Tanguturi Prakasam – History, Family, Death in Hindi

By | April 14, 2017

जानिए हमारे महान Tanguturi Prakasam के बारे में जिनका जन्म 1872 में हुआ था | जानिए उनकी history, family, photo, education, और death से जुडी जानकारी Hindi में | इनका  birth 23rd august 1872 को गुन्टूर ज़िले के कनपर्ती नाम के एक village  में हुआ था । इनका पूरा नाम टंगटूरी प्रकाशम पंतलु था और लोग इन्हें “टी. प्रकाशम” नाम से भी जानते है। इनके पिता का नाम ‘गोपाल कृष्णैया’ था । वे एक बहुत हीं famous स्वतंत्रता सेनानी कहलाते है साथ हीं ये आंध्र राज्य के first मुख्यमंत्री भी थे। आइये टंगटूरी प्रकाशम के जीवन के बारे में और भी विस्तार से जानते है जैसे की इनकी family, इनका बचपन कैसा था, इन्होने शिक्षा कहाँ से प्राप्त की इत्यादि ।

Tanguturi Prakasam bio in Hindi

परिवार / Family

टंगटूरी प्रकाशम के पिता गोपाल कृष्णन्य अपने गांव के मुखिया थे। बाद में वे नेल्लोर जिले में जा कर बस गए और यहाँ उन्होंने 8 रूपए महीने की नौकरी की । 1880 में जब प्रकाशम केवल आठ साल के थे तभी उनके पिता की मृत्यु हो गई और तीन युवा बच्चों के परवरिश का बोझ उनकी मां पर गिर पड़ा ।  उनकी माँ एक साहसी महिला थी, चूंकि वह अपने भाई पर बोझ नहीं बनना चाहती थी इसलिए वो अपने बच्चों के साथ ओंगोले चली गई और वहीँ मुन्सिफ की अदालत के सामने उसने एक mess खोल कर बड़े परिश्रम से बच्चो का पालन-पोषण किया । 

शिक्षा / Education 

प्रकाशम ने अपनी प्राथमिक शिक्षा नाडूपेटा में की थी । उसके बाद उन्होंने ओंगोल में एक सरकारी माध्यमिक स्कूल में अपनी पढ़ाई जारी रखी । यहीं पर वे अपने गणित के शिक्षक हनुमंत राव नायडू के संपर्क में आये थे जिन्होंने इनके करियर को बानाने में एक अहम भूमिका निभाई थी ।


प्रकाशम ने मद्रास से बैरिस्टर (वकालत) की पढ़ाई भी की थी । अदालत के मामले में मद्रास के अपने पेशेवर दौरे के दौरान, एक बैरिस्टर (वकील) उनके कानूनी कौशल से प्रभावित होकर उन्हें  बैरिस्टर बनने का सुझाव दिया ।  द्वितीय-श्रेणी के वकील के रूप में, प्रकाशम उच्च न्यायालयों के  मामलों का तर्क नहीं दे सकते थे क्योंकि केवल बैरिस्टर को ऐसा करने की अनुमति थी । इसलिए  1904 में वे बैरिस्टर की पढ़ाई के लिए इंग्लैण्ड चले गए।  भारत लौटने पर 1907 में इन्होने मद्रास में बैरिस्टरी शुरू की और जल्द ही वे प्रमुख बैरिस्टरों में गिने जाने लगे । जब वे 29 साल के थे तब राजामुंद्री नगरपालिका के chairman बने ।

भारत में और कई freedom fighter थे जैसे शिवराम राजगुरु, विक्रम साराभाई, और रानी दुर्गावती जिनसे जुडी अधिक जानकारी आप यहाँ पढ़ सकते हैं |

टंगटूरी प्रकाशम और गाँधी जी की भेंट

जब उन्होंने  ने ‘लॉ टाइम्स’ नाम के पत्र का संपादन किया और प्रिवी कौंसिल में मुकदमा लड़ने के लिए इंग्लैण्ड गए तो वहीँ उनकी भेंट पहली बार गाँधी जी से हुई । गाँधी जी के सोच का टंगटूरी  पर बहुत असर हुआ । देश की स्वाधीनता के लिए  प्रकाशम ने अपनी बैरिस्टरी छोड़ कर गाँधी जी के साथ आंदोलन में शामिल हो गए। 1921 से 13 सालो तक प्रकाशम आंध्र प्रदेश में कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रहे । उन्होंने राष्ट्रीय भावनाओं के प्रचार के लिए  ‘स्वराज्य’ नाम का एक दैनिक पत्र भी प्रकाशित किए और 15 साल तक अपने expense से इसे चलाते रहे।

गाँधी जी के साथ आंदोलनों में शामिल होंने के कारण उन्हें जेल भी हुई । साइमन कमीशन के विरोध में किये गए प्रदर्शन पर जब पुलिस द्वारा लाठीचार्ज व गोलाबारी की जा रही थी तब मृत और घायल लोगो को वहां से निकालने के लिए वे आगे बढ़े थे और तभी से उन्हें ‘आंध्र केसरी’ के नाम से भी जाना जाने लगा ।

1937 में वो सी. राजगोपालाचारी के cabinet में revenue minister के रूप में संयुक्त हुए । द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद, वे 1946 में वे संयुक्त मद्रास  के मुख्यमंत्री बने ।

आंध्र प्रदेश का गठन

1 अक्टूबर 1953 में आंध्र के क्षेत्र को मद्रास से अलग करके एक नया राज्य बना दिया गया था । इस नए राज्य के पहले मुख्यमंत्री टंगटूरी प्रकाशम बने ।

मृत्यु  / Death

आन्ध्र प्रदेश का एक नए राज्य के रूप में स्थापना के कुछ हीं साल बाद 20 may 1957 को प्रकाशम की मृत्यु हैदराबाद में हो गया।

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