सम्राट अशोक का इतिहास – Samrat Ashok History, Wife, Kalinga War

By | January 27, 2016

Samrat Ashok was one of the greatest King in India – find the history, dob, wife, children, death to interesting facts including Kalinga War – सम्राट अशोक. Samrat Ashoka को Generally Ashoka या फिर Ashoka the Great के नाम से भी जाना जाता  है। वे भारत के great Powerful संपन्न सम्राटो में से एक थे। किताब “outline of history” में samrat ashoka के बारे में , उनकी वीरता के किस्से के बारे में लिखा गया है । उनकी story पुरे इतिहास में प्रसिद्ध है, वे एक लोक-प्रिय, इंसाफ, कृपालु और शक्तिशाली सम्राट थे । ashoka the great मौर्य राजवंश के एक indian samrat थे जिनका शासन indian उपमहाद्वीप पर सन 273 से 232 तक चला । उन्हें बौद्ध धर्म का भी प्रचार किया था। भारत का राष्ट्रीय चिह्न (National Symbols) ‘अशोक चक्र’ और शेरों की त्रिमूर्ति “अशोक स्तम्भ” भी अशोक महान की ही देन है।

About Samrat Ashok

सम्राट अशोक का जन्म / Birth of Ashoka

Samrat Ashoka का जन्म(birth) 304 साल पहले पटना के पाटलीपुत्र मे हुआ था । samrat ashoka  सम्राट  बिन्दुसार और माँ कल्याणी के पुत्र थे । samrat ashoka की माँ कल्याणी चंपक नगर के एक बहुत ही गरीब family की बेटी थी।

सम्राट अशोक का बचपन / Samrat Ashoka Childhood     

Samrat Ashoka को childhood से ही शिकार (hunt) करने का शौक था । जब वे थोड़े से बड़े हुए तभी से उन्होंने अपने पिता के साथ मिलकर साम्राज्य के कार्यो मे उनका हाथ बटाना शुरु कर दिया था । samrat ashoka कोई काम अपनी प्रजा का पूरा ख्याल रखते हुए करते थे। उनके इसी व्यवहार (behavior) से उनकी प्रजा उन्हे बहुत ज्यादा पसंद करने लगी थी। पिता बिंदुसार की देहांत के पश्चात पाटलीपुत्र की राजगद्दी samrat ashoka के बड़े भ्राता शुशिम को मिलने वाली थी, लेकिन प्रजा ने अशोक को इस योग्य ज्यादा समझा , इसलिए उन्होंने अशोक को कम उम्र मे ही वहां का सम्राट घोषित कर दिया था। उनके राज्य में चोरी, डकैती होना पूरे तौर पर ही बंद हो गईं। उन्होंने अपने धर्म पर इतनी मेहनत कि की उनकी पूरी प्रजा honesty and truth के पथ पर चलने लगी।

विवाह / Marriage

जब samrat ashoka ने अवन्ती का शासन संभाला तो वे एक निपुण रजनीतिज्ञ के रूप मे सामने आए।  उसी time samrat ashoka ने विदिशा की princess से शादी (marriage) की थी जिसका नाम शाक्य कुमारी था । शाक्य कुमारी दिखने मे बहुत हीं खुबशुरत थी। शाक्य कुमारी से शादी करने के बाद Samrat Ashoka के दो संतान (child) महेंद्र और पुत्री संघमित्रा हुए ।

सम्राट अशोक का भिसन कलिंग यूद्ध  / Samrat Ashoka’s Kalinga War 

Ashoka War

The Great Ashoka कलिंग पर विजय हांसिल करना चाहता थे जो की उस वक्त के किसी samrat ने नहीं किया था । अतः सन 260 में एक विशाल सेना के साथ उन्होंने दक्षिण की ओर प्रयाण किया । कलिंग सम्राट के पास भी एक बहुत बड़ी सेना थी । उनके बिच एक अत्यंत भीषण युद्ध हुआ । रणक्षेत्र में लगभग 1 lakh व्यक्ति मारे गए , 1.5 lakh बंदी हुए तथा उनसे कई गुना अधिक घायल हो गए। samrat ashoka के 13वें शिलालेख में हम इस युद्ध की भीषणता का वर्णन पाते है । इस युद्ध में इतनी भारी रक्तपात, तबाही व बर्बादी से ashoka के ह्रदय में बड़ा शोक उत्पन हुआ । तब से ashoka को युद्ध से घृणा हो गई । तभी से उसने जीवन भर युद्ध ना करने का निर्णय ले लिया। कलिंग युद्ध अशोक के जीवन (life) का सबसे प्रथम और अंतिम युद्ध था, जिसने उसने जीवन को ही बदल डाला।

बौद्ध धर्म / Buddha Religion

Buddha Religion

एक बौद्ध भिक्षु की अहिंसात्मक शिक्षा का Samrat Ashoka पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा और वह बौद्ध धर्म के हो गए । उसके बाद samrat अशोक ने बौद्ध धर्म की पुस्तकों का गहरा अध्यन किया और उसके बाद उन्होंने बौद्ध धर्म को स्वीकार कर लिया । इस प्रकार samrat ashoka ने निश्चय कर लिया की वह राज्य विस्तार की निति का परीत्याग कर देगा और भविष्य में कभी युद्ध नहीं करेंगे। इस प्रकार कलिंग युद्ध के बाद तलवार सदा के लिए म्यान में रख दी गई । उसके बाद युद्धघोष हमेशा के लिए बंद हो गया और इसके स्थान पर धर्मघोष की आवाज देश देशांतर में गूंजने लगी

सम्राट अशोक द्वारा बौद्ध धर्म का प्रचार 

बौद्ध धर्म स्वीकार करने के बाद ashoka ने उसके प्रचार करने का बीड़ा उठाया । उसने अपने धर्म के अनुशासन के प्रचार के लिए अपने प्रमुख अधिकारीयों युक्त ,राजूक और प्रादेशिक को आज्ञा दी। धर्म की स्थापना , धर्म की देखरेख धर्म की वृद्धि तथा धर्म पर आचरण करने वालो के सुख एवं हितों के लिए धर्म – महामात्र को नियुक्त किया । बौद्ध धर्म का प्रचार करने हेतु samrat ashoka ने अपने राज्य में बहत से स्थान पर भगवान बुद्ध की मूर्तियाँ स्थापित की । Foreign में बौद्ध धर्म के publicity हेतु उसने भिक्षुओं की team भेजी । Foreign में बौद्ध धर्म के publicity के लिए ashoka  ने अपने पुत्र और पुत्री तक को भिक्षु-भिक्षुणी के वेष में india से बाहर भेज दिया । इस तरह से वें बुद्ध धर्म का विकास करते चले गये। धर्म के प्रति samrat ashoka की आस्था का पता इसी से चलता है की वे बिना 1000 ब्राम्हणों को भोजन कराए स्वयं कुछ नहीं खाते थे ।

सम्राट अशोक की मृत्य / death of Ashoka 

samrat ashoka ने लगभग 40 सालो तक शासन किया उसके बाद 72 वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु पटलिपुत्र मे ही हो गई । samrat ashoka के मृत्यु के पश्चात् मौर्य राजवंश लगभग 60 सालो तक चला। उनकी पत्नी शाक्य कुमारी के बारे मे कुछ खास जानकारी किसी किताब या फिर कही और नहीं दी गई है। लेकिन उनके पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा का उनके बौद्ध धर्म की publicity मे काफी Contribution रहा था।

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