Phool / Patta Gobhi ki Vaigyanik kheti Kaise Kare

By | March 14, 2016

Agar aapke pass apni jamin ho to Gobhi ki Vaigyanik kheti kar ke aap apna khud ka kheti se related business start kar sakte hain.  Ismein do tarah ki kheti ki jaa sakti hai – Phool or Patta Gobhi ki. और अगर फूल गोभी और पत्ता गोभी दोनों की खेती को अगर वैज्ञानिक technique से की जाये तो किसानो को फसल की उत्पादन बड़े पैमाने में मिल सकती है। निचे हम आपको फूल गोभी और पत्ता गोभी की खेती वैज्ञानिक तरीके से कैसे करना चाहिए इसके बारे में बताने जा रहे है।

Phool Gobi Ki Sahi Kheti Kaise Kare

Phool / Patta Gobhi Ki Kheti Kaise Kare

Agar aap bade scale par Patta ya Phool Gobi ki kheti karna chahte hai to aapko kuch chijon ka dhyan denga hoga taki aap kam lagat laga kar accha munafa kama sake.  Aap chahe to ek he jagah par phool or patta gobhi ke kheti kar ke lakhon mein kama skate hain.  To chaliye jante hai kaise scientific tarike se gobi ki kheti ki jaa sakti hai:

जलवायु / Climate

फूल गोभी और पत्ता गोभी दोनों हीं के लिए ठंडी आद्र  तथा नम जलवायु की अव्यश्कता पड़ती है। पत्ता गोभी के बीज  का अंकुरण के लिए लगभग 27 से 29 डिग्री सेल्सियस का temperature चाहिए होता है । फूलगोभी के लिए 50  से 75º सेल्सियस तक का temperature अच्छा होता है । atmospheric  आद्रर्ता फूलगोभी की फसल के लिए हानिकारक साबित हो सकती है।

भूमि का चयन / Selection of Land

फूलगोभी की खेती के लिए बलुई दुमट मिट्टी, जो कि अच्छी जल निकास वाली हो उसे  अच्छा  माना जाता है। भूमि का पीएच मान 5.5 से 6.8 होना उपयुक्त होता है। पत्ता गोभी की खेती कई तरह की भूमियों पर की जा सकती है लेकिन अच्छे फसल की उपज हेतु रेतीली दोमट भूमि सबसे best मानी जाती है । जिस भूमि का P.H मान 5.5 से 6.5 हो वह भूमि इसकी खेती के लिए उपयुक्त रहती है।

फूल / पत्ता गोभी के बीज बुआई का सही समय

फूलगोभी को बोने का शीघ्र समय May – June होता है । उसके बाद June के बीच से जुलाई के बीच तक भी इसे बोया जाता है । और देर से इसकी बुआई का समय last July से August तक होता है । पौधे जब क्यारियों में लगभग 5 सप्ताह के हो जायें तब जाके पौधों को खेत में बोना चाहिए। पौधों को बोने से पूर्व खेत की जुताई कर के उस पर पाटा चलाकर उसे समतल बना देना चाहिए।

पत्ता गोभी को मैदानी क्षेत्रों में अगेती फसल के लिए बोने का सही समय होता है august से September और पछेती फसल के लिए बुआई का सही समय है September से October तक का । पहाड़ी क्षेत्र में पत्तागोभी की बुआई march से June तक की जाति है । और अगर बीज उत्पादन के लिए बुआई करना है तो उसका सही समय होता है July से August ।

सिंचाई प्रबंधन / Irrigation Management

फूलगोभी की खेती में 10 से 15  days के interval में सिंचाई की जरुरत पड़ती है। अगेती किस्मों के फसल  की मुताबिक पिछेती किस्मों को अधिक जल की जरुरत पड़ती है।

पत्तागोभी की खेती में लगातार नमी की आवश्यकता पड़ती है इसलिए इसकी सिचाई बीज बुआई के  तुरंत बाद हीं शुरु कर दी जाती है और फिर हर 7 से 8 दिन  के interval में इसकी सिचाई करनी होती है । फसल ready होने के बाद सिंचाई कम कर देनी चाहिए । 

खाद प्रबंधन / Compost Management

फूल गोभी की खेती में गोबर की खाद – 250 क्विंटल, nitrogen -100 kg, phosphorus – 75 kg और  potash –  40 kg की जरुरत पड़ती है। गोबर की खाद खेत की तैयार करते time phosphorus और potash पौधों को रोपने time और nitrogen को दो part में करके रोपने के लगभग 15 days और  उसके बाद लगभग 30 days के बाद देना चाहिए ।
पत्ता गोभी की अधिक उत्पादन के लिए प्रति हेक्टेयर भूमि में लगभग 40 क्विंटल गोबर की  सड़ी हुई खाद और organic खाद 2 बैग भू-पावर – 50 kg , 2 बैग माइक्रो फर्टीसिटी कम्पोस्ट – 40 kg, 2 बैग माइक्रो नीम – 20 kg, 2 बैग सुपर गोल्ड कैल्सी फर्ट – 10 kg , 2 बैग माइक्रो भू-पावर – 10  kg  और 50 kg अरंडी की खली को एक साथ अच्छी तरह mix कर के खेत में बुआई से पहले  बिखेर कर खेत की जुताई कर दें उसके बाद हीं बुआई करे ।

कीट प्रबंधन / Prevention from Insect

Jaydatar mamlon mein paya gaya hai ki phool gobhi mein mainly 4 tarah ke disease lagte hain. Agar aap sahi tarike se phol / patta gobhi ke kehti karna chahte hai to aapko yah bhi sikhna hoga ki kaise ise tarah tarah ke rogon se bachaya jaa sake. To chaliye jante hai phool ya patta gobhi mein hone wali common disease kaun si hai aur iska ilaj:

कैबेज मैगट  – यह पत्ता गोभी में लगने वाला एक रोग होता है जो की पौधों के जड़ों पर आक्रमण करता है जिसकी वजह से पौधे सुखने लगते है। इस रोग से बचने के लिए नीम की खाद का उसे किया जाता है ।

चैंपा – ये कीट भी पत्ता गोभी में लगने वाली है और पौधों के कोमल part का रस चूस जाती है। इसके वजह से पौधों के सभी पत्तियां पिली हो जाती है। इससे बचने के लिए नीम का काढ़ा को माइक्रो झाइम में mix कर के उसका 250 ml मिश्रण को पम्प से छिडकाव कर दें । 

डायमंड बैकमोथ – यह की लगभग 1 cm लम्बे होते है जो की पत्तो के किनारे को खा जाते है । इससे बचने के लिए भी नीम से बना हुआ काढ़ा को micro झाइम में mix कर के पम्प द्वारा इसकाछिडकाव करे ।

ब्लैक लैग – फोमा लिगमा नाम के फफूंदी के वजह से यह रोग लगता है। इस रोग के वजह से पूरा जड़ सड़ जाता है। इससे बचाव के लिए बीज बुआई के पहले हीं कैरोसिन या नीम के तेल से उपचारित कर लें ।

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