Shani Dev ji ki Vrat Katha aur Puja Vidhi – शनि देव

By | June 6, 2016

जानिए आप भी भगवान शनि देव जी का व्रत स(Lord Shani Dev Vrat Katha aur Puja Vidhi) और पूजा विधि कैसे घर पर कर सकते हैं | Janiye Shri Shani Bhagwan ke 10 naam aur Sadi Sati ke bare mein. शनिवार को भगवान शनि की अराधना की जाती है | कहा जाता है की सभी भगवानो में से शनि भगवान सबसे ज्यादा घातक है, इनकी नजर जिस मनुष्य पर पड़ती है वह अपने सुख, शांति, व्यापार आदि खो देता है और खुद भी अव्यवस्थित और अस्वस्थ हो जाता है | ये भी माना जाता है की भगवान शनि जिसके जीवन में आते है तो जल्द नहीं छोड़ते |

Shani Dev

Shani Dev ji hamare karmo (Karma) ke hisab se saja aur dand dete hain. Isliye hame hamesha acche marg par chalte hue galat chijon se bachna chahaiye.

शनिदेव का मनुष्य के जीवन में प्रभाव / Affect of Shani Sadi Sati

Shanidew ka prabhaw manushya ke jivan me karmo ki hisab se padta hai aur ise kai bar Shani Sadesati ka prahav bhi bola jata hai. Pure life mein Shanidev ji ka prahav 3 baar aata hai, so ki is prakar hai:

मुख्यतः शनिदेव का प्रभाव मनुष्य जीवन में तीन बार आता है |

  1. जब मनुष्य बच्चा होता है और वह अपने माता पिता के आश्रय में होता है |
  2. जब मनुष्य बड़ा होता है और वह अपनी शिक्षा दीक्षा ग्रहण करता है |
  3. शनिदेव का तीसरा प्रभाव मनुष्य के जीवन को अस्त व्यस्त कर देता है जब वह गृहस्त जीवन को व्यतीत करता है |

इन तीन के पश्चात अगर किसी मनुष्य के जीवन में आता है तो वह अपनी सभी मोह माया से हमेशा के लिए दूर हो जाता है और उस व्यक्ति का अंत हो जाता है |

Shani Bhagwan ji ki Puja Vidhi

Jab bhi aap Shri Shani Dev ji ki puja karne jaa rahe ho to niche diye gaye tips ko dhyan mein rakh kar aap Shani dev ki puija vidhi tan, man aur dhan se kar sakte hai. To aaiye aaj jante hai kaise aap bhi Sree Shanidev ki ghar par pooja kar sakte hain:

  • शनिवार का व्रत स्त्री या पुरुष कोई भी कर सकता है | इस व्रत को आरम्भ करने का सबसे उचित समय श्रावण मास के श्रेष्ठ शनिवार है | इस दिन से शुरुआत का हमे विशेष लाभ प्राप्त होता है |
  • जो इस व्रत का पूजा कर रहा है वह स्नान के पश्चात पीपल पेड़ या शमी पेड़ के नीचे गोबर से लीप ले और वहा बेदी बनाए और कलश और शनि देव की मूर्ति को स्थापीत करे |
  • तत्पश्चात शनिदेव के प्रतिमा को पंचामृत से स्नान कराए, और प्रतिमा पर काले पुष्प, अष्टांग धुप, दीप, प्रसाद आदि से शनिदेव का पूजन करे |
  • शनिदेव के पूजन के समय इनके इन दस नामो का उच्चारण करे – कोणास्थ, पिंगलो, बभ्रु, कृष्णों, रौद्रोतको, यम, सौरि, शनैश्चर, मन्द, पिप्पला |
  • शनिदेव के पूजा के पश्चात शमी या पीपल पेड़ में सूत (धागा) लपेटते हुए सात परिक्रमा करे और साथ ही पेड़ की भी पूजा करे |
  • इसके उपरांत हाथ में काले रंग का चावल और फूल ले कर शनिवार व्रत कथा को सुने, कथा के बाद शनिदेव की आरती करे और प्रसाद बाटे |
  • शनिवार व्रत कथा कहने वाले को दान दे और साथ ही उड़द, गुड, लोहा, तिल, जौ, तेल और काले वस्त्र का दान करे |
  • महीने के पहले शनिवार को उड़द का भात, दुसरे शनिवार को खीर, तीसरे शनिवार को खजला और अंतिम शनिवार को घी और पूरी से शनिदेव का भोग लगाए |

शनिवार के व्रत करने वाले यह बात अवश्य ध्यान में रखे की शनिवार व्रत की पूजा शुर्योदय से पूर्व किया जाता है |


और हाँ, आप हनुमान जी की पूजा विधि को यहाँ पर विस्तार में पढ़ सकते हैं |

शनिदेव के 10 नाम / Shri Shani Dev ji ke 10 Name

Niche diye gaye Shanidev ji ke anya 10 naam se bhi jana jata hai. To chaliye jante hai Shani dev ke 10 name in Hindi and English:

Sr.No. Name in Hindi Name in English
1 कोणास्थ Konasth
2 पिंगलो Pinglo
3 बभ्रु Babhru
4 कृष्णों Krishno
5 रौद्रोतको Raudrotako
6 यम Yam
7 सौरि Sauri
8 शनैश्चर Shanaishchar
9 मन्द Mand
10 पिप्पला Pippla

Shani Dev ji ki Khata

Jaisa ki hum sabhi jante hai ki puja karne ke baath iswar ki katha suni aur sunai jati hai. To chaliye aaj jante hai Shri Shani Maharaj ki khata aur kahani detail mein, jise aap ghar par bhi padh sakte hain. Niche diye gayi Shanivar vrat ki katha puri hindi mein di hui hai:

एक समय समस्त प्राणियों का हित चाहने वाले मुनियों ने नैमिषाराणय वन में एक सभा की | उस समय महर्षि व्यासजी के शिष्य सूतजी शिष्यों के साथ श्री हरी का स्मरण करते हुए वहाँ पर आये | समस्त शास्त्रों के ज्ञाता सूतजी को आता देखकर महातेजस्वी शौनकादी मुनि उठकर खड़े हो गये और सूतजी को नमस्कार किया और सुंदर उच्च आसन दे पाद्ध अर्ध्य से पूजन किया | मुनियों द्वारा दिए गये आसन पर श्री सूत बैठ गये | श्री सूतजी से शौनक आदि मुनियों ने विनयपूर्वक पूछा – हे मुनि ! इस कलियुग में श्रीहरी की भक्ति किस प्रकार से होगी ? सभी प्राणी पाप से तत्पर होंगे, मनुष्यों की आयु कम होगी, ग्रह नष्ट, धनरहित और अनेको पीड़ायुक्त मनुष्य होंगे | हे सूतजी ! पूण्य की प्राप्ति मनुष्य को अति परिश्रम से होता है | इस कारण कलियुग में कोई भी मनुष्य पूण्य नहीं करेगा | पूण्य के नष्ट होने से मनुष्यों की प्रकृति पापमय होगी, इस कारण तुच्छ विचार करने वाले मनुष्य अपने वंश सहित नष्ट हो जाएँगे | हे सूतजी ! जिस तरह थोड़े ही परिश्रम, थोड़े धन से, थोड़े समय में पूण्य प्राप्त हो, ऐसा कोई उपाय हम लोग को बतलाइये जिसके उपदेश से मनुष्य पूण्य और पाप करता है और उसके पुण्य और पाप का वही मनुष्य भागी होता है, यह शास्त्र का निर्णय है |

Baki Shani Dev ki Khata aap Hindi mein niche diye gaye PDF file ko download kar ke apne computer ya mobile phone par padh sakte hain.

Download Shanivar Vrat Kahta

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