Monday Fasting – Somvar Vrat Katha, Puja Vidhi, Food

By | June 9, 2016

जानिए सोमवार व्रत कथा और कहानी, कैसे करे Monday Fast और पूरी fasting food की list. यह भी जानिए की कैसे की जाती है इसकी Puja Vidhi  और Mantra के बारे में | सप्ताह का एक दिन सोमवार भगवान शिवजी के लिए मान्य है | इस दिन भगवन शिव जी की पूजा की जाती है | इस व्रत को कोई भी कर सकता है स्त्री या पुरुष | भगवान शिव जो देवो का देव महादेव भी कहलाते है, वह इस और समस्त संसार के करता धर्ता हैं  |

सोमवार व्रत मुख्यतः तीन प्रकार के होते है / Three types of Somvar Vrat

  • साधारण प्रति सोमवार  / Sadharan Prati Somvar
  • सौम्य प्रदोष / Somya Pradosh
  • सोलह सोमवार / Solah Somvar

परन्तु इन सभी की पूजा विधि एक समान ही है |

Somvar Vrat Kahta dedicated to Lord Shiva

यह मेरा खुद का अनुभव है की अच्छे कर्म और शिव जी की आराधना करने से कई तरह के संकटों से छुटकारा मिलता है और मन को शांति प्राप्त होती है |

Agar aap bhi Shiv ji ki kripana pana chahate hai to do chijon ka hamesha khayal rakhe – Hamesha Karma par dhyan de aur Prama Pujya Shiv ji ki tan aur man se puja kare. To chaliye jante hai Somvar Vrat ki puja kaise ki jati hai, iski puja vidhi, fasting food kaun sa hai aur Katha vistar mein:

सोमवार व्रत पूजा विधि

Agar aap may personally Somvar Vrat ki puja karne ki iksha ho, to yah ek aasan puja hai, jise karne se andar (internally) se shanti milti hai. To chaliye jante hai ki Somvar Fasting ki Puja procedure kaise ki jati hai:

  • इस व्रत को आरम्भ करने का सबसे अच्छा समय श्रावण मास है, इसे आप चैत, वैशाख, श्रावण या कार्तिक मास में भी कर सकते है |
  • उपासक को सोमवार के दिन प्रातः काल काले तिल का तेल लगाकर स्नान करे |
  • अपने नजदीक के मंदिर में जाकर शिवजी की पूजा कर सकते है |
  • सर्वप्रथम शिव जी प्रतिमा को जल से स्नान करवाए, फिर चन्दन आदि लगा कर फुल चढ़ाए |
  • अब दीपक जला कर शिव जी की पूजा करे, पूजा के क्रममें शिव जी के पंचाक्षर मंत्र (Panchakshar Mantra) नमः शिवाय का जाप करे, इस मंत्र में ॐ का इस्तेमाल न करे क्यूंकि इसमें मंत्र छः अक्षर का हो जाता है |
  • पूजा के बाद हाथ में फुल या फल ले कर शिव जी की कथा को सुने |
  • कथा के बाद आरती करे और फिर सभी में प्रसाद का वितरण करे |

इसके अलावे आप भगवान शिव की पूजा कैसे करे यहाँ पर विस्तार में पढ़ सकते हैं |

Food for Somvar Vrat 

उपासक इस बात पर विशेष ध्यान दे की इस दिन वह दिन में एक ही बार खाए | सोमवार को उपासक सुबह पूजा करने के पश्चात फल का सेवन कर सकते है, और शाम में वह मीठा भोजन ले सकता है | जैसे –

  • केला, सेव या कोई फल |
  • रात को मीठा भोजन में चावल या साबूदाना का खीर, हलवा, या दूध और रोटी खा सकते है |

इस विशेष दिन उपासक को तन और मन से साफ़ रहना चाहिए और प्रभु शिव के प्रति समर्पित होना चाहिए |

Scientifically bhi fasting karne se hamare stomach ko aaram milta hai aur pachan tantra accha rahta hai.

सोमवार कथा (Sadharan Prati Somvar Katha)

Agar aap akele hai to aap Somvar Vrat Katha ko padh kar ke sun sakte hai, aur agar aap pass mein koi padosi ya dost ho to unhe amantrit karke Somvar Puja ki Katha kar sakte hai. Ise padhne aur sunane wale dono ko hi labh milta hai:

प्राचीन काल की बात है, किसी शहर में एक बहुत बड़ा साहूकार रहता था | उसके घर में किसी प्रकार की किसी भी चीज की कमी नहीं थी | सभी चीजो से परिपूर्ण होने के बावजूद साहूकार का एक भी पुत्र न होने के कारण बहुत दुखी था, साहूकार पुत्र की कामना हेतु प्रत्येक सोमवार को मंदिर जाता और शिवजी का व्रत को बड़े श्रद्धा के साथ करता था, और साथ ही सायंकाल को मंदिर में दीपक प्रज्वलित करता था | साहूकार के इस श्रद्धा और भक्तिभाव को देखकर माता पार्वती अति प्रसन्न हुई, और वे शिवजी से कहे, “हे प्रभु ! यह साहूकार आपका सबसे बड़ा भक्त है, और ये इतनी श्रद्धा से आपकी भक्ति करता है, आपको इसकी सभी मनोकामना को पूर्ण करनी चाहिए | यदि आप एसा नहीं करते है, तो मनुष्य आपपर विश्वास करना छोड़ देंगे और कोई भी आपका पूजा नहीं करेगा |” माता पार्वती के इस आग्रह पर शिवजी कहने लगे, “हे पार्वती ! इसके भाग्य में पुत्र न होने पर भी मै इसको पुत्र की प्राप्ति का वर देता हूँ | परन्तु वह 12 वर्ष तक ही जीवित रहेगा |” भगवान शिव और माता पार्वती का यह वार्तालाप साहूकार सुन रहा था | इससे उसको न तो प्रसन्नता हुई और न ही दुख हुआ | वह पहले के तरह ही शिव जी का व्रत करता रहा | कुछ समय के बाद साहूकार के घर अति सुंदर पुत्र का जन्म हुआ | साहूकार के घर में बहुत खुशिया मनाई गई और जश्न भी चला | साहूकार को असलियत पता होने के कारण वह न तो अधिक प्रसन्नता प्रकट की और न ही किसी को यह भेद ही बतलाया |

Baki ki Somvar Katha padhane ke liye pdf download kare jo ki Hindi mein hai.

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