सेम की वैज्ञानिक खेती कैसे करे

By | September 24, 2016

जानिए कैसे आप भी सेम की वैज्ञानिक खेती कर के अच्छा खासा मुनाफा कम सकते है | पढ़िए इससे जुडी जानकारी, बुवाई से ले कर रोगों से बचाव का तरीका अपनी भाषा में | सेम एक लता वाला पौधा है | इसके फल को सब्जी बनाने के लिए उपयोग किया जाता है और इसके पत्तियों का उपयोग पशुओं के चारे के रूप किया जाता है | सेम लगभग world के सभी parts में उगाया जाता है | सेम कई तरह के होते है तथा इनके फल भी कई आकार के होते है | सेम एक स्वादिष्ट और पौष्टिक सब्जी है, सेम के बिज का उपयोग दाल के रूप में भी किया जाता है | world production के मामले में India सबसे जायदा सेम का producing country है | छोट्टे production के लिए लोग सेम को अपने घरो के बागानों में लगा कर इसका उपयोग करते है |

Sem Beans ki Kheti kaise kare

छोटे production के लिए तो जायदा knowledge की ज़रूरत नहीं होती है पर यदि आप इसे बड़े पैमाने में करना चाहते है तो आप को इसके बार में जानकारी  के ज़रूरत होती है | तो आइये जाने सेम के खेती कैसे करे तथा कैसे आपने production को अधिक से अधिक बढ़ा सके |

सेम के सब्जी की खेती कैसे करे / How to Grow Broad Beans

मैं हमेशा किसान भाइयों और आज कल के नवयुवकों को की, अगर आपके पास खाली पड़ी जमीन हो तो उसका सही इस्तेमाल करे | अगर आपके पास 1 से ले कर 1.5 acer तक की plot हो तो आप उस पर सेम की खेती कर के अच्छा खासा मुनाफा कम सकते हैं | सेम की सब्जी लगने में भी 3 से 5 महीने का time लगता है और एक बार लग जाने पर यह आपको आसानी से 3 से 4 months तक income generate करता रहेगा | और हाँ अगर आप सेम की organic खेती करते है तब तो आपको अच्छा खासा rate मिल  सकता है |

जहाँ तक capital (पूंजी) की बात है,  broad beans को grow करने में और commercial farming करने में ज्यादा investment नहीं लगता है, अगर आपके पास खुद की जमीन है तो आपको लगभग 20,000 से 25,000 तक का expenses आएगा प्रति 1 acer पर | तो चलिए जानते है कैसे आप भी सेम की खेती कर सकते हैं :

जलवायु / Climate 

सेम की खेती ठंड climate वाले जगह में अच्छी होती है, इस फसल के लिए 15 से 22 डिग्री तापमान की ज़रूरत होती है | सेम के पौधों में पाला सहने के अच्छी क्षमता होती है इस लिए अधिक ठण्ड होने पर भी इस फसल को कोई नुकसान नहीं होता है |

भूमि / Soil

सेम की खेती Loam soil (दोमट मिट्टी) में अच्छी  होती है | अधिक Acidic और अधिक Alkaline वाले मिट्टी में सेम की खेती अच्छी नहीं होती है | इसलिए सेम की अच्छी खेती के लिए दोमट मिट्टी वाली भूमि को चुने |

सेम की प्रजातियाँ / Species of Broad Beans
सेम के कई प्रजातियाँ होती है | कुछ प्रजातियाँ के नाम इस प्रकार से है |

  • सेम २
  • पूसा सेम3
  • पूसा
  • कल्याणपुर टाइप 1
  • कल्याणपुर टाइप 2
  • रजनी
  • पूसा अर्ली प्रौलिफिक

इसके अलावे आप सफ़ेद मुसली की खेती और आम की खेती कर के अच्छा मुनाफा कम सकते हैं |

बीज बुवाई 

सेम की अच्छी खेती करने के लिए यह जानना बहुत ज़रूरी होता है की हम कब बीजो का रोपण करे | तो आइये जाने के कब बीजारोपण करना चाहिए |

Type Timing
अगेती फसल (Early crop) February to March
वर्षाकालीन फसल (Monsoon crop) June to July
रजनी End of August

बीज की मात्रा  /  Quantity of Seeds

सेम के खेती के लिए 1 hectare जमीन में 3 किलो सेम काफी होता है | कोशिश कर की हमेशा अच्छी नस्ल की सेम के बिज लें ताकि पैदवार अच्छी हो और अच्छा मुनाफा भी कमाया जा सके |

दूरी / Distance

सेम खेती करने के लिए यह जानना बहुत ज़रूरी है की हम सेम के बिज को कितने distance में लगाये ताकी सेम अच्छे से फ़ैल सके और अधिक से अधिक फल दे सके | सेम के पौधों की दुरी एक दुसरे से कम से कम 10 से 15 cm होना चाहिए | यदि आप सेम को चौड़ी कियारी बना कर उसे खेती करना चाहते है तो कम से कम 2 meter चौड़ी कियारी बना कर हर 50 मीटर की दुरी पर 2 से 3 cm की गहराई में बिज को रोपे, और बिज से पौधा निकल जाने पर उसे किसी ठन्डे का सहारा दे कर उसके लता को फैलने में मदद कर सकते है  |

खाद

सेम के अच्छी उपज के लिए organic खाद का इस्तेमाल करना चाहिए | जब सेम 20 से 25 दिन का हो जाये तो 10 lit गौमूत्र में नीम के काडे को अच्छे से मिला कर इस मिश्रण को पौधों पर छिडकाव करे इसी तरह से हर 15 से 20 दिन के गैप में इस process को अपनाने से सेम के पैदावर में वृधि होगी |

सेम को बोने के कम से कम 1 month पहले 20 से 25 ton Compost खाद को खेतो में डाल कर अच्छे से जोत ले | सेम के खेतो में बने कियारी में डी.ए.पी. 50 kg, म्यूरेट आफ पोटाश 50 kg प्रति hectare के हिसाब से अपने खेतो के मिटटी में मिलाये |

सिचाई

वर्षा ऋतू में होने वाले फलो को सिचाई की ज़रूरत नहीं होती है, और यदि कभी लम्बे समय से वर्षा ना हो रही हो तो आवश्यकतानुसार सिचाई करे अगेती फसल जो की February से March के महीनो में किये जाते है उहने 15 से 20 दिन के अन्तराल में सिचाई करने के ज़रूत होती है |

रोग नियंत्रण /  Disease Prevention

सेम की खेती करने के लिए सेम के पौधों पर होने वाली रोगों की जानकारी रखना बहुत ही ज़रूरी होता है | सेम के पौधों पर किट बहुत जल्दी हमला करते है जिसका हर्जाना किसानो को उठाना होता है |
सेम के पौधों को नुकशान पहुचाने वाले कुछ कीटो के नाम कुछ इस प्रकार है |

  1. बीन बीटल (Bean Beetle) :- यह किट ताम्बे रंग का होता है, इसके शरीर का cover काफी hard होता है और उन पर काले रंग के 16 निशान होते है | Bean Beetle पौधे के soft part को खा कर नष्ट कर देते है, जिसके कारण पौधे का growth रुक जाता है |
    इस रोग के रोगथाम के लिए नीम का काढ़ा और गौमूत्र को माइक्रो झाइम में मिला कर इसके मिश्रण को 250 gram प्रति pump में मिला कर छिडकाव करने से पौधों को लाभ मिलता है |
  2. चूर्णी फफूंदी : यह रोग पौधों के जड़ो में फफूंदी लगने के कारण होती है और धीरे धीरे यह पुरे पौधे में फैलने लगता है | इस बीमारी के वजह से पत्तियां पिली पड़ कर सूखने लगती है, जिसके कारण फलो की कलि बहुत ही छोटे आकर के हो जाती है |
    इस रोग को दूर करने के लिए 40 से 50 दिन पुराना 15lit गौमूत्र को ताम्बे के बर्तन में डाल कर उसमे 5 kg धतूरे के पत्तियां तथा धतूरे के जड़ को इतना उबाले की उनमे सिर्फ आधा (7.5lit) गौमूत्र बच जाये | इस मिश्रण को ठन्डे होने के बाद इसे छान कर इसे 3 liter प्रति pump डाल कर पौधों पर छिडकाव करे
  3. बीज का चैंपा – यह एक छोटा किट होता है जो की पत्तो और पौधों के विभिन भागो से रस को चूसने लगता है जिसके कारण फुल और इसके फल को काफी नुकशान होता है |इस किट से बचने के लिए गौमूत्र में नीम और माइक्रो झाइम को अच्छे से मिला कर इसे पौधों में छिडकाव करने से पौधों को इस रोग से बचाया जा सकता है |

उपज

अक्सर ये देखा जाता है की अगर पोधो की देखरेख सही से की गई तो सेम का production 60 से 80 qq/‎ha तक हो सकती है |

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