वीर कुंवर सिंह जी की जीवनी, कहानी और इतिहास – Kunwar Singh

By | March 25, 2017

जानिए हमारे महान स्वतंत्रा सेनानी वीर कुँवर सिंह जी की जीवनी और कहानी | Hamare Veer Kunwar Singh ji ki life history in Hindi, 1857 independence war ki jankari. भारत की पहली स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाले कई सारे सिपाही और नायक थे | इन सभी नायको के बिच एक ऐसा भी शेर था जो 80 वर्ष के उम्र में भी अंग्रेजो के दांत खट्टे कर दिए थे और यह नायक कोई और नहीं अपने वीर कुंवर सिंह थे | कुंवर सिंह का जन्म जगदीशपुर के प्रतापी राजपुताना Ujjainiya Rajput के शासन काल में हुआ था जो अभी बिहार के भोजपुर जिले में पाया जाता है |

Kunwar Singh freedom fighter history in Hindi

जन्म और परिवार / Birth & Family

कुंवर सिंह का जन्म नवम्बर 1777 में Shahabad जीले के जगदीशपुर नमक स्थान पर हुआ था जो वर्तमान में बिहार में पाया जाता है | कुंवर का जन्म Ujjainiya राजपूत काबिले में हुआ था जो Parmars की एक शाखा है | इनके माता का नाम Rani Panchratan Devi एवम इनके पिता Raja Shahabad Singh थे | वीर कुंवर सिंह का विवाह मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप के वंशज गया जिला के जमींदार Raja Fateh Naraiyan Singh की बेटी से हुआ था |

इतिहास / History of Kunwar Singh

भारत में चल रहे प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जहा एक ओर से झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई अंग्रेजो और इस्ट इंडिया company के खिलाफ जंग छेड राखी थी ठीक इसी समय मंगल पाण्डे के द्वारा 1857 में विद्रोह का ऐलान किया गया था | इस समय कुंवर सिंह 80 वर्ष के थे इन्होने अपना उम्र का तकाजा नहीं करते हुए अंग्रेजो के साथ लड़ पड़े | 1857 को कुंवर सिंह में आरा नगर पर अपना कब्ज़ा जमाया | जब अंग्रेजो ने आरा पर हमला किया तो उस समय बीबीगंज और बिहिया के जंगलो में काफी घमाशन युद्ध हुआ | जिसमे अंग्रेजो ने आरा और जगदीशपुर पर अपना कब्ज़ा जमाया | इसके बाद अमर सिंह अंग्रेजो से छापेमारी लड़ाई करते रहे | कुंवर युद्ध निति में काफी माहिर थे जिसके कारण अंग्रेज लाख कोशिशो के बावजूद भोजपुर पर अपना कब्ज नहीं जमा पाया था | कुवर सिंह के वीरता को देख कर ब्रिटिश इतिहासकार होम्स ने अपने रचना में कहे थे की अगर कुंवर सिंह 80 वर्ष के नहीं होते तो शायद अंग्रेजो को भारत 1857 में छोड़ने पर मजबूर हो जाना पड़ता | केवल उनकी ज्यादा उम्र के कारण ही अंग्रेजो ने बड़ी कठनाई से अंत समय में जित प्राप्त की |

वीर कुंवर सिंह अपने जीवन काल में कई सरे लड़ाई लादे और लोग इन्हें वीर कह कर सम्बोधित करता था | इनके अपने जीवन की अंतिम लड़ाई 23 अप्रैल 1858 में लडे थे जिसमें कुंवर सिंह ने जगदीशपुर से अंग्रेजो को खदेड़ दिया | इस लड़ाई में कुंवर बुरी तरह घायल होने के बावजूद इन्होने जगदीशपुर किले में लहरा रहे यूनियन जैक झंडे को निकाल कर ही दम लिया | लड़ाई समाप्त होने के बाद 26 अप्रैल 1858 में इनकी मौत हो गई |

कुंवर सिंह से जुडी रोचक तथ्य / Interesting Facts

  • स्वतंत्रता के बाद भारत की आजादी में सम्मिलित हुए सभी बहादुरों के सम्मान में 23 अप्रैल 1966 को भारत सरकार द्वारा स्मारक डाक टिकट जरी किया गया |
  • वीर कुंवर सिंह के नाम पर 1992 में बिहार में Veer Kunwar Singh University का स्थापना किया गया |
  • वीर कुंवर अपनी उम्र के तकाजा किये बिना, 80 age होने के बावजूद, 1857 के विद्रोह में अपनी सेना ले अंग्रेजो के दन्त खट्टे करने के लिए उतर गये थे |
  • कुंवर सिंह के वीरता और कुशल रणनीति के कारण अंग्रेज कई आक्रमण के बावजूद जगदीशपुर पर शासन नहीं कर सका |
  • कुंवर के पास अंग्रेजो से कम संसाधन होने के बावजूद इन्होने अंग्रेजो को हराया |
  • अंग्रेजो से लड़ाई कर समय एक बार उनकी कलाई पर गोली लग गई थी, हाँथ में संक्रमण नहीं फैले इसके लिए कुंवर ने अपना हाँथ काट दिया और इसी अवस्थ में अपने घर सुरक्षित पहुचे |

यह कहना उचित होगा की महान वीर कुंवर सिंह सच में एक सिंह थे जिन्होंने  देश की रक्षा के लिए अपना सब कुछ, यहाँ तक की जीवन भी बलिदान कर दिया, ऐसे महान स्वतंत्रा सेनानी को मेरा शत-शत नमन |

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