Pradosh Vrat ki Puja Vidhi (प्रदोष व्रत)

By | February 4, 2016

क्या आप प्रदोष व्रत (Pradosha vrata) की katha सुनना चाहते हैं ? Janiye Pradosha vrata ki puja vidhi, iske labh aur fayde, pure manra ke saath. हर महीने त्रयोदशी तिथि को रात्री होने से पहले सूरज ढलने के time को प्रदोष काल का समय कहते   है। लोग अपने धर्म, मोक्ष और सुख की प्राप्ति हेतु प्रदोष काल में शिव जी की पूजा करते है। South India में प्रदोष व्रत को शिव जी का आशीर्वाद पाने के लिए मनाया जाता है। स्त्री , पुरुष कोई भी इस वर्त को अपने कल्याण के लिए कर सकते है । कहा जाता है की जो लोग एक साल  तक प्रदोष वर्त को करते है उनके सभी कष्ट और दोष दूर हो जाते है । ये वर्त मनुष्य को निर्जला हीं रखना होता है ।

Pradosh Vrat ki Puja Vidhi

To chaliye jante hai Pradosh Vrat ki puja kare ka fayde aur labh. Agar aap sacche dil aur man se Shiv ji ki puja karte hai to niche diye gaye labh aapko prapt ho sakte hain. Suniye Pradosh Vrat katha aur iske fayde ke bare mein:

प्रदोष वर्त का दिन अगर सोमवार को पड़ता है तो उसे सोम प्रदोष कहा जाता है, अगर  मंगलवार को पड़ता है तो इसे भौम प्रदोष कहा जाता है, और अगर शनिवार को पड़ता है तो इसे शनि प्रदोष के रूप में बुलाया जाता है। इस तरह से week में किसी भी दिन प्रदोष वर्त हो सकता है और हर एक दिन का अपना हीं एक अलग महत्व होता है:-


  • सोमवार (Monday) को Pradosh Vrat करने से मन की मुराद पूरी होती है ।
  • मंगलवार (Tuesday) को Pradosh Vrat करने से सभी रोग दूर होते है साथ हीं इंसान हमेशा स्वस्थ रहता है।
  • बुद्धवार (Wednesday) को प्रदोष वर्त करने से मन की इच्छा (wish) पूरी होती है ।
  • गुरुवार (Thursday) को प्रदोष वर्त करने से दुश्मनों का नाश होता है ।
  • शुक्रवार (Friday) को प्रदोष वर्त करने से कामयाबी मिलती है ।
  • शनिवार (Saturday) को Pradosh Vrat रखने से पुत्र प्राप्ति होती है ।
  • रविवार (Sunday) को प्रदोष वर्त रखने से इंसान हमेशा निरोगी रहता है ।

प्रदोष व्रत विधि / Pradosh Vrat Puja Vidhi

  • हर month त्रयोदशी के दिन Pradosh Vrat किया जाता है। प्रदोष वर्त को निर्जल यानि की बिना पानी पिए हीं रखा जाता है और फिर सारा दिन उपवास रख कर प्रदोष काल में शिव जी की पूजा की जाती है ।
  • सबसे पहले सूर्यास्त यानि की सूरज ढलने के पहले स्नान कर सफ़ेद (White) वस्त्र धारण कर लें ।
  • अब किसी एकांत जगह पर उतर-पूर्व दिशा की ओर face करके पूजा करने के लिए बैठ जाएँ और फिर पूजा वाली जगह को गंगाजल से शुद्ध कर लें।
  • इसके बाद फिर से पुष्पों, बेल पत्र, गंगाजल, अक्षत, लाल चंदन, भांग, हवन और पंचामृत आदि द्वारा शिवजी की पूजा करें ।
  • सबसे पहले भगवान शिव को ॐ नम: शिवाय”  का मंत्र को पढ़ते हुए जल चढ़ाए ।
  • उसके बाद एक एक कर के पूजा की सभी सामग्री को शिव जी पर चढ़ाए ।
  • पूजा हो जाने के बाद अंत में हवन कर के शिव जी की आरती करे ।
  • उसके बाद शांति पाठ करे और फिर अंत में ब्रह्माणों को खाना खिला कर दान दक्षिणा देना चाहिए।

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