Maha Shivaratri Date and Time for 2017 – Puja Vidhi

By | February 23, 2017

This time the holy Maha Shivratri puja will be held on 24 February 2017. Find step by step pujan vidhi, mantra in Hindi – महाशिवरात्रि की पूजा कैसे करे | हिन्दू धर्म के मान्यताओ के अनुसार कई पर्व त्योहार है, जिनमे से कुछ प्रमुख है | प्रमुख त्योहारों की सूचि में एक त्योहार महाशिवरात्रि भी सम्मिलित है | महाशिवरात्रि के नाम से ही पता चलता है की इस त्योहार में भगवन शिव की पूजा आराधना की जाती है | शिव जिन्हें कई नामो से भी जाना जाता है जैसे शंकर, भोले, महादेव, विषधर आदि, भगवान शिव को संघारक भी कहा जाता है | इनके रूप काफी अजीब एवं भयंकर है | इनके शरीर पर मसानो की भस्म लगी होती है, गले में सांपो की माला, कंठ  में विष, जटा में पावन गंगा सिर पर चंद्रमा, हाथो में डमरू और त्रिशूल और माथे पर प्रलयकारी ज्वाला है | परन्तु यह ध्यान रहे की हर चीज के पीछे एक कहानी होती है, जैसे कंठ में विष का होना , जब समुद्र मंथन हुआ, तब उसमे से विष भी निकला था, जिसे शिव जी ने अपने कंठ में रख लिया ताकि संसार को इससे बचाया जा सके और इसी कारण शिव जी को नील कंठ धारी भी बोला जाता है | शिव जी, अच्छे कर्म करने वाले अपने भक्तो को सुखी संपन रहने का आशीर्वाद देते है |

Maha Shivratri in Hindi

महाशिवरात्रि के पीछे कई पौराणिक कथा का मान्य है | हिन्दू धर्म ग्रन्थ शिव पूरण की विद्येश्वर संहिता के अनुसार भगवान ब्रम्हा और विष्णु के द्वारा इस पवन तिथि को भगवान भोलेनाथ के निराकार स्वरूप प्रतीक लिंग का पूजन सर्वप्रथम किया गया था | अन्य मान्यता के अनुसार इस तिथि को भगवान शिव और देवी पार्वती की शादी रचाई गई थी | इन्ही सभी घटनाओ के कारण इस पावन तिथि को महाशिवरात्रि मनाई जाती है | कहा जाता है की भगवान शिव काफी भोले है और इन्हें मनाना बहुत आसान है, ये काफी आसानी से प्रसन्न हो जाते है और अपने भक्तो को इक्षानुसार वरदान देते है |

Mahashivratri Puja Date in 2017

हर वर्ष के भाती इस वर्ष महाशिवरात्रि भी लोगो के द्वारा इस वर्त को विधिवत मनाया जाएगा | English calendar के अनुसार 2017 में महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त 24 Febuary 2017 है |

महाशिवरात्रि पूजन समय / Worship Timing

How to pray Lord Shiva during Maha Shivratri puja

हिन्दू पंचांग के अनुसार महाशिवरात्रि फाल्गुन हिंदी माह के कृष्ण पक्ष के चतुर्दशी को मनाया जाता है | यूँ तो हिन्दू पंचांग के अनुसार हरेक माह के कृष्ण पक्ष के चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि पर्व होता है परन्तु इन सभी 12 में से फाल्गुन माह का पर्व अति उत्तम मना गया है और इस कारण इसे महाशिवरात्रि भी कहा जाता है | लोगो का यह मानना है की संसार के निर्माण में इस दिन के मध्यरात्रि को भगवान शंकर का ब्रह्मा से रूद्र के रूप में अवतार हुआ था | प्रलय की वेला में भगवान शंकर तांडव करते हुए पूरे ब्रह्मांड को अपने तीसरे नेत्र की ज्वाला से समाप्त कर दिए थे, इस कारण इस दिन को कई जगह पर “कालरात्रि” भी कहा जाता है |

मंत्र / Mantra

हमारे अराध्य भगवान शिव जी को आप अपने अच्छे कर्म और केवल “ॐ नमः शिवाय” के जाप से प्रसन कर सकते है | इसके अलावे आप Maha Shivratri के दिन इस mantra को उच्चारण करे और ध्यान लगाए :

Om Tryambhakam Yajamahe
Sugandhim Pushtivardhanam |
Urvarukamiva Bandhanan
Mrityor Mukshiya Maamritat ||

इसके अलावे आप शिव जी के पूजन विधि को यहाँ पर विस्तार में पढ़ सकते हैं |

महाशिवरात्रि पूजन विधि / How to perform Puja on Maha Shivratri

महाशिवरात्रि की पूजा संध्याकाल में या रात में होती है | इस दिन पूजा करने वाले सभी लोग दिन भर का उपवास रखते है और अपना सारा समय भगवान शिव के ध्यान में लगाते है | पूजा के उपरांत सभी मिलकर रात को जागरण करते है | अब आइये जानते है महाशिवरात्रि की पूजा कैसे की जाती है |

  • सर्वप्रथम पूजा की सभी सामग्री अपने पास एकत्रित कर इसे यथा-स्थान पर रख ले जिससे आपको बार बार उठना ना पड़े |
  • सामग्री रखने के पश्चात् एक शुद्ध आसन लगाकर स्थान ग्रहण करे |
  • स्थान ग्रहण करने के उपरांत हाथ में जल ले कर आचमन करे और आसन की शुद्धि करे |
  • हाथ को जोड़ कर स्वस्ति पाठ करे |
    स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवा:
    स्वस्ति ना पूषा विश्ववेदा:
    स्वस्ति न स्तारक्ष्यो अरिष्टनेमि
    स्वस्ति नो बृहस्पति र्दधातु।
  • इसके बाद पूजन का संकल्प ले और पूजा आरम्भ करे |
  • संकल्प लेने के बाद हाथ में अक्षत और बेलपत्र ले कर भगवान शंकर जी का ध्यान करे और भगवान को आसन प्रदान करे |
  • भगवान को आसन देने के बाद इन्हें दही, घी, शहद, शक्कर, पंचामृत, सुगंध जल स्नान कराए | इन सभी चीजे नहीं होने पर पंचामृत और जल से स्नान कराए |
  • स्नान के उपरांत भगवान को वस्त्र समर्पित करे और जनेऊ, पुष्प, बेलपत्र, चन्दन आदि चढ़ाए |
  • फिर आपके पास मौजूद प्रसाद का भोग लगाए और धुप दीप को प्रज्वलित करे |
  • अब अपने हाथ में अक्षत, पुष्प या फल रखे और भगवान शिव को स्मरण कर महाशिवरात्रि की कथा को ध्यान पूर्वक सुने |
  • कथा समाप्त होने के बाद भगवान की आरती करे और अंत में भगवान से क्षमा-याचना के मंत्रौच्चारण के साथ अपनी गलती के लिए क्षमा मांगे |

आह्वानं ना जानामि,
ना जानामि तवार्चनम,
पूजाश्चैव न जानामि
क्षम्यतां परमेश्वर: !

अगर आपके पास और कोई सुझाव है या महा शिवरात्रि के पूजन करने की कोई और विधि मालूम है तो आप इसे यहाँ जरुर बतलाये ताकि ज्यादा से ज्यादा भक्तो को लाभ मिले |

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