लीची की वैज्ञानिक खेती कैसे करे

By | July 29, 2016

आज हम जानेंगे की कैसे लीची की खेती कर के आप इससे लाखों में कम सकते हैं और इससे जुडी जानकारी के बारे में | यह एक profitable business साबित हो सकता है अगर इसे वैज्ञानिक तरीके से करे | “लीची” देर से तैयार होने वाले फलो में से एक है। लीची का पौधा बहुत ही आहिस्ता आहिस्ता बढ़ता है इसलिए इसकी खेती करने में किसान भाइयों को थोड़ा सा समय लग जाता है । आज हम आपको “litchi ki kheti” कैसे करने से हमे अच्छे फलो की प्राप्ति हो सकती है इसकी पूरी जानकारी देने जा रहे है। तो चलिए जानते है “litchi ki kheti” के लिए कैसी मिट्टी और जलवायु की अव्यश्कता पड़ती है, इसके खाद व इसके रोपण की विधि क्या है आदि ।

Lychee Farming details in Hindi - Kaise kare Litchi ki kheti

लीची की उचित खेती की जानकारी / How to do Lychee Farming

Agar aapke pass 1 se 2 acer tak ki khali jamin hai aur aap 8 se 10 years tak ka wait kar sakte hai to Lichi ki kheti aapko lakhpati bana sakti hai. Kai baar log janana chahate hai ki Litchi ke ped mein phal aane mein kitne saal lagate hai – to answer hai ki 8 se 10 saal lag sakte hai. Yah sahi baat hai ki suruwat mein aapko income generate karne mein time lag sakta hai par ek baar Lychee ka ped lag gaya to aapko 10 se 15 saal tak aasani se acchi matra mein phal deta rahega aur aapki ek regular income ho jayegi.  To chaliye jante hai kaise Litchi ki karming hamare Indian me ki jaa sakti hai aur ek accha profitable business tayyar kiya jaa sakta hai:

मिट्टी का चयन / Selection of Land

“litchi ki kheti” हेतु गहरी दोमट मिट्टी को सबसे उत्तम कहा गया है। “litchi ki kheti” करने के लिए खेत में जल-प्रणाली का management अच्छी होनी चाहिए। ध्यान रहे की खेती के समय ज़मीन कठिन परत (Hard layer) वाली या फिर चट्टान (rock) वाली ना हो साथ हीं मिट्टी में चूने की कमी भी ना हो ।

जलवायु / Climate

“litchi ki kheti” के लिए may और june का time सही माना जाता है। लीची की सफल खेती के लिए december और january का minimum temperature लगभग 7°C और गर्मी में maximum temperature लगभग 36°C ज्यादा नहीं होना चाहिए। अधिक पाला (ठंढ) पड़ने से लीची के छोटे पौधे को नुकसान पहुँच सकता है इसलिए इसकी देखभाल ज्यादा करने की अव्यश्कता पड़ती है ।

लीची की किस्में / Varities of Lychee 

all over India में litchi की करीब 50 तरह की किस्में उगाई जाति है जिसे हर जगह अलग अलग नामों से जाना जाता है ।

Bihar में होने वाली लीची की किस्में कुछ इस प्रकार से होते है :-

  • पुरवी लीची
  • शाही लीची,
  • अरली बेदाना लीची ,
  • कसबा लीची
  • चाइना लीची,
  • लाल मुम्बई आदि।

U.P और bengal में ज्यादातर बेदाना किस्म की लीची उगाई जाती है । बेदाना किस्म की लीची का बीज बहुत हीं छोटा होता है साथ हीं इसके गुद्दे बहुत हीं ज्यादा होते है । अन्य सभी किस्मो के litchi में चीनी की मात्रा 10-11 % होती है वहीँ बेदाना किस्म की litchi में चीनी की मात्रा 14% होती है ।

इसके अलावे आप अनार की भी खेती कर के अच्छा खासा कम सकते है |

पौधे का रोपण / Plantation of Litchi

Litchi के पौधों का रोपण July से October month तक के बीच में कर देना चाहिए। litchi के पौधे का रोपण के लिए गड्ढो की खोदाई का काम और फिर उसकी भराई का काम आम के पौधों के रोपण जैसा हीं होता है। गड्ढे को भरते समय उसकी सबसे ऊपरी भाग में मिट्टी के साथ लगभग 25 kg गोबर की सड़ी हुए खाद, 2 kg हड्डी का चूरा और  300 kg म्यूरेट आफ पौटाश को अच्छे से mix कर के डालना चाहिए। लीची के पौधे को रोपते समय पौधों की दूरी 10 m तक होनी चाहिए ।


खाद प्रबंधन

कृषि वैज्ञानिको के मुताबिक कहा गया है की लगभग 450 kg लीची के ताजे फलो के विकास हेतु 1.36 kg potash, 455 g phosphorus, 455 g nitrogen, 342g चूना(Lime) और 228 g magnesium का use खाद के रूप में किया जाना चाहिए ।

सिंचाई 

ग्रीष्म ऋतु में litchi के छोटे पौधों की सिंचाई week में एक बार जरूर से करना चाहिए। जब फल में वृद्धि होने लगे तो हर 10 से 15 दिनों के interval में regular सिंचाई करते रहना चाहिए ।

खरपतवार 

litchi की खेती में खरपतवार को साफ़ करने के लिए खेतो की गहरी जुताई ना करे क्योंकि लीची के पेड़ की जड़े भूमि तल से सटा हुआ हीं रहता है इसलिए ज्यादा गहरी जुताई से लीची के जड़ो को नुकसान पहुँच सकता है ।

रोग व कीट प्रबंधन / Prevention of Disease and Pest

आमतौर पर लीची में बहुत हीं कम रोग व कीट का प्रकोप दिखता है। कुछ हीं कीट ऐसे है जो की लीची के पौधों को प्रभावित करते है जैसे की :-

लीची माइट : लीची माइट एक प्रकार का कीट होता है जो की पत्तो के निचे के part पर देखने को मिलता है। यह कीट पत्तो में से उसका रस चूस लेता है जिसके कारण पत्ते brown color के दिखने लगते है और फिर धीरे धीरे मुड़ जाते है। इस कीट का प्रकोप जब बढ़ जाता है तो लीची के पत्ते पूरी तरह से मुड़ कर गोल होने लगते है और फिर सूख कर ज़मीन पर गीर जाते है । यह कीट ज्यादातर march से july तक देखने को मिलता है ।

बचाव :- इस कीट से बचने के लिए कीट से प्रभावित पत्तो को पौधों से तोड़ कर और जो पत्ते ज़मीन पर गीरे हुए है उसे भी एकत्रित कर के एक साथ जला देना चाहिए। इसके अलावा लीची के पौधों पर 0.05% पैराथियान का छिड़काव करते रहना चाहिए ।
मीलीबग कीट :  जिस खेत में लीची व आम के पेड़ एक साथ होते है उस जगह पर इस कीट का प्रकोप ज्यादा होता है। यह किट फूलों में से और नई कोपलों में से भी रस चूस लेते है ।

बचाव :- इस कीट से बचने हेतु 0.05% पैराथियान का छिड़काव पौधों पर किया जाना चाहिए साथ हीं किसी भी पक्षी या फिर चमगादड़ को पौधों के पास आने से रोकने का अच्छा बंदोबस्त करना  चाहिए । 

फलों की कटाई व भंडारण / Harvesting for Litchi Fruit and Storage

जब लीची के फल पक कर ready हो जाये तो उसे तोड़ते time उसके गुच्छे सहित टहनी वाला भाग से हीं काट लिया जाता है ताकि अगले साल फिर से शाखाओं के बढ़ने के साथ उस पर फल लग सके।

फलों को तोड़ लेने के बाद उसे किसी ठंडे व हवादार स्थान पर रख कर उसका packing करना चाहिए।  packing के लिए लीची को किसी बांस की बनी टोकरी या फिर लकड़ी के box में pack किया जाना चाहिए और लीची को box या टोकरी में रखते समय उसके चारों side और ऊपर से  लीची की हरी पत्तियों को रखना चाहिए ।

Market Price

Waise to alag alag state mein litchi ka alag alag rate hai. Jaise Bihar aur UP mein litchi ka rate thoda sasta hota hai. Agar aap retail mein litchi fruit ko sell karte hai to aapko Rs 40 se 50 kg tak mil jata hai, wahi dusre state mein jaise Jharkhand, Delhi, West Bengal, Mumbai mein 1 kg Litchi ka rate Rs 60 se 110 tak ka hota hai. Halaki kisan bhaiyon ke liye retail main sell karna thoda muskil ho sakta hai. Agar aap sidhe mandi mein bhi sell karte hai to aapko Rs 25 se Rs 30 per kg tak mil jayegi.

Ek acche litchi ke ped se aasani se 80 se 100 kg tak ka utpadan ho sakta hai.

Us hisab se agar aapke pass 1 acer mein 150 Litchi ke tree lage ho to – ek calculation ke hisab se aap itna lump-sum  sell kar sakte hai:

  • 1 Litchi Tree = 80 to 100 Kg Litchi Fruit
  • 150 Litchi Tree = 12,000 to 15,000 Kg
  • Expected Amount (@ Rs 25 per kg) =  Rs 3 Lakh to Rs 3.75 Lakh

Agar aapke pass aur koi Litchi ke kheti se judi jankari ho to yahan jarur share kare.

7 thoughts on “लीची की वैज्ञानिक खेती कैसे करे

  1. Mohd Rashid

    सर मे लीची कि खेती करना चाहता हुं मुझे उस की जान कारी चाहिऐ

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  2. amit maurya

    Hi me amit mera bi ak litchi ka ped hai our vo aacha bi huaa hai usme litchi lekin mera gher city ke pas hai isliye sbi berd usko bhut teji se kha rhi thi kaccha hi to mene use kuch kaccha hi tod liya hai ab aap btaye ki us kacche litchi ko kese pkau

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  3. Magical Singh

    Sir,
    Hammer 1 sept.2017 to me lichi ,Amrood,kathal aur neemboo ka Bagh nurssory wale se lagvaya jai aur usne jo poudhe Lafayette unko purali aur polythene sahit lava diya . Hamare mana Karen per game kah diya ki 30 Dino tak agar ped sookhta hai to ped dobara doonga aur usne 54 ped lichi 28 kathal v 4 Amrood k ped diye Lemon ped ab bhi sookh the hain lekin ab poudhe dene se mana kar raha hai. Kya karan hai ki poudhe sookh rahe hain? In poudhon ko kase bachaya jaay. Thanks
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    1. Bhagat Post author

      Bina polythene hataye paudhe ka jad kaise pani aur nutrients absorb kar sakega?
      Polythene ko hata kar paudhe ko lagana chahiye tha.
      Mujhe lagta nahi hai ki ab nursery wala appko new paudha dega, isliye yah jaruri hai ki jo bhi kaam suru kare, uske bare mein basic jankari jarur rakhe.
      Naya paudha lijiye aur kisi acche nursery se lijiye aur jab bhi paudha buy kare, usse bill jaur le taki agar paudha kharab nikalta hai to aap use replace karwa sakte hain

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