Tilka Manjhi – History, Birth, War in Hindi

By | April 1, 2017

The great Tilka Manjhi was an Indian freedom fighter, read his history, birth, family, war and death in Hindi – जानिए महान स्वतंत्रा सेनानी के जीवनी के बारे में विस्तार से | अंग्रेजो के स्वाधीनता से भारत को आजाद करना के लिए कई वीर सामने आए और अंग्रेजो के विरोध में कई प्रदर्शन एवं विद्रोह किया गया | अंग्रेजो के खिलाफ वीरो के द्वारा किये गए जा रहे प्रदर्शन में कई वीर शहीद हुए और कई को गिरफ्तार कर अंग्रेजो के द्वारा फासी दे दी गई | भारत के इस स्वाधीनता आन्दोलन में पूरा भारत वर्ष ने हिस्सा लिया और इस आन्दोलन में कई वीर शहीद हुए | इस स्वाधीनता आन्दोलन में तिलका मांझी ऐसे व्यक्ति जिन्होंने स्वाधीनता की आवाज सबसे पहले उठाई थी |

Tilka Manjhi Biography in HindiImage Source – Quora.com

तिलका मांझी जिन्हें जबरा पहाड़िया भी कहा जाता है ये पहले भारतीय आदिविद्रोही है | भारत के पहाड़ी आदिम आदिवासीयो के कारण औपनिवेशिक यौद्धो के इतिहास में पहला आदिविद्रोही पढने को मिला | इन्होने अंग्रेजी हुकूमत के द्वारा हो रहे कृरुरता के खिलाफ एक लम्बी लड़ाई छेड़ी थी | इन्होने सभी संथालो को एकत्रित कर एक सेना का निर्माण किया और प्रथम संथाल विद्रोह का संचालन स्वयं तिलका मांझी ने किया था |

जन्म / Birth

11 फरवरी 1750  की तारीख सभी भारतवासियों के लिए यादगार तारीख है, क्योकि इस तारीख को एक संथाल परिवार के घर में भारत के वीर सपूत कहे जाने वाले प्रसिद्द स्वतंत्रता सेनानी तिलका मांझी का जन्म हुआ था | इस वीर पुत्र तिलका मांझी का जन्म स्थल बिहार के सुल्तानगंज जिला स्थित तिलकपुर गाँव है | इनके पिता ‘सुंदरा मुर्मू’ थे |

जीवन / Biography of Tilka Manjhi

तिलका मांझी का परिवार संताल परिवार के थे और संथाली अपने जीवन का अत्यधिक समय जंगलो में व्यतीत करते है | संथाली होने के कारण तिलका मांझी का बचपन जंगली सभ्यता के छाया में बिता दिए | इन्होने बचपन में ही जंगल के सभी जगहों से अवगत हो गये थे | जंगल में मांझी अक्सर धनुष बाण से शिकार करते नजर आ जाते थे | बचपन से ही मांझी को कुश्ती, उच्चे पेड़ो को चढ़ना, जंगली जानवरों के साथ छेड़खानी करने का शौख था | बचपन से जंगलो में घूमते घूमते एवं जानवरों के साथ छेड़खानी करने के कारण मांझी काफी साहसी, निडर एवं वीर बन गए थे |

हमारे देश में ऐसे वीर पुरुष और महिलायों की कमी नहीं है जिन्होंने अपने देश के लिए अपनी प्राणों की आहुति दे दी जैसे रानी दुर्गावती, चंद्रशेखर आजाद, कुंवर सिंह इत्यादि |

मांझी अपने बालपन अवस्था से ही अंग्रेजो के क्रूरता को अच्छी तरह से अवगत हो गये थे, अंग्रेजो को देखते ही इनके रक्त में उबाल आ जाता था क्योकि अंग्रेजो के द्वारा भारतीयों के सभी आदिवासियों के भूमि पर कब्ज़ा था | तिलका के मन में अंग्रेजो से प्रतिशोध लेने के लिए इनके दिमाग में बदले के लिए संयंत्र आरम्भ हो गया था | पेवार्तीय सरदार का अक्सर अंग्रेजो के साथ अपनी भूमि को ले कर विवाद हो जाता था और इस विवाद में पर्वतीय जमींदार अंग्रेजो का साथ लेते हुए नजर आते थे | ये सभी चीजे मांझी को काफी झझकोर कर रख देता था | और आखिर में मांझी के सब्र का समय समाप्त हुआ और मांझी ने “बनैचारी जोर” नामक स्थान  में अंग्रेजो के खिलाफ विद्रोह आरंभ कर दिया | मांझी के नेतृत्व में आरंभ हुई इस आन्दोलन में आदिवासियों का पूरा सहयोग मिला और यह धीरे धीरे पुरे जंगलो में फ़ैल गया | इस दरमियाँ अंग्रेजी हुकुमत ने क्लीव लैंड को मजिस्ट्रेट के रूप में नियुक्त कर राजमहल भेजा | मांझी की सेना और अंग्रेजी फौज के बीच कई कई संघर्ष हुए और मांझी पर्वतीय इलाको में छुप छुप कर अंग्रेजो पर हमला करते रहे | एक बार क्लीव लैंड और मांझी का अमन सामना हो गया | मांझी के सैनिक अंग्रेजो पर छिप छिप कर हमला करती रही इसी समय मौका देख कर मांझी एक पेड़ पर चढ़ गये और वह से क्लीव लैंड पर निशाना लगाकर क्लीव लैंड पर तीर छोड़ दिया जिससे क्लीव लैंड की मौत हो गई | क्लीव लैंड के मौत के बाद अंग्रेजी सरकार डर गई और अफसरों के बीच भय का बदल मंडराते हुए नजर आया |

क्लीव लैंड के मौत के बाद अंग्रेज मांझी पर हमला का सही अवसर का इन्तेजार करने लगे इसी बीच एक गद्दार पर्वतीय सरदार ने मांझी के ठिकाने के बारे में जानकारी दे और इस जानकारी के उपरांत अंग्रेज उस स्थान पर हमला कर दिया जिसमे मांझी तो वह से बच निकले परन्तु उनके कई साथी मरे गये | इस हमले के बाद मांझी और उनके साथी जंगल जंगल भटकते रहे और अंग्रेजो पर हमला भी करते रहे | अनाज के अभाव के कारण मांझी और उनके साथी का स्थिति ख़राब हो रही थी | साथियों का ख़राब स्थिति को देखकर मांझी ने अंग्रेजो पर अचानक हमला करने का निश्चय किया | इस हमले पर मांझी की हार हुई और उन्हें बंदी बना लिया गया |

मृत्यु / Death

अंग्रेजो पर किया गया अचानक हमला में मांझी और उनके साथी अंग्रेजो के द्वारा घिर गये और उन्हें बंदी बना लिया गया | बंदी बनाने के बाद अंग्रेजो ने मांझी को फासी देने का निर्णय किया और उन्हें 1785 को एक पेड़ लटकाकर तिलक मांझी को फासी दे दिया गया |

One thought on “Tilka Manjhi – History, Birth, War in Hindi

  1. Amrendra kumar

    Wah hamare country mein aise freedom fighter bhi the, sat sat naman

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