Soyabean ki Vaigyanik Kheti Kaise Kare – सोयाबीन

By | January 15, 2016

Hamare Kisan bhai Soyaben ki scietific tarike se kheti kar ke accha kama sakte hai. To chaliye aaj aapko dete hai सोयाबीन की खेती ki jaankari taki aap unnat kehti kar sake | सोयाबीन की खेती अगर वैज्ञानिक तरीके से की जाये तो इस खेती से 12 से 15 क्विंटल प्रति एकड़ तक का उत्पादन किया जा सकता है । किसानो को इस खेती में जो भी लागत लगता है उसे घटाने के बाद उन्हें कम से कम 15 से 20 हजार प्रति एकड़ का फायदा हो सकता है ।  इसी तरह अगर आपके पास 4 से 5 एकड़ तक जमीन हो तो आप आसानी से 60,000 से 80,000 तक कम सकते है और वो भी केवल 4 महीनो के अन्दर | तो चलिए जानते है कैसे करे सोयाबीन की खेती ।

Soyabean ki Harvesting (Kheti) kaise kare

सोयाबीन की खेती की जानकारी / Soyabean Farming

Agar aap Soyabean ki sahi tarike se kheti karte hai to aap accha khasa profit kama sakte hain. Jaruri yah hai ki Soyabean ki farming karne se pahle scientific tarike se suruwat ki jaye. To chaliye jante hai soyaben ki kheti kasie kare taki aapko aacha munafa ho:

भूमि का चयन व तैयारी / Preparation of Land

वैसे तो सोयाबीन की खेती केवल हल्की रेतीली भूमि व हल्की भूमि को छोड़ कर हर तरह के भूमि पर किया जा सकता है । लेकिन इसके खेती के लिए चिकनी दोमट भूमि जिसमे पानी निकलने के लिए नालियों की अच्छा प्रबन्ध हो सबसे best होता है । खेत करने से पूर्व भूमि की जुताई कम से कम 8 से 10 inch गहरी करनी चाहिए । 3 साल में एक बार हल के द्वारा खेत की जुताई करनी चाहिए ताकि खेत के सारे  खरपतवार , किट व रोग नष्ट हो जाये ।

जलवायु

सोयाबीन की खेती करने के लिए खरीफ मौसम सबसे best होता है। Last June से July के पहले  सप्‍ताह तक इसकी खेती करने से अच्छे फसल की उत्पादन होती है । बीज बोने वक्त अच्‍छे अंकुरण के लिए भूमि में 10 cm गहराई तक नमी होना चाहिए। 

बीज रोपन 

सोयाबीन की खेती करने वक्त बिज को कतारों में बोना चाहिए। छोटे दानो के बीज को बोने वक्त  कतारों से कतार की दूरी 30cm और बड़े दाने  वाले बीज की दूरी 45 cm होनी चाहिए । 20 कतारों तक बुआई हो जाने के बाद जल निकासी के लिए कुछ जगह को छोड़ देना चाहिए। बीज को लगभग 3 cm गहरा बोना चाहिए। बीज और खाद दोनों को अलग अलग बोने से अंकुरण क्षमता प्रभावित नहीं होती है । 

सिंचाई 

सोयाबीन वर्षा ऋतू (खरीफ मौसम) का फसल है इसलिए इसे ज्यादा सिंचाई की जरूरत नही पड़ती है। september में फलियों में दाना आने वक्त अगर खेत में नमी की कमी लगे तो आवश्‍यकतानुसार एक या दो बार हल्‍की सिंचाई कर देनी  चाहिए । 

खाद प्रबंधन / 

अच्‍छी सड़ी हुई गोबर की खाद 18 से 20 टन प्रति हेक्‍टर के साथ जैविक खादों का उपयोग सोयाबीन के उत्पादन को बढ़ा देता है । बीज बोते वक्त 20 kg नाईट्रोजन (nitrogen), 60 kg सल्फर(sulphur), 20 kg पोटाश के साथ साथ 20 kg गंधक का प्रति हेक्‍टर के मान से देना चाहिए।

रोग व किट नियंत्रण / Insect Control

पर्णदाग रोग में पत्तियों पर हल्के से गहरे brown color के गोल गोल धब्बे बन जाते है जिससे पत्तियां सुख कर नष्ट हो जाते है । इस रोग से बचाव के लिए कार्बन्डाजिम 50 डब्लू. पी. या थायोफेनेट मिथाइल 70 डब्लू. पी. का 0.5 ग्राम प्रति लीटर की दर से घोल बना कर छिड़काव करें और फिर 15 दिन बाद दूसरा छिड़काव करे ।

अल्टरनेरिय अल्टरनाटा फफूंदी के आक्रमण से पत्तो पर गहरे भूरे से काले रंग के 6-25ml व्यास के धब्बे बनते है जिनपर कई सकेन्द्रीय चक्र बन जाते है । बाद में ये सारे धब्बे एक दुसरे से मिल जाते है और फिर पत्तियों को झुलसा देते है । इससे बचाव के लिए मेन्कोजेब 75 डब्लू. पी. का 2.5 g प्रति लीटर या कॉपर आक्सीक्लोराइड 50 डब्लू. पी. का 2.5 g प्रति लीटर के दर से घोल बना कर छिड़काव करे । 15 दिनों के बाद फिर से दोबारा छिड़काव करे ।

फसल के पकते समय वर्षा होने पर कई प्रकार के फफूंदी के आक्रमण से फलियों पर भूरे लाल स्लेटी काले रंग के कई आकार के धब्बे बनते है । इससे बचाव के लिए कार्बन्डाजिम 50 डब्लू. पी. या थायोफेनेट मिथाइल 70 डब्लू. पी. का 0.5 ग्राम प्रति लीटर की दर से घोल बना कर छिड़काव करें और फिर 15 दिन बाद दूसरा छिड़काव करे ।

विषाणु रोग के कारण से पीला मौजेक, सामान्य मौजेक व कलिका झुलसन रोगों का आक्रमण बढ़ रहा है । इसमें नई पत्तियों पर पीले चितकबरे धब्बे दीखते है । इससे रोह के कारण पौधे का विकास रुक जाता है साथ हीं उनमे फलिया व दाने कम बनते है । इस रोग के नजर आते हीं प्रभावित पौधे को उखाड़ देना चाहिए  । साथ ही किट नियंत्रण के लिए मिथाइल डिमेंटन 25 ई. सी. का 0.75 लीटर प्रति  hectare की दर से छिड़काव करें ।

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