Rani Abbakka Chowta – Biography, Story, Facts in Hindi

By | March 21, 2017

Great freedom fighter Rani Abbakka Chowta complete biography including story, birth, family, marriage, war against Portugal and more in Hindi – रानी अबक्का देवी उल्लाल की रानी थी  जिन्होंने 16 वीं सदी के उत्तरार्ध में पुर्तगालियो से लड़ाई की | अब्बक्का चौटा राजवंश की थी जिन्होंने तटीय कर्नाटक के कुछ हिस्सों पर शासन किया | उनकी बहादुरी के लिए उन्हें अभय रानी के रूप में जाना जाता है, यह भारत की पहली freedom fighter थी | Karnataka में इन्हें Rani Kittur Chennamma, Onake Obavva और Keladi Chennamma के साथ याद किया जाता है |

Great Rani Abbakka Chowta history in Hindi

जीवनी / Biography

Chowtas एक असाधारण बच्ची थी, तीरंदाजी और तलवार से लड़ने में उसके बराबर का कोई नहीं था | अब्बक्का को युद्ध और सैन्य रणनीति के विभिन्न पहलुओं के बारे में प्रशिक्षित उनके पिता ने किया | Chowtas का विवाह Mangalore के राजा Lakshmappa Arasa के साथ हुआ था जो की बाद में पुर्तगाली के लिए चिंता का एक विषय बन गया था | रानी अब्बक्का का marriage life बहुत की कम समय का रहा  क्यूंकि husband के साथ बात ना बनाने के कारण उन्हें अलग होना पड़ा और इसलिए वह अपने राज्य लौट आई | अब्बक्का के पति, अब्बक्का से बदला लेने के लिए Portuguese से जा मिले |

पुर्तगाली के खिलाफ लड़ाई और मृत्यु / War against Portugal and Death

अब्बक्का का शासन और रणनीति पुर्तगालियों को पसंद नहीं थी तथा पुर्तगालियों को अब्बक्का के राज्य में सम्मान चाहिए था जिसे अब्बक्का के द्वारा मना कर दिया गया था | 1955 में पुर्तगालियों ने अब्बक्का से लड़ने के लिए Admiral Dom Álvaro da Silveira को भेजा, लेकिन रानी अब्बक्का ने उन्हें लड़ाई में हरा कर सफलतापूर्वक खदेड दिया | 1557 में पुर्तगालियों ने Mangalore को लुटने की रणनीति बनाई लेकिन उसमे वे विफल रहे | 1568 पुर्तगालियों की नजर Ullal पर पड़ी और वे उस पर कब्ज़ा करना चाहते थे परन्तु रानी अब्बक्का ने इसका विरोध किया | Joao Peixoto ने अपने कुछ पुर्तगालि सैनिको के साथ मिल कर Ullal शहर पर हमला किया और उस पर कब्ज़ा पाने में सफल रहे तथा Royal court में घुसने में सफल रहे | रानी अब्बक्का किसी तरह वहाँ से भाग कर एक मस्जिद में छिप गई, उसी रात रानी ने तक़रीबन 200 सैनिको को एकत्र कर पुर्तगालि पर हमला कर दिया, और इस युद्ध में पुर्तगालियो के general Peixoto मारे गए और रानी की सेना ने 70 पुर्तगालि सैनिको को बंधक बना लिया |

आगे के हमलों में रानी अब्बक्का और उनके समर्थकों ने Admiral Mascarenhas को मार डाला जिसका परिणाम यह हुआ की पुर्तगालि मंगलौर के किले को खाली करने के लिए मजबूर हो गए | 1569 में पुर्तगालियो ने न केवल मंगलौर किला पर दुबारा हमला किया बल्कि उस पर दुबारा कब्ज़ा भी कर लिया इसके साथ पुर्तगालियो ने Kundapur पर भी कब्ज़ा कर लिया था | इन सभी पर कब्ज़ा करने के बाबजूद पुर्तगालियो पर रानी अब्बक्का का खौफ बना रहा | पुर्तगालियो ने Ullal शहर पर दुबारा हमला किया रानी ने बड़ी बहादुरी से पुर्तगालियो का विरोध और युद्ध किया | 1570 में अब्बक्का ने Bijapur के सुल्तान Ahmed Nagar और Zamorine के साथ गठबंधन कर लिया | Kutty Pokar Markar और Zamorine’s के General ने रानी अब्बक्का की ओर से लड़ते हुए Mangalore में पुर्तगालियो के किले को नष्ट कर दिया लेकिन किले से लौटते वक्त Zamorine’s के Genral पुर्तगालियो के द्वारा मारे गए | इस नुकसान और अपने पति के विश्वासघात के बाद, अब्बक्का युद्ध में हार गयी और उन्हें पुर्तगालियो के द्वारा गिरफ्तार कर जेल में बंद कर दिया गया | जेल में भी वह विद्रोह करते हुए ही वीरगति को प्राप्त कर गई |

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