शिमला मिर्च की वैज्ञानिक खेती कैसे करे – पूरी जानकारी

By | August 4, 2016

जानिए कैसे आप शिमला मिर्च की खेती कर के लाखों कमा सकते है?  आखिर कैसे शिमला मिर्च की उन्नत farming India में करे,  कैसे की जाती है, इसके किस्मे, आम रोग और बचाव के उपाय | Shimla mirch की खेती को अगर किसान भाई Agricultural scientists द्वारा बताए गए तरीके से करते है तो उन्हें बहुत अच्छा profit कमा सकते है । यदि शिमला मिर्च की उन्नतशील किस्मो की खेती की जाए तो किसानो को करीब-करीब 30 से 50 क्विंटल per acer फसल की प्राप्ति हो सकती है। इसके अलावे शिमला मिर्च की खेती हरियाणा, पंजाब, झारखण्ड, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक आदि प्रदेशो में अच्छी तरह से किया जा सकता है |  तो चलिए जानते है कैसे Shimla mirch की खेती को scientific way से किया जाता है और कैसे आप इसे profitable business बना सकते हैं |

Shimla Mirch Farming Infomration

शिमला मिर्च के खेती कैसे शुरु करे / How to start Capsicum Farming

Yah ek aisa business hai jisme aap 2 se 4 months mein accha munafa kama sakte hai. Agar aap sahi tarike se Shimla mirch ki unnat kheti karte hai to aapko 4 mahine ke andar he accha khasa profit de sakta hai. Aur sabse acchi baat Shimla mirch ki farming mein yah hai ki ismein punji kam lagti hai aur usse bhi acchi baat yah hai ki iski kheti ke liye watawaran aur demand hamare India mein kafi hai. To chaliye jante hai kaise aap bhi Shimla mirch ka farming kar ke India mein he lakhon mein kama sakte hai:

शिमला मिर्च के लिए भूमि का चयन 

आप जब भी इसकी खेती करने जा रहे हो तो सबसे पहले आपको उचित भूमि का चयन करना होगा ताकि अच्छी पैदावार हो | शिमला मिर्च  की खेती हेतु चिकनी दोमट मिट्टी जिसमे जल निकासी का अच्छा प्रबंध किया गया हो, उसे हीं सबसे best माना जाता है। इसकी खेती के लिए भूमि का PH value 6 से 6.5 होना चाहिए। इसके अलावा बलुई दोमट मिट्टी में भी शिमला मिर्च की खेती को किया जा सकता है, लेकिन तब जब मिट्टी में अधिक खाद व उसके पौधे का समय समय से सिंचाई का प्रबंधन अच्छे से किया गया हो ।

शिमला मिर्च के लिए जलवायु

शिमला मिर्च की खेती के लिए नर्म आर्द्र जलवायु की आवश्यकता होती है । शिमला मिर्च के फसल की अच्छी प्राप्ति हेतु और इसके अच्छे वृद्धि हेतु कम से कम 21 से 250 C तक का temperature  अच्छा रहता है। ज्यादा पाला से शिमला मिर्च के फसल को नुकसान हो सकता है। ठंड के समय शिमला मिर्च के पौधों पर फूल कम लगते है, इसके फलो का size भी छोटा और टेढ़ा मेढ़ा हो जाता है ।

शिमला मिर्च की उन्नत किस्मे / Types of Capsicum

शिमला मिर्च की उन्नत किस्मों का नाम कुछ इस प्रकार से है :-

  • अर्का गौरव,
  • अर्का मोहिनी,
  • कैलिफोर्निया वांडर,
  • ऐश्वर्या,
  • अलंकार,
  • हरी रानी,
  • पूसा दिप्ती,
  • ग्रीन गोल्ड, आदि ।

खाद प्रबंधन 

शिमला मिर्च की खेती के लिए खेत की तैयारी करते time हीं खेत में करीब 25 tons गोबर की सड़ी हुई खाद को मिला देना होता है। उसके बाद पौधों के रोपाई के वक्त 60 kg nitrogen, 80 kg sulfur और लगभग 60 kg potash को डाला जाता है। 60 kg nitrogen को half half कर के दो बार मे में डाला जाता है एक पौधों की रोपाई के time और फिर दूसरा उसके 55 days के बाद ।

बीज बोने का समय व बीजोपचार 

शिमला मिर्च के बीज को साल में 3 बार बोया जा सकता है first June से July तक, second  august से September तक और third November से december तक। शिमला मिर्च के बीजो (seeds) की बुआई कियारियों में करने से पूर्व उसे 2.5 kg थाइरम या बाविस्टिन से treated करके हीं बोना चाहिए। बीज बोने समय प्रत्येक कतार की distance 10 cm होनी चाहिए। बीज को कम से कम 1 cm गहरी नाली बनाकर उसमे बोया जाता है । जब बीज की बुआई पूरी हो जाये तो उसके बाद उसे गोबर की खाद और मिट्टी से ढंक कर उसकी हल्की सी सिंचाई कर दें । 

पौध रोपण का समय और विधि 

शिमला मिर्च के बीज को बोने के बाद जब उससे पौधा निकल आए तो फिर उस पौधे को खेत में रोपा जाता है । पौधे को रोपने का समय july से august, September से October और december से January तक होता है । लगभग 15 cm लम्बा और 3-4 पत्तियों वाले पौधे को रोपने के प्रयोग में लाया जाता है। शिमला मिर्च के पौधे को शाम के समय में रोपा जाता है। पौधों से पौधों का distance  60-45 cm तक की होनी चाहिए। पौधे को रोपने से पहले उसके जड़ को एक liter पानी में 1 gram बाविस्टिन को घोल कर उसमें डुबो कर ½ hour के लिए छोड़ दें ।

सिंचाई प्रबंधन 

पौधे को रोपने के फ़ौरन बाद हीं खेत की सिंचाई कर देनी चाहिए। शिमला मिर्च की खेती में कम सिंचाई या फिर जरुरत से ज्यादा सिंचाई कर देने से उसके फलो को हानी पहुंच सकता है। गर्मी में 1 week और ठंड में 10 से 15 days के मध्यान्तर पर खेत की सिंचाई करना चाहिए। बरसात में अगर खेत में पानी जमने लगे तो पानी के निकालने का जल्द से जल्द प्रबंध करे ।

निराईगुड़ाई 

पहली निराई गुड़ाई पौधे को रोपने के 25 day बाद और दूसरी निराई गुड़ाई कम से कम 45 day के बाद कर के खरपतवार को साफ़ कर देना चाहिए। पौधे को रोपने के ठीक 30 days बाद उस पर दोबारा मिट्टी चढ़ा दिया जाता है ताकि पौधे मजबूत रहे और गिरे नही।

रोग व कीट नियंत्रण 

शिमला मिर्च में लगने वाले कीटो का नाम कुछ इस प्रकार से है :-

  • माहो,
  • थ्रिप्स,
  • सफेद मक्खी और
  • मकडी ।

ऊपर दिए गए सभी कीटो से बचने के लिए लगभग 1 liter पानी में डायमेथोएट या मेलाथियान का को घोल तैयार कर हर 15 day के interval पर 2 बार छिड़काव करे ।

आम रोग / Common Disease

शिमला मिर्च में लगने वाले रोगों का नाम कुछ इस तरह से है :-

  • आद्रगलन,
  • भभूतिया रोग,
  • उकटा,
  • पर्ण कुंचन और
  • श्यामवर्ण ।

आर्द्रगलन रोग यह रोग नर्सरी Stage में हीं लगता है इसलिए रोग से बचने के लिए बीज बुआई के time बीजो का treated किया जाना चाहिए ।

भभूतिया रोग यह रोग mostly गर्मी में लगता है । इस रोग से पत्तियों पर white चूर्ण जैसे spot  पड़ जाते है उसके बाद पत्तियां yellow हो कर सूखने लगती है । इससे बचने के लिए 0.2% के घोल को हर 15 days के interval पर कम से कम 3 बार छिड़काव करना होगा ।

जीवाणु उकठा  इस रोग से फसल मुरझाकर सूखने लगता है । इस रोग से बचने के लिए पौधों की रोपाई से पूर्व हीं लगभग 15 kg ब्लीचिंग पाउडर को per hectare के दर से भूमि में mix कर देना चाहिए ।

पर्ण कुंचन इस रोग के प्रकोप से पत्ते सिकुड़ कर छोटे हो जाते है साथ हीं इसके पत्ते हरे रंग से भूरे रंग के हो जाते है । इस रोग के रोकथाम हेतु बुवाई से पूर्व लगभग 10 gram कार्बोफ्यूरान-3G को Per square meter के हिसाब से भूमि में मिला दें। उसके बाद पौधे को रोपने के लगभग 20 days बाद डाइमिथोएट 30 ई.सी. को 1 ml लीटर पानी में घोल कर उसका छिड़काव करना चाहिए । इसका छिड़काव हर 15 days के मध्यान्तर पर करते रहना चाहिए ।

श्यामवर्ण  रोग से पत्तियो पर काले धब्बे होने लगते है और फिर आहिस्ता आहिस्ता इसके शाखाएं भी सूखने लगती है। इस रोग से प्रभावित फल भी झड़ने लगते है। इससे बचने के लिए उपचारित किया हुआ बीजों का ही use किया जाना चाहिए । इसके अलावा 0.2% मेन्कोजेब या फिर डायफोल्टान का घोल बनाकर हर 20 दिन के interval 2 बार छिड़काव करना चाहिए ।

फलो की तुड़ाई 

पौधों को रोपने के ठीक 60 से 70 days के बाद शिमला मिर्च के फल तोड़ने के लिए तैयार हो जाते है । इसके फलो की तुड़ाई लगभग 100 से 120 days तक चलता रहता है।

बाजार भाव / Market Rate

Waise to market mein Shimla mirch ka rate upar niche hote rahta hai par amuman ya Rs 40 se le kar Rs 120 tak bikta hai. Metro cities mein to yah aasani se Rs 80 se 150 tak sell hota hai. Agar aap Shimla mirch ka business karne ki soch rahe hai to aap chahe to Sabji mandi mein sidhe sell kar sakte hai jahan apko thoda kam rate milega jo ki Rs 30 se lekar Rs 60 tak per kg mil sakta hai. Wahi agar aap kisi mall mein apna maal sidhe sell karte hai to aapko Rs 40 se le kar Rs 80 tak mil sakta hai.

Material First Year Second Year
Seeds Rs 1,000 Rs 1,000
Nursery Formation Rs 30,000 Rs 20,000
Green House Structure Rs 1,50,000 Rs Nil
Fertilizer and Manure Rs 10,000 Rs 10,000
Irrigation Rs 1,00,000 Nil
Labour Costing Rs 35,000 Rs 35,000
Land Formation Rs 50,000 Rs 10,000
Miscellaneous Rs 50,000 Rs 15,000
Total Rs 4,26,000 Rs 91,000
Production in Kg Rate Total Sales
15,000  Kg Rs 50 Rs 7,50,000

Total Expenses = Rs 4,26,000

Total Sales = Rs 7,50,000

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Total Profit = Rs 3,24,000

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तो अगर आपके पास 1 acer का जमीन है तो आप उन्नत खेति कर के आप 1 साल में 3 लाख से  से 3.50 लाख तक कम सकते है | अगर मान भी लिया जाये की पहले साल में उतना production नहीं भी हो तो कम से कम आप 2 से 2.50 लाख तो कम ही सकते है और दुसरे साल से कम से कम 4 से 5 लाख आसानी से शिमला मिर्च की खेती करते हुए कम ही सकते हैं |

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