Types of SOIL Information – मृदा के प्रकार

By | May 7, 2016

पृथ्वी की upper surface पर thick, और thin Organic and inorganic मिश्रित कणों को मृदा (soil) कहते हैं। To chaliye jante hain ktine types ke Soil hote hain in Hindi. मिट्टी कई प्रकार के होते है और सभी मिट्टियों के रंग अलग अलग होते हैं। जैसे कुछ मिट्टी white तो कुछ red , कुछ brown, तो कुछ black होती है । तरह तरह के पदार्थ की उपस्थिति के वजह से मिट्टी में ये रंग आ जाते हैं।

Types of Soil found in India

Types of soil / मृदा  या मिट्टी के प्रकार 

(1) जलोढ़ मिट्टी (दोमट / कछार मिट्टी)

(2) काली मिट्टी

(3) लाल मिट्टी व पीली मिट्टी

(4) लैटराइट मिट्टी

(5) शुष्क मृदा

(6) लवण मृदा

(7) पीटमय मृदा

(8) पर्वतीय मिट्टी

 

जलोढ़ मिट्टी (दोमट मिट्टी) / Alluvial soil

India में लगभग  22 %  area  में यह  मिट्टी  पाई  जाती  है। इस मृदा का Creation नदियों के निक्षेपण से होता है। इस मिट्टी में पोटाश की मात्रा अधिक तथा nitrogen और Phosphorus की मात्रा कम होती है इसलिए इस में यूरिया खाद का डालना फसल के उत्पादन के लिए अच्छा माना जाता है। गेंहूँ , मक्का , धान आदि के खेती के लिए जलोढ़ मिट्टी को अच्छा माना जाता है । इस मिट्टी के भी 2 प्रकार होते है :- बांगर मृदा और खादर मृदा । जो पुराने जलोढ़ मिट्टी होते है उन्हें बांगर और जो नए जलोढ़ मिट्टी होते है उन्हें खादर मिट्टी कहते है ।

काली मिट्टी / Black Soil

जलोढ़ मिट्टी के बाद दुसरे स्थान पर सबसे ज्यादा पाया जाने वाला मिट्टी काली मिट्टी हीं है । सबसे अधिक ये मिट्टी Maharashtra और उसके बाद Gujrat में पाया जाता है। इस soil का creation बेसाल्ट चट्टानों (rocks) के टूटने से होता है। South India में इस मिट्टी को “रेगूड़” के नाम से जाना जाता है। इस मिट्टी का उपयोग कपास,ज्वार,चना,बाजरा , आदि के लिए किया जाता है।


लाल मिट्टी / Red Soil

इस soil का निर्माण Granite rock के टूटने से हुई है। इस  मिट्टी  में iron और silica ज्यादा पाई जाती है। फसल के लिए इस मिट्टी को अच्छा नहीं माना जाता है । तमिलनाडु, झारखण्ड, मध्य प्रदेश में इस मिट्टी को ज्यादा पाया जाता है। चूने का use कर के इस  मिट्टी  की fertility को बढ़ाई  जा  सकती  है। ज्यादा बारिस के कारण लाल मिट्टी के Chemicals अलग हो जाते है, जिससे  मिट्टी का color yellow दिखने लगता है।

लैटेराइट मिट्टी / Laterite Soil

इसमें iron और silica मात्र काफी अधिक होती  है । इस मिट्टी को चाय, कॉफ़ी और काजू के उत्पादन हेतु  अच्छा माना जाता है ।

शुष्क मिट्टी

इस मिट्टी में Soluble salts और Phosphorus की मात्रा अधिक पाई जाती है । तेलहन, ज्वार, बाजरा के उत्पादन हेतु इसे अच्छा माना जाता है।

लवणीय मिट्टी

इस मृदा को क्षारीय मृदा , उसर मृदा ,कल्लर मृदा आदि भी कहा जाता है । जिस स्थान पर जल निकास की अच्छी सुविधा ना हो उसी स्थान पर यह मिट्टी पाई जाती है । इस मिट्टी में नारियल की खेती को अच्छा माना जाता है । ये मिट्टी ज्यादातर punjab, Haryana, और keral में पाई जाती है ।

पीट मिट्टी (जैविक मिट्टी)

इस मृदा को दलदली मिट्टी(soil) भी कहते है । ये मिट्टी ज्यादातर Kerala और  West Bengal  में पाये जाते है। इसमें Phosphorus और potash की quantity कम और लवण(Salt) की quantity ज्यादा होती है।

पर्वतीय मिट्टी / Mountain Soil

इस मृदा में कंकड़ और पत्थर ज्यादा होता है । इसमें potash, phosphorus और चूने की कमी रहती है । गरम मसाला की खेती के लिए इस मिट्टी (soil) का उपयोग करना अच्छा होता है ।

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