ओल के खेती कैसे करे और कमाये मुनाफा

By | September 4, 2017

किसान भाइयों क्या आप ओल की खेती करने की सोच रहे हैं? जानिए इससे जुडी जानकारी जैसे इसके बिज, जमीन की तैयारी, इसमें लगने वाले रोग और profit per acre का गणना | भारत वर्ष में किसानो के द्वारा कई प्रकार के सब्जियाँ उगाई जाती है जिसमे ओल भी सम्मिलित है | यह एक प्रकार का सब्जी है जिसे कई नामो से जाना जाता है | ओल के अलावा इसे जिमीकंद या घनकंद भी कहा जाता है जो अंग्रेजी के elephant foot yam या whitespot giant arum जैसे शब्दों से पुकारा जाता है | यह एक उष्णकटिबंधीय कंद फसल है, जो मुख्य रूप से अफ्रीका, दक्षिण एशिया, दक्षिण पूर्व एशिया के साथ साथ अन्य उष्णकटिबंधीय क्षेत्रो में इसकी खेती की जाती हैं |

Oal Farming

ओल के सभी भाग का इस्तेमाल मनुष्य के द्वारा विभिन्न तरीको से किया जाता है | कही लोगो के द्वारा इसके जड़ का इस्तेमाल करी, भरता, चोखा, चटनी एवं आचार के रूप में करते है | भारत के कई हिस्से में इसके पत्ते का इस्तेमाल साग के रूप में करते है | व्यंजन के अलावा इस फसल का इस्तेमाल अन्य कई रूप में भी किया जाता है | आयुर्वेद विज्ञान इसका इस्तेमाल मनुष्य के शरीर में होने वाले कुछ समस्या का समाधान के लिए करते है |

Varieties of Oal

Climate एवं जलवायु के अनुसार ओल के विभिन्न किस्मे पाए जाते है जिनमे से मुख्य तीन किस्म की उपज भारत में किया जाता है | इसके विभिन्न किस्म का इस्तेमाल इसके अधिक उत्पादन के लिए भी किया जाता है, तो आइए जानते है इसके सभी किस्मो के बारे में :-

संतरा गांची :- इस किस्म के फसल का groth अन्य फसल के मुकाबले जल्द होता है | इस किस्म में उपज होने वाले फसल का स्वाद थोडा कडुआ होता है, इस किस्म के कंद का सतह थोडा खुरदरा होता है जो मक्खनी रंग के होते है | अगर आप इस किस्म का उपज अपने खेतो में करते है तो यह आपके एक हेक्टेयर भूमि में 50 से 65 क्विंटल तक का उपज देता है | इस किस्म में मादा घनकंद प्राप्त होता है जिसका आप पुनः इस्तेमाल बीज के रूप में कर सकते है |

कोववयूर :- कोववयूर ओल संतरा गांची के समान होता है परन्तु इस किस्म में अधिक उपज का आसार होता है एवं इसमें संतरा गांची के तरह मादा घनकंद नहीं मिलता | अगर आप इस किस्म का इस्तेमाल अपने खेतो में करते है तो आपको प्रति हेक्टेयर 100 क्विंटल या इससे अधिक उपज होता है |

गजेन्द्र–1 :- ओल का यह किस्म अन्य किस्मो से बहुत अलग होता है | इस किस्म में कैल्सियम की आक्जैट के मात्रा अन्य के मुकाबले कम होती है जिस कारण इसे खाने के उपरांत गले में जलन महसूस होता है एवं यह खाने में भी स्वादिष्ट होता है | इसके कंद के गूदे का रंग गुलाबी रंग का होता है जिसकी उपज 150-200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होता है |


Climate 

किसी फसल के उत्तम विकास के लिए उचित जलवायु का होना अति आवश्यक होता है | ओल एक ऐसा फसल है जो उपोष्णकटिबंधीय और उष्णकटिबंधीय फसल है, इस वनस्पतिक विकास के लिए ठंडी एवं शुष्क जलवायु की आवश्यकता होती है वही इसके corm development के लिए नरम एवं गर्म जलवायु की आवश्यकता होती है | एवं आवश्यक वार्षिक वर्ष इसके विकास के लिए उचित होता है |

Soil Required

ओल की फसल के लिए जल्वायो के बाद उचित भूमि का होना आवश्यक है | इसके फसल के लिए अच्छी तरह सुखी उपजाऊ लाल-चिकनाई मिट्टी की आवश्यकता होती है एवं मिट्टी का PH मान 5.5 से 7.2 में मध्य अति उत्तम होता है |

Soil Preparation

किसी भी फसल को लगने से पहले खेत जो तैयार करना अति आवश्यक होता है | अगर आप ओल का खेती करना चाहते है तो इसको लगाने से पहले 60X60X45 cm के माप में 90 cm की दुरी पर गड्डा खोद ले | अब इस गड्डे में खाद डाल कर मिला दे एवं गड्डे से निकले मिट्टी में भी खाद को मिलाए और इसे 2 या 3 दिन के लिए छोड़ दे |

Seed Distance

फसल को लगते समय बीज के बीच required space नहीं देने पर फसल का growth सही नहीं हो पाता है | अगर आप ओल की खेती कर रहे है तो इसके बीज को लगते समय यह ध्यान रखे की फसल के आपस की दुरी 90 cm से कम ना हो |

Sowing

खेत में की गई गड्डे में ओल को डाले | अगर इसका आकर बढ़ा है तो आप इसे 500 ग्राम के टुकडे में काट कर कटे हुए भाग पर गोबर का एक परत चढ़ा दे इससे ओल में किसी प्रकार का कीड़ा नहीं लगेगा एवं फसल सुरक्षित रहेगा |

Manure and Fertilizer

स्वस्थ उपज के लिए उचित fertilizer की आवश्यकता होती है | खेत की अंतिम जुताई से पहले खेतो में 30 टन प्रति हेक्टेयर के दर से जैविक खाद को डाल कर जुताई करे | फसल को रोपने के उपरांत नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं पोटैशियम 80:60:100 kg प्रति हेक्टेयर के दर से दो बार खेतो में डाले |

Irrigation

वैसे तो इस फसल के लिए अधिक सिचाई की आवश्यकता नहीं होती परन्तु शुष्क मौसम होने पर फसल में सिचाई की आवश्यकता होती है | जलवायु और मिट्टी की नमी धारण क्षमता के आधार पर फसल में एक सप्ताह में एक बार सिंचाई करनी चाहिए | और अगर खेतो में पानी जमा हो रहा है तो खेत से पानी को निकलने का उपाय करे |

Weed Control

फसल लगाने के बाद फसल के साथ साथ कई प्रकार के खर पतवार भी निकलते है जो फसल के विकास को प्रभावित करते है इसलिए समय समय पर फसल से अनावश्यक खर पतवार का निकाय करे |

Pests and Diseases Control

ओल के फसल में मुख्य रूप से leaf spot एवं collar rot जैसे समस्या पाई जाती है | इसके लिए आप निम्न उपायों को आजमाए :-

Leaf Spot :- इस समस्या में Mancozeb को 2 g/ltr में मिलकर फसल का छिडकाव करे |

Collar Rot :- यह बीमारी मिट्टी से उत्पन्न कवक के कारण होता है | इस समस्या का समाधान के लिए 50 किग्रा जैविक खाद के साथ Trichoderma harzianumI के 2.5 kg मिलकर एक हेक्टेयर खेत में डाले | किसी भी अन्य संक्रमण के होने पर पौधे को खेत से हटा दे एवं खेतो में जल जमाव नहीं होने दे |

Harvesting

ओल का फसल बुआई के 7 से 9 महीने में पुरे तरह से तैयार हो जाते है | फसल तैयार होने पर इसके पत्ते खुद बखुद सूखने लगते है जिसके उपरांत खेत में हल्की सिचाई कर आप इसके फसल की खुदाई कर सकते है | फसक खुई के उपरांत इसे अच्छे से साफ़ कर मंडी में भेज दिया जाता है |

3 thoughts on “ओल के खेती कैसे करे और कमाये मुनाफा

    1. Bhagat

      ओल के सब्जी का बिज नहीं मिलता है, बल्कि इसके फल को काट कर लगाया जाता है, ठीक उसी तरह जैसे आलू की रोपाई होती है

      Reply
  1. ganesh giri

    polular ke pad kaha se parap kare one tree ka rs keatana padega
    aur easka seal kaha pe hoga
    Add
    khutoli phulpur Azamgarh 226304

    Reply

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