Hanuman Chalisa in Hindi and Meaning – हनुमान चालीसा

By | February 25, 2017

हम सभी ने कभी न कभी श्री हनुमान चालीसा तो पढ़ा ही होगा पर क्या आपको इसका मतलब मालूम है ? जानिए Hanuman Chalisa का meaning in Hindi में और पूरा lyrics अपनी भाषा में पढ़े | चालीसा का अर्थ चालीस दोहों का समूह होता है, संत तुलसीदास के द्वारा भी चालीसा की रचना किया गया है जिसमे भगवान श्री राम भक्त हनुमान के के गुणों और उनके कार्यो का वर्णन किया गया है | यह एक प्रकार की लघु रचना है जिसमे हनुमान के सभी गुणों को बखूबी बतलाया गया है | इसमें हनुमान के साथ साथ श्री राम के चरित्र को बड़े सी सरल रूप से बतलाया गया है |

Shree Hanuman Chalisa Lyrics and Meaning in Hindi

आज हर कोई अपनी सुख समृधि और स्वास्थ्य के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करता है परन्तु क्या पाठ करने वालो को इस बात की खबर है की उनके द्वारा की जा रहे पाठ का हिंदी अर्थ क्या है ? अगर नहीं तो आज हम आपको अपने रचना के माध्यम से हनुमान चालीसा के अर्थ को समझाते है |

हनुमान चालीसा पढने का मुख्य कारण होता है श्री हनुमान जी को प्रसन्न करना और विधिवत हनुमान जी की पूजा कर उनका ध्यान लगाना | To chaliye aaj jante hai Hanuman Chalisa in Hindi ka kya meaning hota hai aur pure dohe ke saath taki aapo iska arth ache tarah se samajh aaye aur aap bhakti purwak dhyan laga sake:

हनुमान चालीसा दोहा और उसका अर्थ / Shree Hanuman Chailsa meaning in Hindi

श्रीगुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि ।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि ।।

अर्थ – श्री गुरु महाराज के चरणों के धूलि से अपने शरीर और मन को स्वच्छ करके धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाले श्री रघुवीर अर्थात श्री राम के मधुरता और उनके ख्याति का वर्णन करता हूँ |

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार ।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार ।।

अर्थ – हे पवन कुमार आपको पता है की मै शारीरिक निर्बल हु | इसलिए मुझे शारीरिक बल दीजिए, सद्बुद्धि दे और साथ ही मेरे सभी दुखो का नाश करे |

चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर,
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥

अर्थ – हनुमान की जय हो ! हे हनुमान आपके पास अथाह ज्ञान और गुण है | हे अपिश्वर आपके ख्याति तीनो लोक में प्रचलित है |

राम दूत अतुलित बल धामा,
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा ॥२॥

अर्थ – श्री राम के दूत जिन्हें अंजनी के पुत्र और पवनसुत के नाम से जानते है उनके समान बलवान दूसरा कोई नहीं है |

महावीर विक्रम बजरंगी,
कुमति निवार सुमति के संगी ॥३॥

अर्थ – हे महाबीर, बजरंग बली ! आपका पराक्रम अपरम्पार है | आप ख़राब और कुरूप बुद्धि वालो के साथ छोड़ कर अच्छे बुद्धि वालो के साथी और मित्र होते है |

कंचन बरन बिराज सुबेसा,
कानन कुंडल कुँचित केसा ॥४॥

अर्थ – हे हनुमान आपका सौदर्य अपरम्पार है आपके त्वचा सुनहले रंग के है, सुन्दर वस्त्र, कानो में कुंडल एवं आपके बाल घुंघराले है |

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे,
काँधे मूँज जनेऊ साजे ॥५॥

अर्थ – आपके हाथ में बज्र और ध्वजा है और आपके कंधे पर मूंज के जनेऊ है जो आपको सुसोभित कर रखे है |

शंकर सुवन केसरी नंदन,
तेज प्रताप महा जगवंदन ॥६॥

अर्थ – हे भगवान शंकर के अवतार केसरी के पुत्र आपके पराक्रम और यश का गुणगान पुरे संसार में होता है |

विद्यावान गुनी अति चातुर,
राम काज करिबे को आतुर ॥७॥

अर्थ – आप सबसे अधिक बुद्धिमान है, आपमें कई गुण है और आप चतुर भी है और आप हमेसा श्री राम के कार्य को करने के लिए तैयार रहते है |

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया,
राम लखन सीता मन बसिया ॥८॥

अर्थ – कही भी हो रहे श्री राम चरित में आनंद रस लेते है और आपके मन हृदय में हमेशा श्री राम, सीता के साथ लक्ष्मण बसे होते है |

सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा,
बिकट रूप धरि लंक जरावा ॥९॥

अर्थ – आप अपनी बुद्धिमता के साथ माता सीता को अपना छोटा रूप को दिखाया और अपने विराट रूप में लंका को जलाकर राख किया |

भीम रूप धरि असुर सँहारे,
रामचंद्र के काज सँवारे ॥१०॥

अर्थ – हे भगवन, आपने अपने विकराल रूप को धारण कर के राक्षसों को मारा और श्री राम के उद्देश्य को सफल बनाने में सहायक बने |

लाय संजीवन लखन जियाए,
श्रीरघुबीर हरषि उर लाए ॥११॥

अर्थ – हिमालय से संजीविनी बूटी लाकर लक्ष्मण के पुनः जीवन दिया, आपके इस कार्य से प्रशन्न होकर श्री राम आपको अपने गले से लगा लिए |

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई,
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥१२॥

अर्थ – श्री राम ने आपकी बहुत तारीफ किए और उन्होंने आपसे कहा की, “तुम मेरे प्यारे भाई भरत के समान भाई हो” |

सहस बदन तुम्हरो जस गावै,
अस कहि श्रीपति कंठ लगावै ॥१३॥

अर्थ – तुम्हारा यश सभी लोगो के मुख से सराहनीय है, ऐसा कहकर श्री राम आपको ह्रदय से लगा लिए |

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा,
नारद सारद सहित अहीसा ॥१४॥

अर्थ – श्री सनक, श्री सनातन, श्री सनन्दन, श्री सनत्कुमार आदि मुनि ब्रह्मा, नारद जी, सरस्वती जी, शेषनाग जी आदि देवता आपका गुणगान करते है |

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते,
कवि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥१५॥

अर्थ – यमराज, कुबेर, चारो दिशाओ के रक्षक, कवि, विद्वान, पण्डित आदि कोई भी आपके यश का वर्णन पुर्णतः नहीं कर सकता |

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा,
राम मिलाय राज पद दीन्हा ॥१६॥


अर्थ – आपने एक उपकार सुग्रीव पर किया | सुग्रीव को श्री राम से मिलवाए और उन्हें उनका राज वापस दिलाए |

तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना,
लंकेश्वर भये सब जग जाना ॥१७॥

अर्थ – इस बात को सभी जानते है की आपके द्वारा दिए गये उपदेशो को बिभीषण ने माना और इसी कारण बिभीषण लंका के राजा बने |

जुग सहस्त्र जोजन पर भानू,
लिल्यो ताहि मधुर फ़ल जानू ॥१८॥

अर्थ – हजारो योजन दुरी पर मौजूद सूर्य पर पहुचने के लिए लोगो को वर्षो लग गए परन्तु आपने बचपन में इसे मीठे फल समझ कर बड़े आसानी से निगल गये थे |

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं,
जलधि लाँघि गए अचरज नाहीं ॥१९॥

अर्थ – इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं की आपने प्रभु श्री राम के द्वारा दी गई अंगूठी को अपने मुख में रख कर समुन्द्र को लाँघ गए |

दुर्गम काज जगत के जेते,
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥२०॥

अर्थ – संसार में होने होने वाले सभी कठिन काम आपके नाम मात्र से आसानी से हो जाते है |

राम दुआरे तुम रखवारे,
होत ना आज्ञा बिनु पैसारे ॥२१॥

अर्थ – श्री राम के द्वार के आप रखवाले है आपके इजाजत के बिना कोई उसमे प्रवेश नहीं कर सकता अर्थात श्री राम के दर्शन के लिए आपको प्रसन्न करना अति आवश्यक है |

सब सुख लहैं तुम्हारी सरना,
तुम रक्षक काहु को डरना ॥२२॥

अर्थ – जो भी भक्त आपके आश्रय में आता है और आनंद को प्राप्त करता है, आप तो सभी के रक्षक है तो आपके शरण में किसी का डर नहीं रहता |

आपन तेज सम्हारो आपै,
तीनों लोक हाँक तै कापै ॥२३॥

अर्थ – आपमें मौजूद वेग को आपके शिवाय कोई नहीं रोक सकता, आपके गर्जन से तीनो लोग काँप उठता है |

भूत पिशाच निकट नहिं आवै,
महावीर जब नाम सुनावै ॥२४॥

अर्थ – श्री महावीर अर्थात बजरंग बलि के नाम मात्र से भुत, पिचाश आस पास नहीं रहते |

नासै रोग हरे सब पीरा,
जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥२५॥

अर्थ – भगवान श्री वीर हनुमान के लगातार जाप करे से शरीर के रोग, पीड़ा सभी नष्ट हो जाते है |

संकट तै हनुमान छुडावै,
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥२६॥

अर्थ – श्री हनुमान आप उन सभी को संकट और पीड़ा से मुक्त करते है जो अपने ध्यान में आपको अपने मन में, काम को करते समय, बोलते समय रहते हो |

सब पर राम तपस्वी राजा,
तिन के काज सकल तुम साजा ॥२७॥

अर्थ – सबसे श्रेष्ट तपस्वी राजा श्री राम के सभी कार्यो को आपने बड़े सहजता के साथ संपन्न किया है |

और मनोरथ जो कोई लावै,
सोई अमित जीवन फल पावै ॥२८॥

अर्थ – आपकी कृपा जी किसी भक्त के ऊपर हो जाती है उसकी द्वारा की गई इक्षा पूरी होती है एवं इसका फल की सीमा उसके जीवन में नहीं होती |

चारों जुग परताप तुम्हारा,
है परसिद्ध जगत उजियारा ॥२९॥

अर्थ – चारो युग में आपके प्रताप का यश रहेगा और आपके ख्याति से जगत प्रकाशमय रहेगा |

साधु संत के तुम रखवारे,
असुर निकंदन राम दुलारे ॥३०॥

अर्थ – हे श्री राम भक्त हनुमान आप सज्जनों के रखवाले है और दुष्टों के नाश करने वाले है |

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता,
अस बर दीन जानकी माता ॥३१॥

अर्थ – आपको आपके माता जानकी के द्वारा ऐसा वरदान प्राप्त ही जिससे आप आठ सिद्धि और नौ निधि को दे सकते है |

राम रसायन तुम्हरे पासा,
सदा रहो रघुपति के दासा ॥३२॥

अर्थ – हे भगवन आप हमेशा श्री राम के शरण में रहते है और आपके पास राम नाम की औषधि है जिससे आपके  पास कभी बुढापा और असाध्य रोग का नाश करता है और आपको स्वस्थ रखता है |

तुम्हरे भजन राम को पावै,
जनम जनम के दुख बिसरावै ॥३३॥

अर्थ – आपके गुणगान और भजन से श्री राम की प्राप्ति होती है, जिससे जन्म जन्मान्तर के कष्ट दूर होते है |

अंतकाल रघुवरपुर जाई,
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥३४॥

अर्थ – अपने अंत काल में लोग श्री रघुवर के धाम को जाते है | और अगर पुनः जन्म होता है तो भगवन की भक्ति कर राम भक्त कहलाएँगे |

और देवता चित्त ना धरई,
हनुमत सेई सर्व सुख करई ॥३५॥

अर्थ – हे भगवन आपके भक्ति सेवा मात्र से मनुष्य के सभी कष्टों समाप्त हो जाते है और उन्हें किसी अन्य भगवान के स्मरण करने की आवश्यकता नहीं रहती |

संकट कटै मिटै सब पीरा,
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥३६॥

अर्थ – आपके सुमिरन मात्र से सारे कष्ट नष्ट हो जाते है |

जै जै जै हनुमान गोसाई,
कृपा करहु गुरु देव की नाई ॥३७॥

अर्थ – हे भगवन  आपकी जय हो ! जिस प्रकार आपकी कृपा दृष्टि मेरे गुरु जी पर बनी हुई है उसी प्रकार अपनी कृपा दृष्टि मेरे पर भी कीजिए |

जो सत बार पाठ कर कोई ।
छूटहिं बंदि महा सुख होई ॥३८॥

अर्थ – जो हनुमान चालीसा का पाठ सौ बार करता वह सभी बन्धनों से आजाद हो जाता है और उसे सुख की प्राप्ति होती है |

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥३९॥

अर्थ – जो भी इस हनुमान चालीसा का पाठ करेगे उसे सिद्धि की प्राप्ति होगी |

तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय मह डेरा॥४०॥

अर्थ – तुलसीदास शुरू से ही प्रभु श्री राम के भक्त थे, इसलिए आप उनके ह्रदय में निवास कीजिए |

दोहा

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥

अर्थ – हे संकट मोचन पवन कुमार हनुमान ! आप मंगल और आनन्द रूप हो । श्री राम, सीता और लक्ष्मण सहित आप मेरे हृदय में निवास कीजिए ।

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