Madan Lal Dhingra जी की Biography

By | September 19, 2017

महान क्रन्तिकारी Madan Lal Dhingra का जन्म 1883 में हुआ था | जानिए उनकी biography, जन्म , family, quotes और उनका योगदान भारत को आजादी दिलाने में | हर साल 15 अगस्त एवं 26 जनवरी को पूरे देश में तिरंगे को फहराया जाता है एवं भारतीय वीर जवानों को याद किया जाता है | इन अवसरों पर मुख्य रूप से उन वीरो को याद किया जाता है जिन्होंने सम्पूर्ण स्वतंत्रता आन्दोलन में हिस्सा लिया एवं देश की आजादी के लिए अपने प्राण तक न्योछावर कर दिया | परन्तु इनके अलावा और भी कई वीर ऐसे थे जिनका नाम बहुत से लोग नहीं जानते है | क्या आपको पता है की इस सूचि में मदन लाल ढींगरा का नाम भी सम्मिलित है ? आइए आज जानते है मदन लाल ढींगरा से सम्बंधित जानकारी |

Indian freedom fighter Madan Lal Dhingra

Biography :

  • Name: Madan Lal Dhingra
  • Known by: Dhingra
  • Date of birth: 18 September 1883
  • Birth place: Amritsar, Punjab
  • Parents: Dr. Gitta Mall
  • Sibling: Biharilal Dhingra, Kundanlal Dhingra, Mohanlal Dhingra, Chamanlal Dhingra, Chunilal Dhingra and Bhajanlal Dhingra
  • Passed away: 17 August 1909

मदन लाल ढींगरा को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रान्तिकारी के रूप में जाना जाता है । स्वतंत्र भारत निर्माण के लिए भारत के कई वीर-शूरवीरों ने ख़ुशी ख़ुशी अपने प्राण को न्योछावर कर दिया, ऐसे महान शूरवीरों में ‘अमर शहीद मदन लाल ढींगरा’ का नाम स्वर्णाक्षरों में लिखा जाना चाहिए । शहीद ढींगरा देश के महान देशभक्त एवं धर्मनिष्ठ क्रांतिकारी थे जिन्होंने देश की आजादी के लिए कई प्रकार के कष्टो एवं यातनाओ का सहन किया परन्तु इतने कष्ट एवं यातना मिलने के उपरांत भी ये अपने मार्ग से विचलित नहीं हुए एवं देश की आजादी के लिए फाँसी पर भी लटक गये |

जन्म

वीर क्रांतिकारी मदन लाल ढींगरा के जन्म के बारे में किसी प्रकार का ठोस सबूत नहीं मिल पाया है पर उनके पिता के अनुसार ढींगरा का जन्म 18 सितंबर 1883 को पंजाब के अमृतसर में एक सुखी संपन्न हिन्दू परिवार में हुआ था | इनके पिता दित्तामल जी अमृतसर में सिविल सर्जन थे |

जीवन परिचय

भारतीय वीर मदन लाल ढींगरा का जन्म अमृतसर स्थित एक ब्राहमण परिवार में हुआ था | इनका परिवार अंग्रेजो का काफी विश्वासपात्र था, इनके पिता पेशे से सिविल सर्जन एवं अंग्रेजो के रंग में रंगे हुए थे परन्तु इनकी माता धार्मिक थी और साथ ही भारतीय संस्कारो का पालन करती थी | ढींगरा ने अपनी आरंभिक शिक्षा समाप्त कर लाहौर के कॉलेज में दाखिला लिया परन्तु यहाँ इन्हें स्वतंत्रता सम्बंधित क्रांतिकारी का आरोप लगाकर कॉलेज से निकाल दिया गया और इस घटना के बाद इनके पिता ने इन्हें अपने घर से निकाल दिया एवं इनसे रिश्ता तोड़ लिया | इस घटना के बाद ढींगरा ने अपने जीवन व्यापन के लिए कलर्क, तांगा चालक एवं कारखानों में श्रमिक के रूप में भी कार्य किए | कारखाने में कार्य करते समय इन्हें श्रमिको की दशा पर दया आई और इन्होने श्रमिको की दशा को सुधारने के लिए संघ बनाने की कोशिश की जिस कारण इन्हें कारखाना से निकाल दिया गया | इसके बाद इन्होने मुंबई में काम किया और 1906 में अपने बड़े भाई की सलाह एवं सहायता से उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए इंग्लैंड चले गये और वहाँ University College, London, में Mechanical Engineering में दाखिला लिया | इंग्लैंड में इन्हें यहाँ रह रहे राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओ से मुलाकात हुई जिनसे इन्हें आर्थिक मदद भी मिली |


सावरकर से मुलाकात

ढींगरा जब इंग्लैंड में थे उस समय विनायक दामोदर सावरकर अर्थात सावरकर एवं श्यामजी कृष्ण वर्मा नामक प्रख्यात राष्ट्रवादी नेता एक क्रांतिकारी संस्था ‘अभिनव भारत’ का संचालन कर रहे थे | इस दौरान ढींगरा इण्डिया हाउस में रहा करते थे जो उस समय भारतीय विद्यार्थियों के राजनैतिक क्रियाकलापों का केन्द्र हुआ करता था | इनकी मुलाकात सावरकर एवं श्यामजी से इसी जगह पर हुई | वे लोग इनके देशभक्ति को देख कर काफी प्रभावित हुए एवं इन्हें क्रांतिकारी संस्था का सदस्य बनाया एवं इन्हें अस्त्र-शस्त्र चलाने का प्रशिक्षण दिया गया | इस समय भारत में अंग्रेजो के द्वारा खुदीराम बोस, कन्हाई लाल दत्त, सतिन्दर पाल एवं काशी राम जैसे क्रांतिकारी को मृत्युदंड दिया गया था जिससे इन्हें काफी पीड़ा हुई और इन्होने अंग्रेजो से बदला लेने का निर्णय लिया |

गतिविधि              

1908 में अंग्रेजो का भारतीयों के खिलाफ अत्याचार काफी बढ़ गया था इनके इस अत्याचार का विरोध करने पर भारत के कई वीर सपूत खुदीराम बोस, कन्हाई लाल दत्त, सतिन्दर पाल एवं काशी राम को मृत्यु दंड दिए जाने के कारण कई क्रांतिकारीयो ने अंग्रेजो से बदला लेने का फैसला लिया | 1 जुलाई 1909 को लंदन में ‘Indian national association’ के Annual day celebration में कई भारतीय एवं अंग्रेज भी शामिल हुए | ढींगरा, अंग्रेजो को सबक सिखाने के उद्देश से इस उत्सव में शामिल हुए | अंग्रेजो के लिए जासूसी करने वाले अधिकारी कर्ज़न वाइली भी इस समारोह में शामिल हुए | जैसे ही उन्होंने हॉल में प्रवेश किया ढींगरा ने उनपर बंदूक से चार गोली चलायी | कर्ज़न को बचाने के कारण डॉक्टर कोवासी ललकाका को एक गोली लगी और वो मर गए |

मृत्यु

कर्ज़न को गोली मारने के बाद ढींगरा ने अपनी हत्या करनी चाही पर खुद की हत्या करने से पहले उन्हें पकड़ लिया गया | लंदन में स्थित पुराने बेली कोर्ट में 23 जुलाई को सुनवाई हुई जिसमे उन्हें मृत्युदण्ड दिया गया एवं 17 अगस्त 1909 को इन्हें फासी की सजा दे दी गई | और इस तरह उन्होंने पुरे देश में एक नयी क्रांति को लहर दी | और ठीक इनके शहीद होने से लगभग एक साल पहले महान स्वतंत्र सेनानी शिवराम राजगुरु का जन्म हुआ था जिन्होंने अंग्रेजो को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया था |

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