Raja Ram Mohan Roy Biography in Hindi – राजा राम मोहन रॉय

By | January 6, 2017

जानिए Raja Ram Mohan Roy जी की biography Hindi में, उनका जन्म, education, marriage, interesting facts और जीवनी – सती प्रथा को रोकने वाले | भारत के ऐतिहासिक पुरुषो में एक नाम राजा राममोहन रॉय का भी है | इन्हें हम आधुनिक भारत के जनक के रूप में भी जानते है | मोहन रॉय ने भारत के सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र में पुनर्जागरण के लिए अपना महत्वपूर्ण यौगदान दिए है | इन्होने एक प्रभावशाली सामाजिक और धार्मिक सुधार आन्दोलन आरम्भ किया | राजा राममोहन रॉय सामाजिक सुधर के अंतर्गत सती प्रथा का अंत किया और धार्मिक सुधार के लिए इनके द्वारा ब्रह्म समाज का स्थापना सन 1828 में किया गया |

Raja Ram Mohan Roy Biography

राजा राम मोहन रॉय का जन्म / Birth 

राजा राममोहन रॉय का जन्म भारत के बंगाल राज्य के हुगली जिले में स्थित राधानगरी नामक गाव में सन 22 मई 1772 को हुआ था | इनके पिता का नाम रमाकान्त रॉय एवं इनकी माता तारिणी देवी थी | इनके पिता जन्म से वैष्णव थे और इनकी माता शैव थी | बंगाल नवाब के यहाँ अपना सेवा प्रदान करना इनके पूर्वज के समय से ही चलता आ रहा था, यहाँ इन्हें रॉय की उपाधि दी गई |

विवाह / Marriage

उस समय दो अलग जाती में विवाह अंतरजातीय कहलाता था इसके बावजूद इन्होने शादी की |  इन्होने अपना जीवन में तीन शादियाँ की, इनकी पहली शादि बहुत ही कम उम्र में हुई थी, जो बहुत ही कम समय में इनका साथ छोड़ कर चली गई थी | इसके बाद इन्होने दूसरी शादी की वो भी इनका साथ लम्बे समय तक नहीं निभा सकी, इन दोनों के दो पुत्र राधाप्रसाद और रामप्रसाद थे | तत्पश्चात इन्होने उमा देवी से शादी की इन्होने इनका साथ उम्र भर दिया | और सन 27 सितम्बर 1833 को राजा राममोहन रॉय का निधन इंग्लैंड में हुआ |

राजा राम मोहन रॉय की शिक्षा / Education

राजा बहुमुखी प्रतिभा के इन्सान थे | इनमे हमेसा कुछ नया करने और सिखने की ललक बनी रहती थी | इनकी प्रारंभिक शिक्षा इनके गाँव पर ही हुई, जहाँ इन्हें बंगला भाषा का ज्ञान हुआ | इसके बाद रॉय उच्च शिक्षा के लिए पटना चले गये | यहाँ से इन्होने अरबी और फारसी दोनों भाषा का ज्ञान हासिल किया | इसी दरमियान राजा राममोहन रॉय की मुलाकात संस्कृत गुरु नंदकुमार से हुई, इनसे उन्हें संस्कृत का ज्ञान हुआ और साथ ही इनसे तंत्र मंत्र विद्या का भी ज्ञान लिया | राजा इन सभी भाषा के अलावा और भी कई भाषाओ के ज्ञाता थे | इन्हें बंगला, फारसी, अरबी, संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी, ग्रीक, फ्रेंच, लेटिन आदि भाषाओ पर अच्छी पकड़ बना रखी थी | राजा राममोहन रॉय जन्म से वैष्णव भक्त होने के बावजूद ये अन्य सभी धर्मो को भी मानते थे और अन्य धर्म में आस्था रखते थे | इन्होने शिर्फ़ अपनी धर्म का अध्यन नहीं किया था किन्तु अपने धर्म के साथ साथ इन्होने इस्लाम धर्म का भी अध्यन अच्छे से किया |

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उपलब्धि / Achievements

श्री  राजा राम मोहन रॉय ने राजा का नाम महान समाज सुधारक के तौर पर जाना जाता है | राममोहन रॉय मूर्ति पूजन और साथ ही सारे बाह्य आडम्बर और दिखावे के खिलाफ थे जिसके कारण इनकी इनके पिता से पटती नहीं थी क्योकि इनके पिता हिन्दू ब्राह्मण थे और वे सभी बातो को मानते थे | इन्ही कारणों से हमेशा पिता और पुत्र के बीच मदभेद होता रहता था और इन्ही कारणों से राजा जी घर छोड़ कर चले गये | घर वापस आने से पहले इन्होने कई स्थानों का भ्रमण किया और कई स्थानों पर रहे | जब ये घर वापस लौटे तो इनके माता पिता ने इनकी शादी कर दी, इनके माता पिता की यह सोच थी की शादी के बाद राजा बदल जाएगा परन्तु ऐसा कुछ भी नी हुआ और राजा का स्वभाव जैसा का तैसा ही रहा |

राजा राममोहन रॉय ने अपने जीवन काल में ना तो किसी पर अन्याय किया और ना ही किसी के साथ अन्याय होने दिया | इन्होने भारत में सती प्रथा को बंद कराना इनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि थी | इस प्रथा के अंतर्गत पति के मृत्यु के उपरांत सती घोषित कर पत्नी को भी चिता पर जिन्दा जला दिया जाता था | लम्बे संघर्षो और कई कठिनाइयों के बाद मोहन रॉय ने सरकार द्वारा सती प्रथा को गैर क़ानूनी घोषित करने में सफल हुए |

रोचक तथ्य / Interesting Facts of Raja Ram Mohan Roy

  • राजा राममोहन रॉय का जन्म बंगाल के उच्च कोटि के बंगाली ब्राह्मण के घर सन 22 मई 1772 में हुआ था |
  • राजा राममोहन रॉय के माता पिता दोनों अलग जाती के थे और इन्होने अंतरजातीय विवाह किया था |
  • राजा राममोहन रॉय बंगला, फारसी, अरबी, संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी, ग्रीक, फ्रेंच, लैटिन भाषा के ज्ञाता थे |
  • रॉय ने अपने जीवन काल में तीन शादियाँ की |
  • रॉय ने अपनी पढाई पूरी करने के बाद ईस्ट इंडिया company join किया | यहाँ पर इन्होने Christianity के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त किया |
  • रॉय कभी भी अन्याय बर्दास्त नहीं कर सकते थे इसलिए इन्होने सती प्रथा का विरोध किया |
  • सन 1828 में राजा राममोहन रॉय ने ब्रह्म समाज की स्थापना की |
  • रॉय को राजा की उपाधि मुग़ल शासक अकबर ने 1831 में दिया |
  • रॉय की मृत्यु 27 सितम्बर 1833 को इंग्लैंड में हुआ |

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