Kaal Sarp Yog, Symptoms, Mantra aur Puja Vidhi – काल सर्प

By | May 19, 2016

Janiye aakhir kab aur kaise Kaal Sarp ka Yog banta hai aur iske dosh ke nivaran ke liye kaun si Puja Vidhi aur Mantra ka jaap karna chahaiye.  ऐसा माना जाता है की जब Rahu और Ketu के बिच में जब सूर्य और शनि के कुल ग्रह (planet) आ जाते है तो तब जा कर Kaal sarp yog बन जाता है। ज्योतिषो का मनना है की जब किसी इंसान के जन्मपत्रिका में कालसर्प का दोष होता है तो उसके जीवन में अक्सर उतार चढ़ाव होते रहते हैं। इस योग को astrology के अनुसार अमंगलिक माना गया है। कहा जाता है की ये एक ऐसा योग है जो इंसान को एक हीं झटके में आसमान से ज़मीन पर गिरा सकता है, बोलने का अर्थ यह है की कालसर्प के योग होने पर यह आपको काफी नुकसान पंहुचा सकता है |

Kaal Sarp Yog aur iske Mantra for Puja

कालसर्प योग का कारण / KaalSharp Yog hone ke Karan

काल सर्प योग भी इंसान के कर्मो से हीं होता है। यह योग उन लोगो की जन्म पत्रिका में होता है :-

  • जिसने पिछले जन्म में किसी भी सर्प (snake) को मारा हो ।
  • जिसने किसी भी निर्दोष जानवर को इस हद तक सताया हो कि उस जानवर मौत हो गयी हो।
  • या फिर ये भी कहा जाता है कि जब किसी व्यक्ति की दृढ़ इच्छा अधूरी रह जाती है और अपनी इच्छा को पूरा करने के लिए वो व्यक्ति दोबारा जन्म लेता है तो उसे भी इस योग का सामना करना पड़ता है ।

काल सर्प योग के लक्षण / Symptoms of Kaal Sarp Yog

Agar dhyan se dekha jaye to aap bhi kaal sarp yog ke lakshan ko pahchan sakte hain. Is ke yog hone par niche diye gaye lakshan aapko najar aayenge:

  • जिनकी कुंडली में काल सर्प योग रहता है उन्हें सपने में अक्सर dead people नज़र आते हैं।
  • Dead people में ज्यादातर family के ही लोग दिखाई देते हैं।
  • इस योग से पीड़ित लोगो को ऐसा feel होता है जैसे कोई उसका body या फिर गला दबा रहा है।
  • सांप से भय लगना या फिर सपने में body से सांप लिपटा हुआ दिखाई देता है ।
  • स्वप्न में अक्सर River, lake, sea आदि का दिखना ।
  • बीमारी या फिर किसी भी problem में खुद को अकेला feel करना, जीवन व्यर्थ लगना भी इसी योग के लक्षण हैं ।
  • ऊँचाई पर घबराहट लगना या सुनसान जगहों पर जाने से भय लगना भी कालसर्प का लक्षण हो सकता है।

Kalsarp ka Mantra

To agar aap  kaal sharp dosh ke nivaran ke liye koi mantra khoj rahe hai, to niche diye gaye mantra ka jaap karne se aapko na keywal kaalsharp yog se chutkara milega:

  • जिनके जन्म पत्रिका में इस योग का प्रभाव रहता है उन्हें हर रोज पंचाक्षरी मंत्र का “ऊँ नम शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का १०८ बार जप करना चाहिए।

कालसर्प योग का निदान / Remedies of Kalsarp Yoga

To chaliye jante hai kaal sarp ke dosh ke nivaran ke liye kaun se upay hai jise ghar (home) par hi kiya jaa sakta hai. Dhyan rahe ko kaal sarp yog ka nidan tabhi sambhav hai jab aap man se dhyan laga kar Prabhu (iswar) ki aradhana karenge aur bure karmo se duri banaye rakhenge:

  • काल सर्प दोष से छुटकारा पाने के लिए काले अकीक (सुलेमानी पत्थर) के माला से Rahu grah के बीज मंत्र का १०८ बार जप करना चाहिए।
  • Saturday को Peepal tree के जड़(root) में जल डालने से भी कालसर्प दोष कम होता है।
  • Panchami के दिन fasting रखकर नाग देवता की puja करने से भी ये दोष कम होता है।
  • Saturday या फिर पंचमी तिथि को 11 नारियल को बहते जल में बहाने से भी इस दोष को कम किया जा सकता है ।
  • metal के बने 108 नाग नागिन के Pairs को बहते जल में बहाने से भी इस दोष को कम किया जा सकता है ।
  • Monday को रूद्राभिषेक करवाने से भी कालसर्प दोष कम होता है ।
  • कालसर्प गायत्री मंत्र का chanting से भी इसका प्रकोप कम होता है ।

कालसर्प दोष पूजा विधि  / Kaal Sarp Dosh ke liye Pooja Vidhi

Aap jab bhi kaal sarp dosh ke nivarana ke liye pooja karne jaa rahe hai to is baat ka dhyan rahe ki us din sware naha kar puja par baith jaye. To chaliye jante hai Kaal sarp ki pooja vidhi wistar mein:

सामग्री / Ingredients

  • साबुत गेंहू ,
  • श्रीफल ,
  • सिक्का (1,2,5,या 10 का) 

पूजा विधि / Pooja Vidhi

  • सोमवार के दिन किसी भी शिवलिंग के समक्ष बैठ कर सवप्रथम शिवलिंग के ऊपर एक मुट्ठी साबुत गेंहू अर्पित करे और गेंहू अर्पित करते समय लगातार “श्री राम” का जाप करते रहे ।
  • उसके बाद शिवलिंग पर श्रीफल और फिर सिक्का (coin) अर्पण करें। इसे अर्पित करने time में भी श्री राम का जाप लगातार करते रहें।
  • जो सिक्का अपने पहले सोमवार को अर्पित किया है मतलब 1, 2 ,5,या 10 में से कोई भी सिक्का, वही संख्या वाले सिक्का को आपको हर बार अर्पित करना है।
  • उसके बाद शिवलिंग के चारो ओर घूमकर 21-21 बार कर के 3 चक्र पूरा करें।
  • इस पूजा को आपको 21 सोमवार तक करना होगा ।
  • 21 सोमवार तक लगातार पूजा करने के बाद एक सोमवार को छोड़ कर अगले सोमवार से दोबारा पूजा आरम्भ करें।

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