीवन को सुखी, संपन्न, सफल एवं विजयी रहने के लिए देवताओ को प्रसन्न कारण अति आवश्यक है एवं इन्हें प्रशन करने के लिए यज्ञ करना आवश्यक है | इस प्रकार लोगो में और भी कई प्रकार के बातो पर विचार विमर्श हुआ और इनके द्वारा कई प्रकार के धर्मग्रन्थ का भी निर्माण किया गया |

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