महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का इतिहास, उज्जैन

By | February 22, 2017

आज जानेंगे महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के इतिहास के बारे में – Mahakaleshwar temple जो की Ujjain में स्थित है से जुडी history, facts और जानकारी detail में पढ़े | हिन्दुओं के प्रमुख शिव मंदिरों में से Mahakaleshwar मंदिर एक है, यह मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसे शिव जी का तीसरा ज्योतिर्लिंग भी कहा जाता है | यह पवित्र मंदिर Madhyapradesh के Ujjain शहर में स्थित है यह मंदिर Rudra Sagar lake के तट पर स्थित है | लोगो का यह मानना है की भगवान शिव इस लिंग पर स्वयंभू के रूप में निवास करते है, इसिलए इस लिंग का अत्यन्त पुण्यदायी महत्ता है | लोगो का ऐसा भी मानना है की सिर्फ इसके दर्शन मात्र से इंसान को मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है | Mahakaleshwar Jyotirlinga का वर्णन Mahabharat, Purana और कालिदास के रचनाओं में भी किया गया है |

Mahakaleshwar temple

History of Mahakaleshwar Temple / महाकालेश्वर मंदिर का इतिहास 

मंदिर Malawa में मराठों के शासनकाल के दौरान पुनर्निर्मित किया गया था । Mahakaleshwar मंदिर को महाराजा Ranajirav Shinde ने 1736 में बनवाया था | इस मंदिर के बनाने के बाद महाराज Srinath Mahadji Shinde और महारानी Bayjabai Raje Shinde ने मिल कर इस मंदिर में कई बदलाव करवाएं और आगे जा कर राजा भोज ने इस मंदिर को expand किया |

Detail / वर्णन

Mahakaleshwar Jyotirlinga एक मात्र ऐसा लिंग है जो की दक्षिणमुखी है, इसलिए इस मंदिर में बनी मूर्तियों को दक्षिणामूर्ति के नाम से भी पुकारा जाता है | यह एक अनूठी विशेषता है, tantric shivnetra परंपरा 12 ज्योतिर्लिंगों में केवल महाकालेश्वर में पाया जाता है | ओंकारेश्वर महादेव की मूर्ति को महादेव तिर्थास्थल के ठिक ऊपर बनाया गया है |  इस मंदिर में Ganesh, Parvati and Karttikeya के मूर्तियों को west, north और east direction में रखा गया है | दक्षिण दिशा की ओर भगवान शिव के वाहन नंदी की मूर्ति को रखा गया है | कहा जाता है की यहाँ बने नागचंद्रेश्वर के मंदिर को सिर्फ नागपंचमी के दिन ही खोला जाता है, महाकालेश्वर पांच मंजिला मंदिर है, जिनमे से एक मंजिल जमीन के निचे भी है | यह मंदिर एक झील के किनारे पवित्र courtyard में बना हुआ है, जो की बड़े पैमाने पर दीवारों से घिरा हुआ | शिखर मुतिकला को सजधज के साथ सजाई गई है, पीतल से बने लैंप भूमिगत मंजिला के मार्ग में प्रकाश डालने का काम करता है | अन्य सभी मंदिरों की भाती इस मंदिर में भी प्रसाद वितरण किया जाता है. लेकिन इस मंदिर की एक खास विशेषता यह है की इस मंदिर में वितरित प्रसाद को दुबारा भगवान को चढ़ाया जा सकता है |

Shree Mahakaleshwar Jyotirlinga

महाकालेश्वर मंदिर के उपरी हिस्से को इस तरह से निर्माण किया गया है की यह आसमान को छूता दिखाई पड़ता है, जो की मौलिक भय और इसकी महिमा के साथ श्रद्धा का उदाहरण भी देता हैं |  महाकाल, शहर और यहां के लोगों के जीवन पर हावी आधुनिक व्यस्तताओं की व्यस्त दिनचर्या के बीच में, और प्राचीन हिंदू परंपराओं के साथ एक अटूट कड़ी प्रदान करता है। महाशिवरात्रि के दिन यहाँ एक विशाल मेला लगाया जीता है जो की मंदिर के पास ही आयोजित किया जाता है, और पूजा रात के मध्य रात्रि से आरम्भ होता है |

हाकालेश्वर मंदिर के परिसर में श्री Swapaneshwar महादेव का भी एक मंदिर, जहां भक्त उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण सपनों को साकार करने के लिए, महाकाल के रूप में शिव से प्रार्थना करते हैं | यहाँ पर महादेव Swapaneshwar है और शक्ति Swapaneshwari है | यह मंदिर सुबह के 4 बजे से ले कर रात्रि के 11 बजे तक खुला रहता है |

Intresting Facts of Mahakaleshwar Temple / रोचक तथ्य 

  • भारत के 12 ज्योतिर्लिंग में से महा कालेश्वर मंदिर मुख्य है |
  • पुरे विश्व के शिव मंदिरों में यह एक मात्र मंदिर है जो दक्षिणमुखी है |
  • रोजाना यहाँ भस्म आरती होती है, पुराने समय में यह आरती अंतिम संस्कार के शव के रख से की जाती थी जिसे की बंद कर के गोबर की राख से की जाती है |
  • लोगो का यह मानना है की इस मंदिर के दर्शन मात्र से मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है |
  • Mahakaleshwar का शीर्ष मंजिला मंदिर सिर्फ नाग पंचमी के दिन ही खोला जाता है जो की साल में सिर्फ एक बार ही खुलता है |
  • महाकाल को उज्जैन का राजा माना जाता है, इसलिए यहं कोई अन्य राजा रात में नहीं रह सकता |

अगर आपके पास और कोई भी महाकालेश्वर मंदिर से जुडी जानकारी हो तो मुझे जरुर बतालये |

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